“परिणयोत्सव और घटकक बीच संबंध अटूट अछि आ आटूट रहत”

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— उग्रनाथ झा।                         

मिथिला में आदिकाल सँ धर्म-कर्म आ शास्त्रिय विधानक प्रमुखता रहल अछि । चाहे ओ मंगल घड़ी हो वा अमंगल घड़ी मुदा हमरा लोकनि (मैथिल) चाहे कोनो जाती , वर्ग , उपवर्ग सं होए मुदा शास्त्रोक्त विधि सं बताओल गेल कार्य संपादित करबा मे यथा साध्य सदति अग्रणी रहलहुं अछि । हां एहि कार्य संपादन में हमरा सब जे यथासाध्य क्षमता अनुरुप स्वयं तैयार रहै छि । ओहि कार्यक संपादन हेतु योग्य एवं दक्ष मार्गदर्शक आवश्यकता होईछ जे आपन कार्यानुभव आ योग्यता सं संपूर्ण कार्य के संपादन करा सके । जे कार्य करौनिहार , कार्य केनिहार आ कार्य हेतु साधनक बीच समन्वय स्थापित क आभिष्ट प्रतिफलक माध्यम हो । समाज में सदति एहन व्यक्ति के उपस्थिति रहल अछि आ कार्यक प्रकृतिक अनुरूप भिन्न भिन्न नाम सँ जानल जाईछ ।
ठिक ओहिना जेना मिथिला में पाणिग्रहण संस्कार (विवाह) हेतु जे एहि तरहक आपन कर्तव्यक निर्वहन करैत छैथ हुनका घटक अथवा अगुआ कहल जाईत छन्हि। कमोवेश ई मिथिले नहि पुरा हिन्दुस्तान में विद्यमान अछि ।
कहैत चली जे मिथिला में आदिकाल सं घटकक स्थान बहुत सम्मानित आ पूजनीय रहल अछि । एहि पावन परिणयोत्सवक आयोजन हेतु कन्याक अनुकूल सुयोग्य वर केँ मिलान हेतु विद्वान योग्य व्यक्ती यथा पंडीत पुरोहित के देल जाएत छल किएक त संचार आ लोक संपर्क में हुनका सबहक पहुंच दूर दूर तक गाम घर में आ निक कुलशीलक परिवार मे रहै छलन्हि । जिनका योग्य वर अथवा कन्याक जानकारी रहैत छल । समाज में सम्मानित होएबाक कारणे हुनक प्रस्ताव पर उभयपक्षक मतभिन्नताक संभावना नगण्य रहैत छल । दुनू पक्षक तारतम्य स्थापित क वैवाहिक प्रस्ताव निश्चित करै छलाह । तत्पश्चात पंजिकार सं परामर्श करा विवाह पंजीकृत क पाणिग्रहण कराबैथि छलाह । शुरुआत सं संपादन धरि निश्वार्थ सक्रिय योगदान करैत छलाह । एहि कार्य के ओ कोनो धार्मिक अनुष्ठान सं कमतर नहि आँकैत छलाह । वैवाहिक संबंध निश्चित करबा में घटकक स्थान महत्वपूर्ण रहैत अछि । दूनू पक्षक बीचक एहन कड़ी जे दू अज्ञात परिवारक बीच आत्मियताक जोड़ होथि ।
जेना जेना समाजिक स्तर बदलैत गेल घटकक स्तर परिवर्तीत होईत गेल । आब त वास्तविक आ आभासी दूनू तरहक घटक हमरा सबहक बीच उपलब्ध छैथ । मैरेज ब्युरो आभासी घटकक शानदार उदाहरण पेश क रहल अछि ।
आई के शैक्षणिक बौद्धिक आर्थिक विकासवादी समाज भले चांद पर चलि गेल हो मुदा वैवाहिक परंपराक ई महत्वपूर्ण कड़ी एखनहुं कोनो ने कोनो रूप में विद्यमान अछि । चाहे आधुनिकता वादी समाज हो वा परंपरावादी समाज । विवाहक कोनो भी स्वरूप हो कोनो ने कोनो रूप में घटक विद्यमान रहैत अछि । आधुनिक समय में युवा युवती के लव मैरेज पैरवी देखल जा रहल अछि एहुं में घटकक सुक्ष्मे भुमिका मुदा रहैत जरूर अछि ।जेना लड़का लड़का के बीच शुरुआती मेलजोलक क्रम में एक दोसरा के हिम्मत बढ़ेनिहार संगी बहिनपा से एक परकारक घटकक रूप मानल जा सकैछ । किएक त दूनू व्यक्ति के नजदीक आनबाक तारतम्य बैसेबाक जिम्मेदारी हुनके पर रहै छै । कोर्ट में विवाह के क्रम में गवाह स्वरूप पक्षकार से हो घटके स्वरूप अछि । जेना जेना हमरा लोकनि आपन मान सम्मान परंपरा के आधुनिकता के चद्दैर ओढ़बैत गेलहुँ ओहिना ओहिना घटक स्वरूप मलीन होईत गेल । मुदा विद्यमान अछि ।
वा एना कहि की परिणयोत्सव और घटकक बीच संबंध अटूट अछि आ आटूट रहत ।।