“छटपटाइत मिथिला”

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— उग्रनाथ झा।                     

मानव जीवन के मुलभूत आवश्यकता में प्रमुख अछि – रोटी , कपड़ा आ आवास । जे हमरा लोकनि के स्वस्थ्य , सभ्य आ स्थायी समाज निर्माण करबाक कुंजी अछि । जाहि लेल मानव सतत संघर्षशील रहैत छैक । ब्रह्मांड में जतेक जीवन धारि छैक ओहि मे मात्र मानव विवेकशिल जे अपन निक बेजाय के अभिव्यक्ति संग स्वयं निर्णय खरबाक क्षमता छै ।मानव शरीर बहुत प्रबल या़ंत्रिक विधि सं रचल हाड़ मांस के पुतला छैक जाहि पर भौतिक प्रभावक असर होईत रहैत छैक ।शरीर पर समतुल्य प्रभाव सँ जतय हृष्ट पुष्ट होए छै त असंतुलित प्रभाव रूग्णताक कारण बनैछ । रुग्ण अवस्था प्राप्त व्यक्ति आदि काल स वैद्यक शरण जाएत रहल अछि जतय सं रूग्णताक उपचारक फलस्वरुप आरोग्यता प्राप्त करैत छल । विकासवादी दौर आ शिघ्र स्वास्थ्य लाभक कामना के कारण आयुर्वेदिक चिकित्सा के स्थान वर्तमान में एलोपैथिक लय लेलक ।ओना अलग बात जे वर्तमान में लोकक रूझान आयुर्वेद तरफ बढ़ी रहल अछि ।
वर्तमान में मिथिला में स्वास्थ्य चिकित्सा एकटा भयानक समस्या अछि जेकर कारण अछि चिकित्सकीय निदान के भ्रम जाल । विकासवादी समय में शारिरिक समस्या आ निदान के नव नव खोज जतय रोगक निदान के स़बलता प्रदान करैछ । ओतबही बिमारीक भयावहता प्रदान ख रहल छैक ।स्वास्थ्य सेवा के बहाली सतत राज पक्ष आधारित रहल जाहि सं समाजक सब वर्ग के समुचित सेवा के लाभ भेटय मुदा वर्तमान में चिकित्सा व्यापार बनि रहि गेल अछि । सर्वप्रथम शुरू करी चिकित्सक लोकनि जिनका देवता तुल्य मानल जाएत छन्हि ओ सार्वजनिक चिकित्सा स्थल के दरमाहा तसिलबाक दोकान बना देने छथिन्ह आ आपन स्वरूप विकराल काल बना लेने छथि । सरकार द्वारा देल गेल सुविधा आ पदस्थापित चिकित्सक , आ चिकित्सा सहायक आपन पदस्थापन पर रोगी फसेबाक दोकान बुझि गेल छैथ जे यथासाध्य सुविधा रहलो पर असुविधा सुना निजी चिकित्सालय पर बजा लैत छथि आ ओतय रोगक भयावताह देखा मुर्गी गुण हलाल करै छथि । हं हम ई नहि कहै छि जे सब चिकित्सक के तराजू पर किछु एखनो आपन देवत्व संरक्षित केने छथि ।
रहल बात सुविधा के बात सार्वजनिक चिकित्सालय त एखन तक जे आछि ओहि में 10-15% तक परिपूर्ण अछि । ताहि में स मिथिला में हमरा जनैत एकोटा मिथिला में अवस्थित नहि । तहन त प्राथमिक आ माध्यमिक उपचारक दृष्टिए जे भी हास्पीटल अछि ओहि में संचालक के इच्छा के कारण या संचालक के अभाव में खराब पड़ल आछि या जाईन बुझि खराब कयल गेल अछि ताकी निजी स्थल पर पठाओल जा सकै ।जखन की सक्षम त स्वतंत्र छैथ कतौ उपचार करा सकै छैथ पऱतु निचला तबका घरारी बेचबा पर मजबूर छथि ।
मिथिला में स्वास्थ्य समस्या नहि बल्की शिक्षा पर्यटन सब चरमायल आछि कारण जे मिथिला आ मगह में विभेद सब दिन स रहल । जाधरि स्वतंत्र इकाई के रूप मिथिला स्थापित नहि होएत मिथिला उपनिवेश बनल रहत । चाहे आई जी एम एस हो वा एम्स पटने में किएक ? पर्यटन स्थल ओम्हरे किएक ? अभियांत्रिक विद्यालय ओम्हरे किएख ? कने मगह आ मिथिला में एहि तरहक अनुपात पर गौर करब। मुख्यमंत्री के ओ कथन एखनो याद अछि ” मगध में नहि होनी चाहिए एक भी बच्चे की मौत ” उक्त कथन जहन सैकड़ों बच्चा मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार स कालकवलीत भ गेल छल लेकिन महराज सुतल रहलाह । हम सब हुनकर गुणगान में रमल रहलौ । ताहि लेल वर्तमान बिहार में उपेक्षित मिथिला में मुलभूत आवश्यकता स्थापित भ जाएत संभव नहि लगैत आछि ।एकटा एम्स सुनलियै मिथिला में भेटल पता नहि कागज सं जमीन पर आएत की नहि । राज्य स्तर सं प्रदान कयल जाए वाला सुविधा भेटत तखने ने किछु आगा केन्द्र स आश । इएह आगर मगध में प्रस्तावित रहैत त निश्चित प्रगतिक दशा किछु और रहैत । एहन कतेक योजना परियोजना अधर में छैक।
तहन जे किछु हथ उठाई स्वरूप सुविधा भेटै छैक ओकरा सुव्यवस्थित रखबा के जिम्मेवारी हमरो सब पर अछि । परंतु हम सभ कतेक निवाहै छि भगवान मालिक । कोनो तरहक आक्रोश भेल तुऱत तोड़फोड़ आगजनी की आपन पैर पर कुरहारि मारि लैत छि । जे भेटल से सहेजू आ संगठित भ प्रयास करू । मुहतक्की कतेक दिन ?
जय छटपटाईत मिथिला