“भ्रुण हत्या महापाप अछि”

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– कामिनी मिश्रा।                   

हमहु अहा कऽ अंश छि माँ ,
नै मारू हमरा कोखिए मऽ ,
अई धरती पर आबै कऽ
हमरो अछि अधिकार माँ ।।

बेटा- बेटी मऽ फर्क किये,
जे हमरा नै आनब आहा,
आहाक घरकऽ कली छि हम,
नयी तोरू हमरा कोखिए मऽ ।

कि आहा कऽ हमरा सऽ प्रेम नइ,
जे हमरा आहा बेटी मानब,
बेटा बैन अइ दुनियाँ मऽ,
हम आहा कऽ नाम रोशन करब।।

एक मौका दऽ कऽ देखु माँ,
हम अपन फर्ज पुरा करब,
हम अहि कऽ बेटी छि माँ,
हम अपन नाम रोशन करब ।।

बेटी बैन हम अहि जग मऽ माँ
आहा कऽ हम सम्मान बढायब,
अई धरती पर आबै कऽ
हमरो अछि अधिकार माँ ।।