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“आधुनिक शिक्षा”

321 भ्यूज

वंदना चौधरी।                     

आधुनिक शिक्षा:
पूनम आय इंटरमीडिएट में प्रथम श्रेणी स उतीर्ण भेली घर में खुशी के माहौल छल।आब स्नातक में नाम लिखेबा के लेल कॉलेज के सेहो चयन माता पिता संग पूनम क लेलनि।पूनम जेहने देखै में अति सुंदरी छेली तेहने पढ़ाई में अव्वल बच्चे से छेली।हुनकर सुंदरता और विद्वता के चर्चा घर स बाहर दूर दूर तक हुए लागल।
पूनम के सहपाठी मोहन सेहो पढ़ाई में अव्वल छेलाहा संगे पूनम के पसंद सेहो मोने मोन करैत छेलखिन।हुनकर पिता के जखन मालूम भेलैन त ओ बिना देरी केने पूनम के घर हुनकर माता पिता स मोहन और पूनम के विवाह के बारे में बात करैले पहुंच गेलखिन।
दुनु पक्ष बहुत खुशी खुशी ऐ प्रस्ताव के स्वीकार क ललाइन।मोहन के पिता आब कखनो क बाजार जेबा के क्रम में पूनम हाथ के चाय पिबै लेल हुनकर घर पहुंच जेथ।
क्रमशः कतेको बेर ओ पूनम के घर गेला चाये पिबै के लाथे किये त हुनका एकटा बात बहुत खटके छलैन्ह ।जे जखनो ओ हुनका ओतए जाय छेलाहा हुनकर माँ चाय बना के,नाश्ता बना क आनैथ और पूनम कखनो मोबाईल, कखनो टेलिविजन, और कखनो लैपटॉप पर अपना धुन में रहैत छेली।
एत तक जे अपन होय बला ससुर के उइठ के प्रणाम तक करै के सूईध हुनका नही रहैत छलैन्ह।
एक दिन मोहन के पिता के नहि रहल गेलैन और ओ पूनम के माय के बहुत अफसोस के साथ कहलखिन,पूनम एखन हमर पुतहु बने योग्य नै भेल छैथ ।हुनका कनि घर के व्यवहार और संस्कार सेहो दियोंन।जहिया ओ व्यवहार और संस्कार स अवगत भ जेती हम स्वयं हुनका अपन पुतहु के रूप में अपन घर ल जेबनि।पूनम के माय के पैर तर स जमीन जेना घसैक गेलैन ओ अचेत भ भूमि पर खैस परली।
आखिर ई दोष कथी के छियै ? आधुनिक शिक्षा प्रणाली के या टूटैत परिवार के,या बाल बच्चा के अत्यधिक छूट के?
अहूँ सब अपन विचार दियौ महामारी जेका पसरैत अहि समस्या पर।

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