“नेतृत्व क्षमता एकटा मानवीय गुण होइत छैक”

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— कृति नारायण झा।               

“कौआ भेल भरारी तऽ गूंहे गूहटार” “आन्हर के जँ नेतृत्व करवाक लेल दऽ देल जाय तऽ ओ सभ के खद्धे में खसाओत” एहेन – एहेन बहुत रास कहबी अपना सभक ओहिठाम कहल जाइत छैक नेतृत्व क्षमता केर विषय में । ई अनुभव केर बात सेहो थिकै जे अपना सभक गाम मे कोनो काज केर सफलता जे ओकर संचालन करैत रहैत छैक ओकरा पर सभ सँ बेसी निर्भर रहैत छैक ओकर सफलता आ असफलता। उदाहरण स्वरूप एकटा छोट छीन भोज भात के लऽ लिअऽ। जँ ओकर व्यवस्थापक ठीक नहिं छैक तऽ भोज में अमुक समान घटि गेल जकरा लेल भोज घीना जाइत छैक अथवा सामान केर एतेक बेसी व्यवस्था भऽ जाइत छैक जे सभटा समान फेकय पड़ैत छैक आ जँ व्यवस्था नीक रहैत छैक तऽ सभटा काज सही समय पर नीक जकाँ होइत छैक। कहवाक तात्पर्य इ जे काजक सफलता अथवा असफलता ओकर नेतृत्व क्षमता पर निर्भर करैत छैक। इतिहास सेहो एहि बात केर गवाह अछि जे सिकंदर महान जे विश्व विजय केर पताका फहराओलनि ओहि में सिकंदर के नेतृत्व क्षमता केर सभ सँ पैघ हाथ छलैक। झाँसी के महारानी लक्ष्मी बाई अंग्रेज के छक्का छोड़ओने रहैथि अपन सफल नेतृत्व क्षमता सँ। नेतृत्व क्षमता अनिवार्य रूप सँ व्यवहार अथवा कौशल के कहल जाइत छैक जे एकटा प्रभावशाली नेतृत्व केर परिभाषित करैत अछि। नेतृत्व क्षमता एकटा मानवीय गुण होइत छैक जे कम आदमी में पाओल जाइत अछि जे आदमी के दिमागक भाषा के बुझैत अछि। नेतृत्व मुख्य रूप सँ नेता शब्द सँ अबैत छैक मुदा इ शब्द अपन सभक समाज में एतेक नकारात्मक रूप लऽ लेने अछि जे हमरा लोकनि एकर नाम सँ दूर रहय चाहैत छी मुदा इ अर्थ संकीर्ण अछि. नेतृत्व मात्र राजनैतिक रूप सँ नहिं बल्कि सामाजिक, आध्यात्मिक, आर्थिक आ सांस्कृतिक क्षेत्र में सेहो होइत अछि। किछु महान दार्शनिक आ सफल व्यक्ति केर किछु कथन के एहिठाम चर्चा कऽ रहल छी जाहि सँ मस्तिष्क केर तरंग एहि कथन सँ हिलेवाक मुद्रा में आओत – “एकटा सफल नेता वेएह होइत छैथि जे स्वयं रस्ता जनैत छैथि, ओहि रस्ता पर चलैत छैथि आ वएह रस्ता दोसर के देखवैत छैथि।” “जे लोक सँ इ नहिं कहैथि जे काज कोना करवाक अछि, मात्र इ कहबाक अछि जे काज करवाक अछि।” “भीड़ के पाछू नहिं भागू बल्कि एहेन काज करू जाहि सँ भीड़ अहाँक पाछू भागय “” एकटा सफल नेता वेएह भऽ सकैत छैथि जिनका मे आत्मविश्वास कूटि कुटि कऽ भरल होअय आ जे साहसिक निर्णय लेबा में सक्षम होइथ आ दोसरक आवश्यकता के जानवाक क्षमता हुनका मे होइन। ” एकटा दार्शनिक बहुत सुंदर पंक्ति लिखने छैथि जे जँ अहाँ उड़ि नहिं सकैत छी तऽ दौड़ू, दौड़ि नहिं सकैत छी त चलू आ जँ चलियो नहिं सकैत छी त कम सँ कम रेंगू अवश्य। सदैव आगू बढवाक प्रयास करैत रहू। एकटा सफल व्यक्ति के मुँह सँ तऽ इ बात सुनलहुँ जे हम कोनो सही निर्णय में विश्वास नहिं करैत छी बल्कि निर्णय लऽ कऽ ओकरा सही करवा में विश्वास करैत छी।