“मिथिलाक गृह उद्योग”

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— कृति नारायण झा।                     

मिथिला में आब उद्योगक सम्भावना बहुत बेसी बढि गेल अछि। बिजली आ सड़क केर ब्यवस्था पहिने सँ बहुत नीक भऽ गेलाक कारणे आब छोट मोट लघु आ कुटीर उद्योग के सम्भावना बहुत बेसी बढि गेल अछि। एखन हाल मे झाजी अँचार पूरा बजार मे तहलका मचाओने अछि। दरभंगा केर इ झाजी अंचार कल्पना झा आ उमा झा नामक ननैद आ भौजी के अथक प्रयास सँ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आ बंगलोर सन महानगर में लोक के खूब नीक लागि रहल छैन्ह। रंग बिरंग के अँचार, पापड़, कुम्हरौरी, दनौरी, तिसियौरी, अदौरी, मुरौरी सभ बजार में पहुंचैत देरी छुहुक्का जकाँ उडि़ जाइत छैक कारण जे मिथिलाक लोक कोनो वस्तु के बनेबा में कोनो तरहक कोताही नहिं करैत छैथि भले ओकर लागत मूल्य बढि जाए तकर ओ परवाह नहिं करैत छैथि। मिथिलाक तीन अनुपम वस्तु पान, मखान आ माछ के अतिरिक्त बहुत एहन सामान मिथिला में उपलब्ध अछि जकर उद्योग लगा कऽ मिथिलाक गरीबी आ बेरोजगारी के चुटकी में समाप्त कयल जा सकैत अछि संगहि एहिठाम सँ मजदूर केर पलायन के रोकल जा सकैत अछि। मिथिलाक पारम्परिक खान पान जेना मखानक खीर, व्यंजन, अँचार, सत्तू इत्यादि सभ मिथिला में अनुपलब्धता के कारण एकरा पुनः उपलब्ध कराओला सँ स्वावलंबन आ रोजगार केर संभावना देखाइत अछि। हमरा लोकनि जखन बर्गर – पिज्जा, इडली – डोसा, ढोकला, चाउमीन मोमोज के जखन हमरा लोकनि अपन भनसा घर मे स्थान दऽ देने छियै तऽ अपन सांस्कृतिक – पारंपरिक खाद्य पदार्थ केर पुनर्जीवित करवा मे कोन हर्ज? मिथिलाक लोक में आदि कालहि सँ उद्यमिता सँ बेसी नौकरी करवा पर अधिक रूचि रहैत छैन्ह मुदा आब धीरे-धीरे लोकक मानसिकता में परिवर्तन भेल जा रहल छैक। आब एहि ठाम केर लोक बाहरसँ डिग्री डिप्लोमा लऽ कऽ एहि ठामक उद्योग के उन्नति करवाक प्रयास में लागि गेलाह अछि जे मिथिलाक लेल शुभ संकेत अछि।
कटहर केर अँचार आ अंडेबा केर प्लास्टिक चटनी, कुम्हर केर असली मुरब्बा एहि ठामक एक्सक्लूसिव सामान छी जकरा आगू बढाओल जा सकैत अछि। उपर वर्णित मीनू में अस्सी प्रतिशत सँ बेसी मिथिलानी के हाथ सँ बनाओल जाइ बला बस्तु सभ अछि आ एहि सँ मिथिलाक महिला लोकनिक स्थिति सुदृढ हेतैन्ह आ अपन पति केर दरमाहा पर निर्भरता कम हेतैन्ह जाहि सँ समाज में अथवा परिवार में महिला पर होमय बला प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष अन्याय के विरुद्ध अपन आवाज बुलंद कऽ सकैत छैथि। दहेज सन केर सामाजिक कुरीति अपनहि आप समाप्त भऽ जाएत। एकर अतिरिक्त मिथिलाक जनेऊ, एहि ठामक चित्रकला, मिथिला पेंट दुनिया के अन्य जगह भेटनाइ असंभव अछि। एहि ठामक लोक व्यवसाय में पाइ लगेबा मे आनाकानी करैत छैथि जकरा भरोसा दऽ कऽ समस्याक समाधान कयल जा सकैत अछि।
एहि ठामक आम समस्त देश मे अपन स्वाद सँ सभके प्रभावित करैत अछि, एहि ठाम केर बम्बैइ आ मालदह आमक रस सँ पेय पदार्थ के समक्ष रसना आ मेंगो जूस सभ सभटा फीका भऽ सकैत अछि। एहि आमक रस सँ अम्मट बना कऽ बेसी दिन धरि आमक विशुद्ध रस केर आनन्द लेल जा सकैत अछि। मिथिलावासी जँ मोन में ठानि लेथि तऽ सभ समस्याक समाधान चुटकी बजाओला सँ भऽ जाएत ई हमर सभक विश्वास अछि।