“बालविवाह”

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— रेखा झा।           

मनमोहन बाबू के सुंदर सन गृहस्थी छल। सुंदरी कनियां ताहि पर दू टा परी सन बेटी। अपने ओ सेहो नीक सरकारी विभाग में पदस्थापित छलाह।
समय के चक्र पर जेना वश नहि ककरो हुनको नहिं चलल। एक दिन रोड एक्सीडेंट में ओ चलि गेलाह दुनिया स। कनियां पर विपत्ति के पहाड़ परल,,, एकटा बच्ची लगभग आठ आ दोसर छ:सालक। खैर,,,, सब काज संपन्न भेलाक बाद ऑफिस के लोक सब के मदद स हुनक पत्नी के अनुकंपा पर नौकरी वाला फाईल सेहो बढल।
किछु दिन बाद एकटा घटना भेल,,, एकटा और फाईल बढल अनुकंपा वाला नौकरी के जे की हुनक पहिल पत्नी के तरफ स छल। पूरा विभाग हतप्रभ आ बाहरी समाज अचंभित। कियाक त केयो सोचनेहु नहि छल जे ओ दू शादी कयने छथि आ जिनका सब जानि रहल ओ दोसर पत्नी छथिन्ह। मामला के छानबीन भेल आ इ बात सत्य निकलल। असल में बालविवाह के कारण ओ सहमत नहि भेला पहिलुका विवाह स आ पहिल पत्नी के मानसिक रूप स अपाहिज बता नैहर में छोरि बाद मे दोसर विवाह कयलाह।मृत्यु के खबर सुनि हुनक नैहर के लोक सब हिनका आगु कयलनि।
आब पूरा दृश्य बदलि गेल,, कियाक त नौकरी पहिलुका के भेटतनि चाहे जे हो,,, मान्यता सरकारी तौर पर हुनक पक्ष में छल जाधरि ओ अपने स ककरो नांमाकित नहि क देथिन्ह।
कनि दिन बहुत सबके विचलित कयलक मुदा कैल की जा सकैया। दोसर पत्नी के चतुर्थ वर्ग पर नौकरी भेटल आ बच्ची के पूरा भरण पोषण के हिस्सा।
चाहे दुनिया स अहां कतबो छिपा नुका काज करब आ सत्य स भागैत रहब ऊपरवाला सबटा हिसाब रखने रहै छथि आ समय ऐला पर चुकता करै छथि। 🙏🏻🙏🏻🌷रेखा झा