“विश्वास – जीवन के सबसँ पैघ आधार”

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— कृति नारायण झा।             

एक गोटे माता रानी केँ परम भक्त छल। ओ बहुत प्रेम भाव सँ माता रानी के सेवा करैत छल। एक दिन माँ जगत जननी सँ कहय लागल जे हम अहाँ के एतेक भक्ति करैत छी मुदा आइ धरि कहियो हमरा कोनो अनुभूति नहि भेल जे अहाँ हमरा नजदीक रहैत छी। हम चाहैत छी जे अहाँ भने हमरा दर्शन नहि दियअ मुदा हमरा ई अनुभव होअय जे अहाँ हमरा आसपास छी। माता रानी कहलखिन्ह ठीक छै। अहाँ रोज भोरे भोर समुद्र कात मे टहलवाक लेल जाइत छी। जखन ओकर बालू पर अहाँ चलब त देखवै जे अहाँ ओहि बालू पर दू नहि चाइर पएर के निशान देखवैक जाहि सँ अहाँ के हमर उपस्थिति केर अनुभूति होयत। ओ भक्त अगिला दिन समुद्रक कात में टहलवाक लेल गेल तऽ देखि कऽ अत्यन्त प्रसन्न भऽ गेल जे वास्तवमे दू पएर के स्थान पर चारि पएर के निशान देखाय पङलैक। ओ नित्य दिन चारि पएर के निशान देखि बहुत प्रसन्न होइत छल। किछु दिनुका बाद ओकरा अपन व्यापार मे बहुत घाटा भ गेलैक। स्थिति एतेक खराब भ गेलैक जे ओ रोड पर आबि गेल। ओकर सभ किछु नष्ट भ गेलैक। ओकर सभ सर संबंधी संग छोड़ि देलकै। आब भोरमे टहलवाक समय चारि पएर के स्थान पर दू पएर देखैत छलैक। ई देखि ओ बहुत आश्चर्य चकित भऽ गेल जे खराब समय मे जगत जननी सेहो हमरा संग छोङि देलीह। धीरेधीरे ओकर स्थिति ठीक होमय लगलैक। सभ ओकरा लग घुमि क आबय लगलैक। आब ओकरा बालू पर दू पएर के स्थान पर फेर सँ चारि पएर देखाय लगलैक।ओकरा सँ रहल नहि गेलैक ओ जगत जननी सँ कहिये देलक जे हे माँ जगत जननी ।हमर खराब समय में हमर सगा संबंधी संग छोड़ि देलक त हमरा ओतेक कष्ट नहिं भेल कारण दुनिया मे एहि तरहक घटना होइत छैक मुदा एहन विपत्तिक समय मे अहाँ हमर संग छोङि देलौं। एहि लेल हमरा बडु दुःख भेल। अहाँ एना कियेए केलहुँ माँ? माँ जगदम्बा जबाब देलखिन्ह जे अहाँ कोना सोचि लेलहुँ जे हम अहाँ के संग छोङि देलहुँ? अहाँक खराब समय में बालू पर जे अहाँ दू टा पएर के निशान देखैत छलहुँ ओ अहाँक पएर नहिं छल ओ हमर पएर छल। ओहि समय हम अहाँ के कोरा मे उठा क चलैत छलहुँ आ जखन अहाँकेँ खराब समय बीति गेल तखन हम अहाँ के अपन कोरा सँ नीचाँ उतारलहुँ तेँ अहाँकेँ फेर स चारिटा पएर के निशान देखाय लागल। तें कहल जाइत अछि जे सभ संग छोङि दियेऽ तखनो उपर बला पर दृढ विश्वास रखवाक चाही जे माता रानी हमरा अपन कोरामें उठा कऽ चलि रहल छैथि। माता रानी सतत हमर चिंता करैत छैथि हम हुनक कोरामे सतत सुरक्षित रहैत छी। जय माँ।