“ऑनलाइन शिक्षा – समयक परिवर्तन या भटकाव”

28

— उग्रनाथ झा।       

मानव जीवनक मूलभूत बेगरतामे रोटी , कपड़ा आ आवास अबैत छैक । एहि तीनू के पूर्ती के पश्चाद् जौ कोनो बेगरता छैक तऽ हमरा जनैत ओ छैक शिक्षा । कोनो भी समाज के सभ्यता , शालिनताके मापक छैक । जे समाजमें जतेक शैक्षणिक स्तर ऊँच रहल अछि ।ओहि समाजक स्तर ओतेक सबल रहल अछि । ताहि हेतु गरीब सऽ गरीब परिवार आपन धिया-पूताक निक शिक्षा-दीक्षा लेल समर्पित रहल अछि ।मानव सभ्यताके विकासक संग शैक्षणिक व्यवस्थामे सेहो विकास दृष्टिगोचर होईत रहल अछि ।सभक लेल शिक्षा सुलभ हो एहि अनिवार्यता केँ देखैत शायद शिक्षा के नि:शुल्क राखल गेल छल । जाहि सऽ अर्थाभावमे किनको शिक्षा वंचित नहि रहए पड़ैनि । इतिहासमे गुरू शिष्य परिपाटीक कतेको गुरूकूल भेटैत छैक जे शिष्य के आश्रममें राखि शिक्षा दैत छलाह । कतेको गुरुकुल राज्य संपोषित छल तऽ कतेको भिक्षाटन आधारित । अंत में जहन शिष्य समाजिक , आर्थिक , धार्मिक , आ नैतिक शिक्षा सं परिपूर्ण भऽ जाए छलाह त यथासाध्य गुरुदक्षिणा प्रदान कऽ गृहस्थ जीवनमें प्रवेश करैत छलाह । जे सभ्य , आ सशक्त समाज निर्माण में अग्रणी रहैत छलाह । अतीत के एहि अनुपम परंपरा विकासवादी छोड़ पकड़ि डेग बढ़ेलक मुदा एखनहु थोड़ बहुत अंश बचेने अछि ।

