“सदिखन जुड़ायल रहू”

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— आभा झा।             

सदिखन जुरायल रहू
मिथिलाक प्रकृतिपूजक संस्कृतिक अद्भुत पाबैन अछि जूड़-शीतल। पर्यावरण के स्वच्छ राखै के दिशा में ई पाबैन काफी महत्वपूर्ण अछि।एहि दिन लोक बसिया भोजन के ग्रहण करैत छथि।ग्लोबल वार्मिंग के रोकै लेल ई परंपरा वर्षों सँ मिथिला में चलल आबि रहल अछि।जूड़शीतल के दिन माँ- बाबी – काकी सभ माथ पर जल डालि जुड़ाबैत छथिन-
आशीर्वाद दैत छथिन। एहि दिन गोसाउन घर में भगवती के आगू जौ, सतुआ, आमक टिकुला चढ़ाओल जाइत अछि।एहि दिन तुलसी चौड़ा पर दू टा बांस के सहारे घैल सेहो लटकाएल जाइत अछि।घैल में छेद करि ओहि में कुश लगा देल जाइत अछि।जेहि सँ ठोपे- ठोप तुलसी पर खसैत रहैत अछि।एहि दिन भनसा घर के आराम देल जाइत अछि।मिथिला में एकटा पुरान परंपरा अछि जे हमरा सबके एहेन करबाक प्रेरणा दैत अछि। जूड़शीतल मिथिलाक एकटा एहने लोकपर्व थिक। आजुक समय में बहुत लोक एहि पर्वक जानकारी नहिं रखैत छथि , मिथिला में सेहो ई पाबैन सिमटैत जा रहल अछि।गाम सँ बाहर रहै वाला लोक सब में सेहो ई पाबैन विलुप्त होइत देखा रहल अछि।वैज्ञानिक महत्व के कारण आइयो एहि पाबैन के वजूद कायम अछि। मूलरूप सँ ई पर्व सूचिता अर्थात साफ- सफाई सँ संबंध राखैत अछि मुदा एकर मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग सँ बचब अछि। एहि पाबैन के पहिल दिन सतुआइन आ दोसर दिन धुरखेल कहल जाइत छैक।
सतुआइन – एकर संबंध सत्तू सँ अछि। एहि दिन लोक सत्तू आ बेसन सँ बनल व्यंजन ग्रहण करैत छथि। एकर पाछू ई तर्क देल जाइत अछि जे सतुआइनक अगिला दिन चूंकि चूल्हा नहिं जरैत अछि, ताहि लेल एहि दिनक बनल भोजन लोक अगिला दिन सेहो खाइत अछि। गर्मी के समय में सत्तू आ बेसनक व्यंजन खराब हेबाक संभावना कम होइत छैक। सतुआइन दिन भोर में घरक पैघ छोट के माथ पर एक चुड़ूक पइन रखैत छथि, एकर पाछू ई कारण अछि कि गर्मी के मौसम में एना केला सँ माथ ठंढा रहैत छैक। एहि दिन गाछ में पइन देनाइ अनिवार्य होइत छैक। छोट सँ पैघ तक एक लोटा या बाल्टी में पइन भरि क ‘ गाछ सब में जरूर दैत छथि। एहि दिन गाछ में पइन देला सँ पुण्य होइत छैक।
धुरखेल- मिथिला में एहि दिनक बड्ड महत्व छैक। साल में ई एक दिन चूल्हा के कोनो प्रयोग नहिं कैल जाइत छैक। लोक एहि दिन बसिया भोजन करैत छथि आ भोर सँ ओहि स्थान के सफाई करैत छथि जाहि ठाम पइन जमा होइत छैक। जेना पोखैर, इनार,घैल ,टंकी आदि। परंपरा के अनुसार लोक सफाई के दौरान एक-दोसर के ऊपर पइन फेक दैत छथि या पोखरि, इनार सँ निकलल थाल- कादो सेहो फेक दैत छथिन। एकर सभक सफाई केला सँ पोखैर या इनार में नव जलक आगमन होइत छैक संग ही समाजक सब वर्ग आ जाति के बीच मेल – मिलाप बढ़ैत अछि। ई पाबैन होली जेकां लगैत अछि। शहरक लोक सब कूलर, फिल्टर, गैस चूल्हा के सफाई क’ एहि पाबैन के मनबैत छथि।मिथिला के कतेको शहर आ गाम में जूड़शीतल के मेला प्रसिद्ध अछि। एहि पाबैन के बचेबाक जरूरत अछि , एकरा पसारबाक जरूरत अछि। ई समाज कए धर्म आ जातिक बंधन सँ मुक्त करैत अछि। ग्लोबल वार्मिंग सँ बचबाक अछि त ‘ मनाउ जूड़शीतल।
जय मिथिला जय मैथिली।
आभा झा ( गाजियाबाद )