“गामक दलान”

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“साहित्य”।

– ममता झा

#गामकदलान
एखनो मौन परैत अई ओ गोष्टी। ऑगन स कपक कप चाह आ पान पठाबैत पठाबैत भोर स साझ भ जैत छल। बुढ बुजुर्ग के लेल दलान राजनीति स लक विवाह संस्कार के बात कर के स्थान। बच्चा सबके दलाने पर पढ़ाई के व्यवस्था। दलाने पर पाहुन परक रह के व्यवस्था में कुर्सी आ चौकी लागल रहैत छल। सब ओतहिए जाड़ में आगिक घूर तापैत घंटो बातचीत। कखनो ताशबाजी खेलैत खुली क ठहाका स वातावरण खिल जैत रहै।आब त दलानक परिभासे बदली गेल। बहुत जगह त दलानक मतलबो बिसइर गेल। आब ने ओ नगरी ने ओ ठाम ।सीधे गोस्ट रूम में बइस के व्यवस्था सब लेल। बुढ बुजुर्ग के कोनो स्थान नई जत ओ खुली क हॅसैत। आब त सेहनता लागइ या ई सब देख के लेल।