“जँ किछु बजता नारद बाभन, दाढ़ी धय देब घिसियाइ…”

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— कृति नारायण झा।               

महाकवि विद्यापति केर प्रसिद्ध नचारी “धोती, लोटा, पोथी, पतरा सेहो सब लेलनि छिनाय। जँ किछु बजता नारद बाभन, दाढी धय लेब घिसियाय।।” अढरन ढरन भोलेनाथ आ माता पार्वती के बिवाह में घटक बनल देवर्षि नारद के कुचेष्टा में लिखल गेल हिमालय राज के परिवार द्वारा ई रौद्र आ कटु शब्द एहि बात केर परिचायक अछि जे घटक के स्थिति की रहैत छैक जखन कि परिस्थिति पूर्णतया भिन्न रहैक कारण महादेव के अपन पति के रूप में प्राप्त करवाक हेतु पार्वती सहस्त्रो वर्ष धरि कठिन तपस्या कयने छलीह आ पार्वती के कठिन तपस्या देखि देवर्षि नारद अपना के घटक के रूप में कैलाश में उपस्थित कयने छलाह। ओना कहल जाइत छैक जे कन्यादान सन पुनीत काज में सहयोगी बनब अत्यन्त पुण्य केर काज होइत छैक। घटक केर मूल अर्थ होइत अछि प्रतिभागी। कन्या अथवा बर पक्ष के समस्त जानकारी एकत्रित कएनाइ आ ओकरा दुनू पक्ष के समक्ष प्रस्तुत कएनाइ, यएह मुख्य काज घटक के रहैत छैन्ह। नीक लोक के नीक लोक सँ सम्बन्ध स्थापित करवा में घटक केर मुख्य भूमिका होइत छैक। ओना मुख्य रूप सँ घटक के सुनऽ बहुत पङैत छैक खास कऽ कऽ मिथिला में, कारण जँ बर दुब्बर छैथि तऽ सभ स्त्रीगण सभ कहय लगैत छथिन्ह जे घटक केहन आन्हर छलखिन्ह जे देखलखिन्ह नहिं जे बर के अप्पन माय दूध नहिं पियाओने छैक आ एकर बिपरीत जँ मोट बर छैथि तऽ स्त्रीगण सभक भाषा बदलि जाइत छैन्ह जे गे माए बर के ततेक टा के पेट छैक जे सभटा अपने खा लेतै, कनियाँ के की खुआओतै? अर्थात् घटक के सभ परिस्थिति में सुनवाक छैन्ह। ओना जँ मनुष्य, मनुष्य के काज नहिं आबय तऽ मनुखक जीवन ब्यर्थ मानल जाइत छैक तेँ घटक लोकनि एक दोसर सम्बन्ध जोङवाक हेतु घटकैती करैत छैथि। किछु अपवाद के छोड़ि घटकैती पूर्णतया निःश्वार्थ भावना सँ कयल जाइत छैक आ संगहि घटकैती मुख्यतया प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष कोनो सम्बन्ध भेलाक उपरान्ते कयल जाइत अछि। ओना मिथिला में बभनलत्ती प्रसिद्ध अछि। मिथिला मे एक दोसर सँ कोनो ने कोनो रूपमे सम्बन्ध निकलिए जाइत छैक अथवा मिथिलाक लोक सम्बन्ध निकालि लैत छैथि। संक्षेप रूप में कहल जा सकैछ जे घटकैती केर काज मिथिला में अत्यंत कठिन आ जिम्मेदारी सँ भरल होइत अछि, कन्या पक्ष आ बर पक्ष के समस्त आशा आ विश्वास के अपन माथ पर लादि कऽ चलय बला घटक एकटा पूण्य काज मानि आदि काल सँ करैत आबि रहल छैथि आ ई काज निर्वाध रूप सँ चलैत रहत। एकटा घटक के आत्मा में सुख केर आभास ओहि दिन होइत छैन्ह जाहि दिन एकटा कन्या आ बर के समान आ यथोचित सम्बन्ध स्थापित होइत छैन्ह । जय मिथिला आ जय मैथिली 🙏 🙏 🙏