“वटसावित्री व्रत कथा”

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आभा झा।                           

# वटसावित्री #
मिथिलांचल में वटसावित्री पूजा के विशेष महत्व अछि।अखंड सौभाग्यवती के प्राप्ति लेल ई व्रत ज्येष्ठ मास के अमावस्या क होइत छैक।बड़क गाछ में ब्रह्मा,विष्णु,महेश तीनु के वास छैन।ओहि वटवृक्ष के नीचा सावित्री अपन मृत पति के पुनः जीवित केने रहैथ ।
मिथिला में वटसावित्री के ई कथा सुनने छी से हम लिख रहल छी।एकटा ब्राह्मण छलाह।हुनकर पत्नी भानस करै काल माॅड़ पसा कऽ चिनबार लग एकटा बीहरि रहनि ताहि में फेक दै छलखिन।ओहि बीहरि में एकटा नाग-नागिनक निवास छल।हुनका सब के अण्डा-बच्चा होइन से गरम मांड़ पड़ला सं नष्ट भऽ जाइन।
एक दिन नाग-नागिन विचारलेन जे जहिना ई ब्राह्मणी हमरा सबके निःसंतान क देलक हिनको क देबेनि।ई विचारि दुनु बाटक कात बड़क गाछक एकटा धोधरि में वास लेलनि।ब्राह्मण के सात टा बेटा छलेन।पैघ भेला पर ओ जेठ बालक के विवाह केलेन।विवाहक बाद ओ बालक सासुर सं गाम घुरै छल।जेठक विकराल रौद्र ओ ओहि बड़क गाछ तर सुश्ताय लगला जकर धोधरि में नाग-नागिन के वास छल।बसात बहै छल।बालक आलस सं सूति रहला।नागिन सबटा धोधरि सं देखैत छली।ओ नाग के इशारा केलखिन।नाग नीचा उतरि बालक के डसि लेलक।किछ क्षण में बालक मरि गेला।
कालक्रम में पांच बालक सभक विवाह होइत गेलनि।आ सब विवाह क घुरैत काल ओहि बड़क गाछ तर सुश्तावै आ नाग हुनका डसि लेल करैन।
आब ब्राह्मण अपन सातम बेटाक विवाह नहिं करबाक निश्चय लेला।एक दिन ब्राह्मणक छोट बालक कतहु सं आबि रहल छला।ओ पैरक जुत्ता हाथ में लेने आ कन्हा पर छत्ता लटकेने चलि अबै छला।चलैत-चलैत ओ एकटा धार लग पहुंचला।धार में प्रवेश करै काल ओ हाथक जुत्ता पैर में पहिरि लेलेन आ धार पार केला के बाद फेर ओकरा हाथ में ल लेलनि।जखन ओ आगु बढ़ला त एकटा बड़क गाछ देखला।ओहि गाछ तर ओ सुस्ताय लेल रूकला मुदा गाछ तर जाइत देरी छत्ता तानि लेला।हुनकर कृत्य देखि ओहि ठाम जे धियापुता सब खेलाइ छल हंसै लागल।
धियापुता के हंसैत देखि ओहि ठाम बैसल सामा धोबिनक बेटी बाजली- तों सब हंसै कियैक छैं।ई ब्राह्मण त महान पंडित बुझना जाइत छैथ।धोबिनक बेटी के गप्प सुनि बालक बुझि गेला कि ई साधारण कन्या नहि थिक।ई हमर मोनक बात बुझि गेल अवश्ये ई कन्या परम विदुषी अछि।
ब्राह्मण बालक घर ऐला आर पिताजी सं कहलखिन हम धोबिन के बेटी सं विवाह करब।जातिक कारण पिता मना क देलखिन।मुदा बालक अड़ल रहला ओ धोबिनक बेटी सं विवाह क लेलनि।परिचय भेला पर बालक अपन छवो जेठ भाई के असमय मृत्युक कथा धोबिन सं कहि देलखिन।
संयोग सं ब्राह्मण बालक अपन कनियाक दुरागमन करा जखन गाम विदा भेला ओहि दिन जेठक अमावस्या छलै।जाहि बड़क गाछ धोधरि में नाग-नागिन रहैत छली धोबिन देखलखिन जे गामक स्त्रीगण सब बड़क गाछ तर जल ढारि पूजा क रहल छैथ आ पीयर ताग बान्हैत बड़क परिक्रमा क रहल छथि।धोबिनक बेटी देखि ओहो पूजा करै लगली।
धोबिनक बेटी एम्हर पूजा करै बैसली ओम्हर नागिनक इशारा पाबि नाग अन्तिम बालक के डंसबाक हेतु चलल।सोमा जखने नाग के अपन वर दिस बढ़ैत देखलि चट द पकड़ि क ढाकन सं झांपि देली आ जांघ तर दबा लेलेन।ई देखि नागिन सोमा लग आबि बाजली- हमर वर दिय।सोमा लगले उत्तर देलखिन- हमर वर दिय।दुनु में पहिने वर कि पहिने मर लेल घोंघाउज होइत रहल मुदा सोमा नागिनक वर पहिने नहिं देली।अन्त में नागिन के ब्राह्मणक छवो बेटा घुराब पड़लेन।नागिन के वर भेटि गेलै ओ धोधरि में समा गेल ।एम्हर ब्राह्मण बालक अपन छवो भाई आ कनियाक संग घुरला।धोबिनक बेटी के चतुराइ सं अपन छवो दियादनीक सोहाग घुमा लेलक।
आभा झा (गाजियाबाद)