मैथिलक संस्था मे प्रदूषण केर कारण आ समाधान पर हैदराबाद मे विमर्श

हैदराबाद, ५ मार्च २०१९ । मैथिली जिन्दाबाद!!
 
मिथिला क्षेत्रक अनेकों समस्या पर विमर्श हेतु मिथिला मंथन (हैदराबाद) द्वारा ‘मैथिलक संस्था मे प्रदूषण’ विषयक सेमिनार केर आयोजन सोमाजीगुड़ा स्थित पीसीआरआई केर कार्यालय मे कयल गेल। सेमिनार मे नगरद्वय मे कार्यरत मिथिला सांस्कृतिक परिषद् एवं मिथिला सामाजिक मंच केर पदाधिकारी लोकनि भाग लेलनि। एतय जारी कयल गेल प्रेस वक्तव्य मे उक्ताशयक जानकारी देल गेल अछि।
 
विदित हो जे वर्ष १८१६ ई. मे तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा नेपालक शाही सरकार केर प्रतिनिधि संग समझौता करैत मिथिलाक्षेत्रक किछु भूभाग नेपाल केँ दय देल गेल छल, परिणामस्वरूप मिथिलाक्षेत्र दुइ देश मे बँटि गेल देखाइछ। एहि परिप्रेक्ष्य मे मिथिला मंथनक संस्थापक एवं मैथिली-मिथिलाक प्रखर अभियानी श्री बी. के. कर्णा केर अध्यक्षता मे उपरोक्त विचार गोष्ठीक आयोजन कयल गेल। मिथिलाक ऐक्यता केँ एहि तरहें दुइ राष्ट्रक बीच विभाजन हेतु ४ मार्च अर्थात् सुगौली सन्धि पर हस्ताक्षरक दिवस केँ हरेक वर्ष हुनक अगुवाई मे एहि दिवस पर कोनो न कोनो तरहक सांकेतिक असन्तोष प्रकट कयल जाइत रहल अछि।
 
कार्यक्रम सामूहिक दीप्ति प्रज्वलनक संग करैत श्री बी. के. कर्णा द्वारा पावर प्वाइन्ट प्रेजेन्टेशनक माध्यम सँ संस्थाक क्रियाकलापक संग विगत मे कयल गेल विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक व्योरा देल गेल। तत्पश्चात विभिन्न मैथिल संस्था केर प्रकृति आ व्यवहार मे अनेकों कमजोरी आ दोषपूर्ण कार्यशैली पर प्रकाश दैत सेमिनारक मूल विषय पर बीज भाषण ओ रखलन्हि। ओ कहलनि जे प्रदूषण केर मुख्य कारण स्पष्ट लक्ष्य केर अभाव, समर्पण केर कमी, पारदर्शिताक अभाव, अकुशल कार्यशैली, कार्यकर्ता मे अविश्वास, व्यक्तिगत आकांक्षा केर पूर्ति नहि भेनाय, अहम केर टकराव तथा अन्य शामिल अछि।
 
कलम दवात केर अध्यक्ष ज्योति प्रकाश लाल द्वारा संस्था सभ मे योग्य व्यक्ति केर उपेक्षा केँ संस्थागत प्रदूषण केर प्रमुख कारण बताओल गेल। मिथिला सामाजिक मंच केर मुखपत्र ‘नव जागृति’ केर संपादक रंजन कुमार झा अपन विचार रखैत कहलनि जे मिथिलाक विभिन्न प्राचीन धरोहर केर संरक्षण आवश्यक अछि। विश्वनाथ झा अपन संबोधन मे सब संस्थाक प्रगति लेल कामना कयलनि। भवकांता झा एकताक महत्व पर प्रकाश देलनि आर सभ संस्था मे आपसी समन्वय स्थापित करबाक बात पर जोर देलनि। विनय कुमार झा अपन संबोधन मे व्यक्तिगत महात्वाकांक्षा केँ संस्थागत प्रदूषण केर सर्वाधिक प्रभावी कारण बतबैत लोक सभ सँ निवेदन कयलनि जे संस्था केँ अपन महात्वाकांक्षाक पूर्ति लेल सीढी जेकाँ प्रयोग नहि कय मूल उद्देश्य लेल सामूहिक प्रयास मे अपन सर्वोत्तम योगदान देल जाउ। सभ सँ अनुरोध करैत ओ कहलनि जे मिथिलाक इतिहास पढू आर अपन अतीत तथा वर्तमान केर बीच आयल परिवर्तन पर चिन्तन करू। ओ एक गोट पुस्तकालयक स्थापनाक प्रस्ताव राखैत अपना दिश सँ पाँच हजार पुस्तक केर व्यवस्था करबाक आश्वासन देलनि।
 
मिथिला सामाजिक मंच केर अध्यक्ष राम विनोद झा संस्थाक पृष्ठभूमि सहित वर्तमान क्रियाकलापक जानकारी साझा कयलनि। ओ कहलनि जे संस्था मे उच्च पद पर बैसल व्यक्ति केँ अहंकार केर नहि बल्कि सामंजस्य केर भाषा एवं व्यवहार केर पालन करबाक चाही। मिथिला सांस्कृतिक परिषद केर अध्यक्ष संयोग ठाकुर अपन संबोधन मे कहलनि जे विभिन्न उद्देश्य सँ बनायल गेल संस्था अंततः अपन मूल सँ हँटिकय अनावश्यक परोक्ष कुचर्चा आ एक-दोसरक निन्दा आदि मे लागि जाइत अछि जाहि सँ संस्था सभ मे प्रदूषण बढैत अछि आर आपसी एकताक बदला अनावश्यक तनाव आ द्वंद्व केर स्थिति बनि जाइत अछि। अन्त मे सभाक अध्यक्षता कयनिहार श्री बी. के. कर्णा द्वारा सब संस्था केँ एक बनबाक आ मिलिजुलि काज करबाक अनुरोध कयलनि।