“बाल श्रमके विरुद्ध समाजके जागरूक होयब आवश्यक।”

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— अखिलेश कुमार मिश्र।     

 

सभ सँ पहिने बुझु जे बाल श्रम की अछि। एकर मोटा मोटी मतलब भेल जे बच्चा सँ घर सँ बाहर अर्थात दोसर ओतय काज करेनाइ। एहि के लेल भारत सरकार चौदह वर्षक उम्र निर्धारित केने अछि। मतलब जे चौदह वर्ष सँ कम आयु के बच्चा सँ कुनो तरहक मजदूरीक काज नै करा सकैत छी आ इ कानूनन अपराध अछि।
बाल श्रम के कारण:
1. गरीबी: बाल श्रमक सभ सँ पैघ समस्या गरीबी अछि। माय-बाप, परिवार लग जेखन बच्चा कें भरण-पोषण करै लेल सामर्थ्य, कम सँ कम भोजनों के लेल पर्याप्त साधन नै रहैत अछि तs ओ सभ अपन छोट बच्चा के सेहो काज पर लगा दैत अछि। मिथिला तs एखनो धरि आर्थिक रूपें बहुत पिछड़ल अछि। परिणामस्वरूप मिथिलांचल में बाल श्रम बेसी अछि। बाल श्रमिक दोसरक घर दुकान वर्कशॉप आदि जगह पर काज करैत भेंट जैत।
2. अशिक्षा: बाल श्रमिक के माता पिता के अशिक्षित रहबाक कारण सँ ओ शिक्षाक महत्व नै बुझैत छैथि। जे उम्र बच्चा के स्कूल जाइ के रहैत छै, ओहि उम्र ओ सभ बच्चा कें काज पर भेजि क आर्थिक उपार्जन करs लागैत छैथि। मिथिलांचल में तs शिक्षाक स्थिति सेहो दयनीय अछि। तैं बाल श्रमिक या तs मिथिले में अपन काज करैत अछि या बाहर जा कs दिल्ली बम्बई कमाइत अछि।
3. जागरूकता: जागरूक नै रहला सँ बाल श्रमिक के माता-पिता एहि सँ सम्बन्धित बनल कानून के बारे नै जानैत छैथि। जदि ओ एहि कानून के संदर्भ में जानकारी राखता तs बच्चा सँ श्रम करा कs आर्थिक उपार्जन नै करताह।
4. सरकारी संस्थानक अभाव: मिथिलांचल में सरकारी संस्था ओतेक सक्षम नै अछि गरीब मजदूर सभ कें ओतेक जागरूक कs सकैथि जे बच्चा सभ सँ बाल श्रम नै ली। प्राथमिक स्कूल सभ सेहो ओतेक सक्षम नै जे घरही बच्चा सभक निगरानी राखि सकय।
5. कानून पालन में ढील: कानून जे बनल अछि जे बाल श्रम करेनहार पर सख्ती सँ नै लागैत अछि। तैं बालश्रम के लेल कानून बनल अछि ताहि सँ केकरो कुनो डरे नै होइत छै जे बाल श्रम के रोकि सकै।
एकर निदान अर्थात बाल श्रम के रोक थाम:
1. आर्थिक सक्षमता: मतलब गरीबी दूर भेजनाइ। सरकार कें एहेन योजना/परियोजना बनेबाक चाही जे समाजक सभ सँ नीच वर्ग (आर्थिक रूप सँ) के रोजगार उपलब्ध होइ ताकि ओकर परिवार आर्थिक रूप सँ सक्षम बनै।
2. प्रौढ़ शिक्षा आ जागरुकता: सरकार कें चाही जे जगह जगह पर एहेन संस्थान बनबै जे नीच वर्ग कें सेहो शिक्षित आ जागरूक क सकै जे बाल श्रम कें रोकि सकै। प्राथमिक स्कूल सभक निर्माण आ ताहि में तेहेन विभाग बनै जे बच्चा सभ कें नियमित देख रेख कs सकै आ पढ़ा सकै। मतलब बच्चा सभ कें बाल श्रम सँ दूर राखि पढ़ा लिखा सकै।
3. कानून पालन में सख्ती: सरकार कें चाही जे एहि सम्बन्धित बनल नियम कें सभ सँ सख्ती सँ पालन कराबै ताकि एहि में रोक थाम कैल जै। जदि एक दू टा पर कुनो कार्रवाई हेतै तs दोसर लोक सेहो सशंकित हेता आ बाल श्रम नै लेताह।
बाल श्रम सँ हानि: जाहि उम्र में बच्चा कें खेलय पढै के रहै ताहि उम्र में ओ श्रमिक बनि जाइत अछि। बहुत जगह देखल गेल अछि जे बाल श्रमिक सभ मालिकक शोषण के शिकार बनि जाइत अछि। बच्चा सभ डरे सही बात अपन माय-बाप लग सेहो नै कहि पाबैत अछि जे ओकर विकास में बाधक बनैत अछि। ओकर मानसिक विकास ठीक सँ नै भ पाबैत अछि।
बाल श्रम सँ लाभ: हरेक सिक्का के दू पहलू होइत अछि। तैं हानि सङ्गे लाभ सेहो कहि सकैत छी। मुदा बाल श्रम हानि के अपेक्षा लाभ बड़ कम होइत अछि। किछु केस में देखल गेल अछि जे बच्चा सभ काज करैत, बाहर भीतर जाइत बहुत किछु सिखि लैत अछि। नीक बेजा के ज्ञान सेहो जल्दी सिखि लैत अछि। एसगरे कतौ जाइ आबै में डर नै होइत छै। घर मे रहैत त माय बाप के काज पर गेलाक बाद बाहर गली में गलत सोहबत में पड़ि नशा सभक शिकार होइ सँ बाँचि सकैत अछि कियैक तs ओकरा लग एहि लेल समय नै रहैत छै ओ अपन काज में लागल रहैत अछि।
बाल श्रम के विरुद्ध समाज द्वारा मिथिला उठाओल ठोस डेग के बारे में हमरा विशेष जानकारी नै अछि।
लेख सँ अलग हम एक बात कहब जे ऐ लेल के जिम्मेवार? जाहि घर में खाइ लेल भोजन नै छै तs भूखे मरै सँ बढियाँ जे कम सँ कम कतौ पेट पर ही काज करै। तहन इ प्रश्न उठत जे जाहि माय बाप के बच्चा सभ के भरण पोषण के सामर्थ्य नै ओ बच्चा जन्म कियै देत। तहन एकर जबाब अछि जे बच्चा जन्म देनाइ सृष्टिक प्रथम नियम अछि। एहि पर कियो रोक नै लगा सकैत अछि। मिला जुला कs इ बात भेल जे एहि के लेल समाज के जागरुक होमय पड़तै तहने सरकार पर सेहो दबाब बनत आ एहि गलत प्रथा सँ समाज कें मुक्ति भेटतै।