मिथिला समाज मे लैंगिक विभेदक निन्दनीय अवस्थाः कि एखनहुँ बदलि सकल अछि समाज?
विचार – श्वेता चौधरी अपन समाज मे लोक सब केँ बजैत-कहैत देखल जाइत अछि – “बेटी बोझ होई छै”, “बेटी पराया धन होई छै”, “हे जल्दी बियाह क लियऽ, बेटी के बोझ हटाउ, बेटी जातेक जल्दी अपन घर चलि जाय ओतबे नीक” – एतय सवाल उठैत छैक जे एतेक दिन तक बेटी दोसर घर में … मिथिला समाज मे लैंगिक विभेदक निन्दनीय अवस्थाः कि एखनहुँ बदलि सकल अछि समाज?









