“प्राकृतिक आपदा, जलक कुप्रबंधन आ सरकारी अवहेलनाक कारणसँ त्रस्त अछि मिथिला”

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— अरुण कुमार मिश्र         

“मिथिला आ बाढ़ि” एक टा एहन विषय अछि जाहि पर किछु लिखला सँ पहिने ओहि ठामक भौगोलिक स्थिति के जानब परम् आवश्यक छैक। मिथिला हिमालय पर्वतक तराई मे बसल दु टा देश नेपाल आ भारतक ओ भू भाग छैक जतय अपार जलक स्रोत आ प्रवाहक रहितहुँ ओहि जल संसाधनक उपयोग अखन धरि नहि कएल जा सकल अछि अपितु ओहि अपार जल प्रवाह जे विभिन्न नदीके रूपमे मिथिला मे बहैत अछि ताहि सँ बेसी क्षतिऐ भ” रहल छैक। भारतक स्वतंत्रत भेला उपरान्त एहि लेल अनको योजना बनलैक मुदा ओकर कार्यान्वयन सही सँ भेलैैक। कोशी प्रोजेक्ट के विफलता अकर मुख्य उदाहरण अछि। श्रद्धेय अटल जी के सरकारक योजना छलैक जे सभ नदी के आपस मे जोड़ि देल जाय आ जल संसाधन के सदुपयोग काएल जाय। हुनक सपना रहैक जे सब खेत के पानि भेटैक एहन व्यवस्था कएल जाय। जल प्रबंधन पर हुनक योजना हुनका गेला बाद नहि जानि कतय बिला गेलैक से नहि कही। मिथिला मे बाढ़िक समस्याक आ जल प्रबंधन पर ई० दिनेश मिश्र के चालिस बरखक अध्ययन, अनुभव आ शोध छनि जकर सरकारी स्तर पर उच्च स्तरीय कमिटी गठन क’ विस्तृत अध्ययन आ कार्यान्वयन हेवाक चाही।

मिथिलाक लोक १९३४ ई० कहियो नहि बिसरि सकैत अछि कारण जे अही वर्षक प्रारंभे मे १५ जनवरी के आएल प्रलयकारी भूकंप सम्पूर्ण मिथिला के तहस नहस भ’ गेल रहैक। अही भूकंप मे मिथिला के रेल आ सड़क यातायात के बुरी तरह प्रभावित भेल छलैक। निर्मली आ सुपौल रेल लाइन टूटि गेलैक जकरा दुरुस्त करवा मे ९० बरख लागि गेलैक। एहि प्राकृतिक दुुखद घटना के बाद कोशी नदीक प्रवाह निरंतर दरभंगा दिस होमय लगलैक। कोशी अपन धारा के प्रत्येक बरस बदलैत रहवाक लेल विख्यात अछि । मिथिलामे कोशीक विभीषिका सँ ओहि ठामक लोक के कुनु नव सम्बन्ध नहि अछि।

अखण्ड मिथिलाक स्वतंत्र अस्तित्वक लेल आंदोलन केनिहार डॉ० लक्ष्मण झा के कहब छलैन जे ब्रिटिश सरकारक नेशनल डिजास्टर फंड के अंतर्गत कोशी पर बांध बनेेवाक देल गेल पाई सँ भाखड़ा नांगल डैम बनाओल गेल। ओहि समयमे एहि लेल मिथिलामे भारी जन आक्रोश छलैैक आ ओहि समय मे प्रमुख अखबारमे सत्तारूढ अग्रणी नेता आ प्रवक्ता सभक बयान छपल छलैक जाहि मे मिथिलाक लोक सँ अपील काएल गेेल छलैक जे श्रमदानक माध्यम सँ कोशी पर बांध बनाओल जाय कारण भारत सरकार लग एहि लेल धन उपलब्ध नहि अछि। मिथिला के प्रति सरकारी उपेक्षाक शुरूआत एहि ठाम सँ भेलैक।

१९५४ ई० मे ब्रह्मचारी श्री हरि नारायण के नेतृत्व में कोशी के किछु भाग पर लोकक श्रमदान सँ बांधक निर्माण भेेलैैक। श्रमदान की शुरुआत मिथिलाक १५० पंडितों के द्वारा वैदिक मंत्र आ कोशी महात्यम इत्यादि के संग विधिवत पूजा पाठ करवाक बाद कुदारि उठाओल गेलैक। ओही समय मिथिला के गणमान्य साहित्यकार आ बुद्धिजीवी लोकक सहभागिता सँ जन जागरण अभियान चलल छलैक।

