“भार त’ एकटा मनोरथ थिक”

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  1. — सोनी झा।             

“भार” जेना कि नाम सुइने क लागि रहल अछि भारी,हमर मां कहैथ दाय भार भारीये होय छै। हमर मां के प्रयास रहै छलैन्ह जे कम स कम भार आवै, ताकि भार वापस दै काल में सहुलियत रहे। अपना मिथिला में भारक बड महत्व छै जे कि नीको छै। और कखनो क बेजा सेहो भ जाय यै। बेजा तखन जखन ओहि के लेल मजबूर कायल जाय। भार संस्कृति और लोकाचारक एगो बढिया माध्यम छल ओहि भार में एगो साउस,माय और दु गो अलग गामक संस्कृतिक के मेल -मिलाप होय छल। कतेक स्नेह स भार सांठैत छलैथ और भार एला पर नवकनियाक खुशी के कल्पना नै क सकै छी  जिनका जेतेक पार लागै छलैन ओ सांठै छलैथ। मुदा ओहे में किछु पुंजीपति भार के भारी बना देलैथ भार के विस्तृत क सबहक नज़र में नाम कमेलैथ। ई पुंजीपति बला मानसिकता कहियो,वा दिखावा कहियो अखनो चलि रहल अछि। रुप बदैल गेल, आधुनिकता हावी भ गेल यै, मुदा रूप ओहे अछि।हम अपन दु गो बहिन तक भरिया देखने छी जखने भरिया आवैथ त सब बच्चा ओकरा चारु ओर स घेर लै छलौं। आब भारक अदान- प्रदान त होय यै अखनो, मुदा ओकर पहुचावै स ल क कि जायत? और कतेक जायत ई एगो डील भ गेल यै अगर मधुश्रावणी में दस गो भार जायत त कोजगरा में पंद्रह गो भार ले तैयार भ जाऊ उपर स मखान लै त विशेष आर्डर रहै यै जे हमर गाम बड़का अछि त हमर लियोनहारक पसार बड़का। उपर स कपड़ा लत्ता स ल क शो फटक्का उपर स।भार त एगो व्यवहार भेल जेना चोरचन(चौठचंद्र) में जमाय के बहुत प्रकारक व्यंजन बना दै छलैथ ओहि में ई देखल जाय छल जे विन्यास के संगे स्वाद केहन अछि। संगे कोनो-कोनो पिरुकिया में मैथिलानी सबहक गुदगुदाइत मजाक सेहो भरल रहैत छल  मुदा आव भारक बदला पाय के लेन देन के कोन श्रेणी या व्यवहार में राखव से नै बुईझ??हम त एतवी कहव जे संस्कृति के निभाउ जरूर मुदा ओकरा भारी नै बनाउ भारे तक सीमित रहअ दियौ। जेतेक जिनका पार लागै करू ई भार एगो स्नेह होयत अछि त कोनो नव वर वधु के अरमान बस एकरा मनोरथ तक रहअ दियौ। मथदुखी नै बनाऊ।