“स्वाबलंबी होयब सबहक लेल आवश्यक”

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— विद्या चौधरी।                 

मिथिला मे पहिले के अपेक्षा वर्तमान मे धिया सबहक लेल रोजगार क स्थिति बेहतर कहल जा सकैत अछि। धिया सब आब सब क्षेत्र मे अपन योगदान द रहल छथि। आब समाज मे सेहो नौकरी करय वाली महिला क लेल सोच आ नजरिया मे बदलाव आएल अछि। पहिने धिया के निक शिक्षा भेटला के बादो आत्मनिर्भर होबय स वंचित रहैत छली परन्तु आब देखल जा सकैत अछि जे धिया शिक्षा लेबय के साथ साथ शिक्षा द सेहो रहल छथी ई सब शुभ संकेत मानल जा सकैत अछि। अपन मिथिला पेंटिंग विश्व मे प्रसिद्ध अछि ताहु मे अपन धिया सब रोजगार क संभावना तलाशी रहल छथि। लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, के माध्यम स छोट-मोट रोजगार क रहल छथि परन्तु एकरा बढावा देनाई परम आवश्यक अछि जाहि स सब के पुर्ण रूपेण रोजगार भेटयन। धिया सब स्वरोजगार क क्षेत्र मे आगु आबि रहल छथि जेना सिलाई, कढाई, बुनाई, मेहन्दी, ब्यूटीशियन, कम्प्यूटर सीख सेहो रहल छथी अथवा सीखा सेहो रहल छथि। गृह उद्योग मे सेहो अपन योगदान द रहल छथि, जनेऊ बनेनाई,अचार, पापड़, कुम्हारौरी, अदौरी, तिसियौरी सब किछु ।मिथिलाक धिया गीत-संगीत कला मे सेहो प्रशिक्षण द रहल छथि। सरकारक के दिस स सेहो बहुत तरहक रोजगार क योजना बनाओल गेल अछि परन्तु मजबूत प्रयास क आवश्यकता अछि। धिया के पहिने के अपेक्षा आब रोजगार क अवसर भेटलनि अछि, परन्तु ऐखनो मैथिल धिया के देशक आन राज्य क धिया जका रोजगार उपलब्ध नाहि छनि,हिनका सब के ठोस आ कारगर रोजगार उपलब्ध करेबाक आवश्‍यकता अछि जाहि स धिया स्वावलंबी बनथी आ सुखी रहथी
जय मिथिला👏👏
जय मैथिल 👏👏