स्कूलिया बच्चा, कॉलेजक छात्र, युवा, बुजुर्ग सभ कयो बांध बनेवाक अभियान मे जुटल रहैथ। कोशी क्षेत्र मे कतेको ठाम श्रमदान शिविर लागल रहैक। मिथिला के विभिन्न कोन सँ लोक बांध बनेवाक लेेल पहुंचल रहैथ। किछुऐक बरखक अथक प्रयास सँ भुतहा, कुनौली, महादेव मठ, डुमरा इत्यादि कोशीक प्रवाह क्षेत्र मे बांधक निर्माण भेलैक।

१९५४ ई० मे जखन कमला मधुबनी के पूब सँ बहय लगलैक तखन लोक के चिंतित होएब स्वभाविक छलैक। कमला कियऽ उम्हर बहय लगली ? से चिन्ता के प्रमुुख विषय छलैक। मिथिलाक राजा रामेश्वर सिंह पूजा पर बैसि गेला जाहि सँ कमला वापस अपन स्थान पर चलि जाय मुदा कमलाक जल सूखा गेलैक आ ओहि बरख ठेहुन भरि पानि मे दुर्गा महरानीक प्रतिमा के विसर्जन करय पड़लैन, बहुत रास गाछ सूखा गेलैक। ओहि ठाम कुनु गाछ बृक्ष नहि छलैक, लोक धानक जड़ि सँ दातुन करैैत छलैथ। खेत मे चहुँ दिस पटुआ देखाइत छल। अनाजक कुनु दरस नहि छल, सौँसे बाउलूक ढ़ेर छलैक जे भवन निर्माण टा लेल उपयोगी छल।

कमला नदी पर तटबंध जयनगर सँ झंझारपुर धरि १९५० ई० सँ १९६० ई० के मध्य पुर्ण काएल गेलैक आ तकर बाद अकरा झंझारपुर सँ दर्जिया धरि पुर्ण काएल गेलैक मुदा से पहिले बाढ़ि मे रामघाट मे १९६३ मे टुटल छल। एहि तटबंध टुटला सँ बाढ़िक चपेट में खरवार, गंगापुर, गुणाकरपुर आ बेल्ही इत्यादि बहुत रास गाम आबि गेलैक। पुन: १९६४ मे तटबंध दैया खरवार समेत चारि ठाम टूटलैक जाहि सँ झंझारपुर, मनिगाछी आ मधेपुर प्रखंडक बहुत रास गाम बााढ़ि मे घिर गेल छलैक। एहि तरहेँ मानव निर्मित बाँँध आ बाढ़ झेलवाक एहि गाम लोक सभके नव अनुभव छलैैक। अही बरख जयनगर लग लक्ष्मीपुर गामक किछु भूभाग कटि क’ कमला नदीमे समा गेलैक।

तकर बाद १९६५ ई० के जुलाई मास मे बाढ़ि सँ भारी तबाही भेलैक, नेपाल के तराई मे जुलाई के पहिल सप्ताह मे खुब बरखा भेलैैक, झंझारपुर लग रेलक पटरी अर्धनिर्मित पुल आ अप्प्रोच रोडक संग तटबंध बाढ़िक पानि के सोझा छल। ८ जुलाई के मात्र १० घंटाक बरखा सँ नदीक जलस्तर १९६४ के देखल उच्चतम जलस्तर के पार क’ गेल आ पानिक बहाव रेलवे लाइनक अप्प्रोच रोड के तोड़ैत नीचा मुहेँ बढ़लैक जाहि सँ नदी के दुनु कात तटबंध के तहस-नहस भ’ गेलैक। एहि बेर कमला-बलान नदी के तटबंध २१ ठाम टूट गेलैक। रेल आ सड़क मार्ग ध्वस्त भ’ गेलैक। सम्पर्क टुटला के सूचना भेेटला उतर दरभंगा के कलक्टर जे. सी. जेटली झंझारपुर नहि पहुँच सकला, हुुनका पिपरा मे रुकय पड़लैन।

कहवाक तात्पर्य ई जे प्राकृतिक आपदा, जलक कुप्रबंधन आ सरकारी अवहेलनाक कारण मिथिला अखनो बाढ़िक विभीषिका छेलवाक विवश अछि। जल प्रबंधन सँ पनबिजली उत्पादन संग माछ, मखान आ सिंघारा उद्योग मे अपार संभावना छैक। सुखाड़ के स्थिति मे खेत के नहर के माध्यम सँ सिचाई कएल जा सकैत अछि। एहि लेल राजनैता आ प्रशासकक ढीढ़ इच्छा शक्ति के आवश्यकता छैक। अस्तु।