मैथिलीभाषीक दरिद्रता कोना दूर होयतः चिन्तन
अपन पिछड़ापणपर चिन्तन-मनन जरुरीः मैथिलीभाषीक दरिद्रता कोना दूर होयत पैछला सप्ताह धीरेन्द्र भाइजी विराटनगर छलाह त एकटा बड रोचक प्रसंगपर बात होएत समय कहलखिन – मिथिलाक माटि-पानि-आवोहवा तेहेन अनुकूलित छैक जे चिड़ै-चुनमुनी सेहो कोनो फर खाकय कतहु चटक कय दैछ त ओहु सँ सुरेबगर गाछ सब जनैम जाएत छैक। एक दिस सृजनकर्मीक बाढि त … मैथिलीभाषीक दरिद्रता कोना दूर होयतः चिन्तन








