“बिवाह जन्म मरणं च, यदा यत्र भविष्यति”

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— कीर्ति नारायण झा।     

“बिवाह जन्म मरणं च, यदा यत्र भविष्यति” अर्थात बिवाह, जन्म आ मृत्यु सभटा लिखल छैक जे जहिया आ जतय होयत तखन फेर बेमेल बिवाहक तर्क कनेक दुविधा उत्पन्न करैत अछि मुदा सभ चीज के दू टा तथ्य होइत छैक एकटा आध्यात्मिक आ दोसर ब्यवहारिक। ब्यवहारिक तथ्य पर जखन हमरा लोकनि ध्यान दैत छी तखन हमरा लोकनि तऽ मनुख छी, त्रिभुवनपति बाबा भोलेनाथ जखन बिवाह करवाक लेल पहुँचल छलाह तखन हिनका बूढ आ बेमेल बर कहि पार्वती के माँ मैना परिक्षण करवा सँ साफ मना कऽ देने छलखिन्ह जकरा महाकवि विद्यापति अपन लेखनी सँ समस्त मिथिला बासी के अवगत कराओने छैथि “हम नहिं आजु रहब एहि आंगन जँ बूढ होयत जमाय…. जँ किछु बजता नारद बाभन दाढी धय लेब घिसियाय….. आब एहि ठाम प्रश्न उठैत अछि जे महादेव के अपन पति के रूप में प्राप्त करवाक लेल सहस्त्र वर्ष धरि तपस्या करयवाली गौरी के माय अपन जमायकेँ बेमेल मानैत छलीह। अर्थात कोनो आवश्यक नहि जे दुनिया के लोक के जे देखाइत छैक वेएह वास्तविकता होई। बिवाह दू टा पवित्र आत्मा के मिलन केर नाम होइत छैक।एकरा कखनहु चमड़ा अथवा रूपैया पैसा सँ तुलना नहिं कयल जा सकैत अछि। मुदा जखन हमरा लोकनि एकर ब्यवहारिक पक्ष पर अबैत छी आ आध्यायत्मिक पक्ष के विसरि दुनिया के मायाजाल के दिस अपना के लऽ जाइत छी तऽ बिवाह सभ दिन सँ एहिना भेलैक अछि। १९ – २० सभ दिन सँ रहलैक अछि। पहिले बिवाहक मान्यता रहैक जे बेटी के एहेन घर में पठाबी जाहि ठाम गुजर बसर करवाक लेल पूर्ण साधन होइ आ जाहि ठाम किछु अनहोनी भेलाक बादो बेटी के कोनो प्रकारक दिक्कत नहि होई। ओहि सुखी सम्पन्न घरक बर जँ कने पिण्डश्यामो छैक अथवा भुट्ट छैक तऽ लोक अपन बैटी के बिवाह कऽ लैत छल, ओहिठाम ओ गरीब घरक राजकुमार सन के बच्चा के अपन जमाय नहिं बनबैत छल जखन कि हुनकर बेटी राजकुमारी सन सुन्दर रहैत छलखिन्ह एकर अतिरिक्त स्त्री शिक्षा के अभाव में धनीक घरक बेटी जे देखबा मे सुन्दर नहिं रहैत छलीह हुनकर बिवाह दहेजक बल पर राजकुमार सन सुंदर बर सँ अप्पन बेटी के बिवाह करैत छलाह एकर बिपरीत गरीब घरक राजकुमारी सन के सुंदर बेटी के बिवाह पाई के अभाव में केहनो बर सँ कऽ देल जाइत छलैक। कतेको बर जिनका बिवाह कोनो कारण सँ बिवाह नहिं होइत छलैन्ह हुनक बिवाह सौराठ सभा सँ होइत छलैन्ह जखन परिणाम स्वरूप बेमेल बिवाह होइत छलैक ।ओहि समय मे आर्थिक स्थिति लोक के मेल आ बेमेल करबैत छलैक। आब परिस्थिति बदलि गेलैक अछि। आब स्त्री शिक्षा पर महत्व देल गेलैक अछि आ बेटी बेटा सभके लोक उच्च शिक्षा लेल पठवय लगलाह अछि। आब समाज मे जे कोनो लड़की लड़का डाक्टरी के पढाई करैत छैक ओहि में सँ ९० प्रतिशत सँ बेसी डाक्टर अथवा डाक्टरनी सँ बिवाह करैत छैक आ एहि सँ उत्पन्न होइत छैक अंतर्जातीय बिवाह। कोनो लड़का के अपन जातिक डाक्टरनी लड़की नहिं भेटलैक तऽ ओ आन जातिक लड़की दिस आकर्षित होइत अछि आ तहिना लड़की के सेहो होइत छैक। ओना जातीय दृष्टिकोण गौण मानल जाइत छैक मुदा अपना सभक ओहिठाम जाति, संस्कार रहन सहन एहि सभ पर बहुत ध्यान देल जाइत छैक। हिन्दी में कहावत छैक जे “दिल लगी गदही से तो परी क्या चीज है” अभिभावक के निष्क्रिय होयवाक कारणे अथवा धिया पुता पर अधिकार सँ वंचित होयवाक कारणे एखनो बेमेल बिवाह अपन सभक समाज मे बहुत बेसी भऽ रहल अछि आ जकर दुष्प्रभाव सँ छूट छुटौअल बला घटना अपन सभक मैथिल समाज मे बहुत बेसी बढि गेल अछि जकर संख्या पहिले के जमाना में नहिं के बराबर छल। लोक अपन बेमेल कनियाँ अथवा बर के संग जीवन निमाहि लैत छल मुदा आब परिस्थिति पूर्णतः बदलि गेलैक अछि। लोक में वरदास्त करवाक सीमा समाप्त भऽ गेलैक अछि जकर भयंकर परिणाम समाज में देखवा मे आबि रहल अछि।
एहि प्रकार सँ बेमेल बिवाह पहिले सेहो होइत रहै कम पाई होयवाक कारणे आ आबो भऽ रहल अछि बेसी एडवांस भेलाक कारणे…