“आएल सखी हे सर्व सोहाओन साओन के महीना”

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— आशा चौधरी।             

आयल सखि हे सर्व सोहाओन सावन के महीनमा

घर घर सखी सब लाबा भुजथि पूजब नाग नगिनियां
भरि पनपथिया जाही जूही राखल कोबड़ा कात मे
बाबा पाबनि मोर लगिचायल पिया जी नहिए एलखिन ना
मधुश्रावणी पावनि मे वातावरण एहि गीत नाद स मिथिला मे आनंदित कय दैत अछि।ई पावनि नवविवाहित जोड़ी के लेल विषेश रूप स अछि मुदा जतेक अहिवाती छथि सेहो मधुश्रावणी दिन नोन बारे छथि। ई पावनि सब अपन अपन सोहाग के लेल करै छथि।साओन मासक कृष्ण पक्ष मे पंचमी स शुरू होइत अछि परंतु एकरा एक दिन पहिले स शुरुआत भऽ जाइए। जेना एक दिन पहिने फूल लोढ़य लै नवविवाहित सब जाइत छथि ओहि दिन स नहाय खाय शुरू कय दै छथिन।
और द्वितीया तिथि पर टेमी परैत छैक तखन समापन भय जाइत अछि।
चौदह दिनक ई पावनि बहुत सोहनगर लागैत छै।
ज्यादा तर ई पावनि नैहर मे मनाओल जाइत अछि परंतु आब समय बदलि गेलै लड़की नोकरी मे रहै छथि त बाहर मे सहो देखऽ मे आबि रहल अछि।
एकटा नियम बनल छै जे एहि पावनि मे सासुरक दाना खा क पावनि होइत अछि। सब पावनि त एक दिन के होइत अछि लेकिन ई पावनि चौदह दिनक कियैक होइत छै तकर कारण छै पहिले के समय मे पुरुष वर्ग गुरु कुल मे शिक्षा ग्रहण करैत छलाह और बेटी के शिक्षा के अहि चौदह दिन मे गुरु पत्नी के द्वारा देल जाइत छलैन्ह।
गुरु पत्नी नवविवाहिता के घर गृहस्थी केना सम्हारल जाइत छै तकर शिक्षाक संग दांपत्य जीवन कोना सुखी रहतैन से पाठ सिखाबै छलथि। संगहि पतिव्रता स्त्री के कथा गौरी शंकर के कथा यानी अपन सनातन धर्म संस्कृति और पर्यावरण पृथ्वी अवतरण सारा किछु हुनका मे भरि दै छलखिन।
जेहन अन्न तेहन मन, तैं लऽ कऽ सात्विक आहार देल जाइत छलैन्ह एकदम सँ निरामिष भोजन। पवित्र वस्त्र। नाग देवता के पूजाक सेहो प्रधानता अछि।
कथा कहय वाली कथा सँ पहिने और बाद मे बिन्नी सुनाबै छथिन । और मधुश्रावणी के दिन अंत मे पहिरा ओढ़ाकय कनिया क सहनशीलता के परिक्षा होइत छै टेमी दाइग क।
सासुर स एक दिन पहिने भाड़ दोर आबै छै पंचमी मे त एक दूटा भाड़ आबै छै परंतु मधुश्रावणी दिन मे भाड़क छोड़ लागि जाइत अछि , भाड़ मे अंकुरी के बड महत्व अछि चंगेरा मे भरि भरि अंकुरी आबैत आछि आ जतेक महिला हकार पुरै लै आबै छथि सबके खोंइछ में अंकुरी देल जाइत अछि।
एक और विषेशता अछि एहि पावनि के एहि मे भोज महिला लोकनि खाइत छथि आ कोजगरा में पुरुष वर्ग।