सरकार एखनहुं समाजमे शैक्षणिक विकास हेतु मुफ्त शिक्षाक ओरियान केने छैक ।जाहि सं शिक्षाक महत्वके आंकल जा सकै छै । मानव जीवनक एतेक पुनीत उद्देश्य ताहिमे समय केँ संग परिवर्तन कतेक फलदायक ओहू पर सोचबाक भार विवेकशिल समाज पर छैक । एहि परिवर्तनक कड़ी में वर्तमान में आनलाईन पठन-पाठन शिक्षा के क्षेत्र क्रांति कहि वा भ्रांति हमरा समझ सं बाहर आछि । हमरा जनैत विश्वस्तरीय महामारी -कोरोना काल’क शुरुआत सऽ पूर्व में आनलाईन पठन पाठन के सामान्य प्रचलन नहि छल । किछु विशिष्ट/ उच्च शिक्षा’क क्षेत्र में एहि प्रथा के चलन देखल जाए छल । छात्र लोकनि जाहि विशिष्ट शिक्षक /संस्था तक सदेह पहुंचि ज्ञान प्राप्त नहि कऽ सकैत छलाह ओतय आनलाईन माध्यमें जुड़नाय वरदान सदृश छल । मुदा कोरोना के संक्रमण सँ बचावके देखैत सरकार द्वारा देल गेल गाईड लाईन देखैत विद्यालय सभ अॉनलाईन पठन पाठन के शुरुआत केलाह ।जे तत्क्षण वरदान साबित भेल । किएक त जाहि रूपे कोविड भाईरस के संक्रमण नमहर अवधि तक मानव जीवन गतिविधि पर पहरा लगेने रहल । ओहेन परिस्थिति ओतेक आंतराल तक शिक्षा सं विद्यार्थीक संबंध टुटनाय अपूरणीय क्षति छल । एहि लेल अॉनलाईन पठन पाठन बहुत जल्दी आपन लोकप्रियता समाज में बनौलक । किछु सक्षम सरकारी विद्यालय आ लगभग सभ निजी विद्यालयमें आनलाईन शिक्षाके स्थान भेटल ।इ प्रणाली उच्च शिक्षा सं ससरि माध्यमिक सं प्राथमिक शिक्षा धरि पहुँचल । मुदा एहि विपत्ती कालक साधनके शिक्षा प्रणालीमे शिक्षाके माध्यम बनेनाय कतेक उचित ई तऽ भविष्यक गर्भ में ओझल छै । मुदा वर्तमान देखैत जे संभावना लगैछ ओ निक नै कहल जा सकै छै । जेकर कारण
1) अॉफलाइनमे जतय छात्र लोकनि गुरु जी सानिध्य में रहि किताबी ज्ञान के संग संग नैतिक आ व्यवहारिक ज्ञान यथा – समय के पाबंद रहनाय , उठनाई -बैसनाई के तौर तरीका , जेठ- छोट संग बातचीत आचार -विचार , समाजमे आपसी समन्वय के पाठ के अनुभव लैत छलाह ओकर स्थानापन्न आॅनलाईन शिक्षा में किताबी ज्ञान तऽ धत- पत प्राप्त करैछ मुदा नैतिक आ व्यवहारिक ज्ञान सं वंचित रहि जाए छथि ।
2) आॅफलाईन में शिक्षक आ छात्र के सिधा सम्पर्क के कारण शिक्षक छात्रक बीच स्पष्ट वार्ता स पाठ्य जनित दुविधा के दूर होएबाक प्रबल संभावना रहैत छैक जखन की आॅनलाईन पाठ्यमे छात्र शिक्षक आभासी रूपे मिलैत छथि जाहिमे शिक्षक के सभ छात्र पर नजरि रखनाए संभव नहि । एहन परिस्थिति में मेधावी छात्र आपन दूविधा साफ कऽ लैत छथि मूदा औसत छात्र के संकोचवश दूविधा बढ़ैत चली जाए छै ।
3) आॅफलाईन पढ़ाई में छात्र कक्षा में एकत्रित शिक्षा प्राप्त करैत छथि जतय भिन्न -भिन्न सोच समझ , परिवेश आ भिन्न भिन्न जाति- धर्म के छात्रक बीच आपसी भाईचारा , समन्वय एवं समावेशी भावना के विकास होईत छैक जखन की आनलाईन शिक्षामे एहन भावना नहि जागृत भऽ पाबय छैक। किए तऽ छात्र एकाकी रूप में रहैत छथि । बाहरी समाज के प्रति कर्तव्य आ दायित्व बुझबाक मौका नहि भेटै छै ।
4) आफलाईन शिक्षा में कोनो विशेष आ विशिष्ट उपकरणके आवश्यकता नहि जखन की आनलाईन कक्षा शुरु होएबा सऽ पहिने एण्ड्रायड मोबाईल केँ आ मजबूत इंटरनेट जुड़ावके उपलब्धता आवश्यक । आब सोचय बाला बात छैक जे गरीब परिवार आपन पेट काटि बच्चा के शिक्षा देबा लेल प्रतिबद्ध छथि ओ मोबाईल आ इंटरनेट के आभाववश बच्चा के शिक्षा देबा में असमर्थ भ जेताह आ बच्चा शिक्षा सं वंचित ।
5) आफलाइन शिक्षा में बच्चा में खेलखुद , वैचारिक आदान प्रदान सऽ मानसिक आ शारिरिक विकास होए छैक जखन की आनलाईनमे बच्चाके स्क्रिन पर नजरि आ कानक फोन लगेला सं आंखि कान प्रभावित भय रहलै अछि । जे स्वभावश छात्र के खौझाह ,झख्खी आ नेतृत्व विहीन बना रहल छै ।
6) भारत के अधिकांश छात्र गरीबी सं संबंध रखै छै आ ओ ग्रामिण परिवेश में रहैत छै जतय एखनो इंटरनेट के सुविधा सहि तरीका उपलब्ध नहीं फलस्वरूप ओहेन तरहक क्षेत्रक छात्र केँ भगवान मालिक ।
ताहि हेतु भविष्यमें एहि धारा पर यदि शिक्षा टीकल रहल निश्चय आबय वाला संततिमे नैतिक , समाजिक आ भावनात्मक कमि आयत बस किताबी विद्वान बनि रहि जाएत ।ताहि हेतु शिक्षा में ई व्यवस्था समयक परिवर्तन बुझि आ कीँ भटकाव ?
सादर