“संगठनक नींव होइत छथि नेतृत्वकर्ता”

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— अरुण कुमार मिश्र।                 

नेतृत्व कर्ता संघठनक नींव होइत छैथ, जिनका पर संघठनक सभ सदस्य विश्वास करैत छैथ तँ हुनक क्षमता आ कार्यकुशलता पर संघठनक भविष्य निधारित होइत अछि। संघठनक सभटा जिम्मेवारी नेतृत्वकर्ता पर होइत अछि। नेतृत्व क्षमता नेतृत्व कर्ता के मुख्य गुणमे समाहित होइत अछि जेनाकि…….

१) दोसरो के मान सम्मान दैथ ।
२) धैर्यवान होइथ वा रहैथ।
३) सबके संग ल’ चलैथ।
४) अपना निजि स्वार्थ सँ ऊपर उठि, अनको हित। सोचैथ।
५) अनको विचार सुनैैथ वा लैथ।
६) बुद्धि सँ काज करवामे सक्षम होइथ।
७) स्वयं निर्णय लेवामे समर्थ होइथ।

उपरोक्त गुण जाहि संघठनक नेतृत्वकर्ता मे होइत छन्हि ओ संघठन निश्चित रूपे प्रगति करैत अछि अन्यथा ओकर अवसान निश्चित अछि। नेतृत्व क्षमताक आंकलन गुण के आधार पर होइत अछि। नेतृत्वमे नैतिकताक बड महत्व छैक। खेलक मैदान सँ युद्ध भूमि धरि नेतृत्व क्षमताक आधार पर हार जीत निश्चित होइत अछि। 1983 ई० के क्रिकेट वर्ल्ड कप आ 1971 ई० के भारत पाकिस्तान युद्ध एकर प्रत्यक्ष उदाहरण अछि जे विशुद्ध नेतृत्व क्षमता के आधार पर जीतल गेल छल। नेतृत्व कर्ता के साम, दाम, दंड, भेदके नीति सेहो अपनेवाक लेेल तैयार रहय पड़ैत छन्हि तँ नेतृत्व क्षमताक बड महत्वपूर्ण अछि। गोस्वामी तुुलसी दास जी राम चरित मानस मे लिखने छथिन “समरथ को नहीं दोस गोसाई, रवि पावक सुर सर की नाहीं”

संयुक्त परिवारमे घरक मुखिया नेतृत्व क्षमता के आधार पर बनाओल जाइत छल जाहिमे सबके सहमति रहैत छलैक। पारिवारिक निर्णय हुनके नेतृत्वमे लेल जाइत छलन्हि। गाम, नगर, महानगर, राज्य एवं देशक विकास नेतृत्व क्षमता पर निर्भर करैत अछि।

संघठनक प्रबंधन टीम ई निर्धारित करैत अछि जे संंगठन कोना चलाओल जाय। नैतिकता आ व्यवहारक संगठनमे दीर्घ काल धरि प्रभाव पड़ैत अछि। प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के संगठनमे आकर्षित करवाक लेल सकारात्मक सोच राखब परमावश्यक अछि।

पुुरातन समयमे भारत विश्व गुरू रहल अछि । ऋषि-मुनिक ई भूमि अपन ज्ञानक विशिष्टताक कारणे विश्व पटल पर अपन स्थान पुनः स्थापित क’ रहल अछि। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनेवाक घोषणा भारतक पहल पर भेल अछि। विश्व शांति लेल भारतक प्रयास अग्रणीय अछि। भारतक नेतृत्व क्षमता के डंका सम्पूर्ण विश्व मानैत आबि रहल अछि।