“गामक दलान”

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“साहित्य”

– नीलम झा।                     

,,गामक दलान,,
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़ं़़़़़ंं
गामक दलान के वर्णन अनमोल छै।
गामक दलान पहिने एगो रंगमंच सं कम नै छल जात हम सब बचपन म एक पर एक कारनामा देखेने छलौ।
पहिले जहिना लोक सब गाम म रहैछला तहिना गामक दलान भरल पुरल शोभा बढाबैत छल ।
एक पर एक पढल लिखल बुजुर्ग सब दलान पर भरल रहेछला।
सब टौफिक पर चर्चा होय छल बाल बच्चा के पढ़ाई-लिखाई स लक नोकरी चाकरि जन्म मरण सब होय छल।दालान पर कतेक सादि व्याह बात होय छल और बहुत वर कन्या के जुरबन्धन से हो होय छल।
हमर गामक दलान जखन भोर होय छल हम इन्तजार करै छलौ बचचा म अपन नाना सब क आवैका ।कियैक त हमर नाना अपन दोस्त सब क सामने हमरा अवसर दै छलैईथ जे हम पढैत छलौ अंग्रेजी हिन्दी म कविता से सब हुनका सब क सुनबियैन और ओ सब वाह वाह करै छलाईथ हमर नाना जी के सिर और गौरव सं ऊंचा भ जाय छलैन हमहु बहुत खुश होय छलौ अपन बराई सुनी के।
हम दुनु भाय बहिन छलौ कखनो हम पुछियैन तो हमर छोट भाय जवाव लै छला ओ पुछैथ त हम जवाब दै छलियैन एहिना डुवेट चलै छल और हमर नाना जी के बहुत आनन्द आवै छलैन जखन हुनकर दोस्त हमरा सबहक परसंसा करै छलाईथ।
गामक दलान एक दोसर सं मिलैक जरिया छल।
लेकिन आब लगभग खत्म भ रहल ऐछ।
पहिले पुरुष सब हरदम दलाने पर रहै छलाईथ ।
दलान पर सादि व्याह नोत पिहान सब होय छल ।
हम इन्तजार करैत रहै छलौ कखन नाना चाय लक बजेता और हम दलान पर जैब अपन गीत नाद सूनबै लेल।
त हमरा स्मरण म गामक दलान एगो पाठशाला छल जता पैघ बुजुर्ग सब नीक नींक बात सिखबै छलैथ।
जता खुब अपनापन छलै।एक दोसर के मुहे नीक नीक जानकारी भेटै छल दलान पर स। त हमर दालान पर साधु संत सब से हो अबैए छला ठहरै लेल और हमर नाना जी हुनकर खुब सत्कार करै छलाईथ। हमरा दलान पर हरदम भीर रहैछल कियो नाना जी सं सलाह मसबरा लै लेल आबै छला कियो कोनो काज लेल आबै छला ई छल हमर दलान और हम सी .आई .डी .के काज करै छलौ।