भगवती केँ साँझ आइयो देखबैत छियनि मुदा ओ पहिलुका आनन्द कहाँ
संस्मरण – सविता झा आइ दुर्गापूजा देखय जा रहल छलहुँ त मेला देखकय अपन बाबूजीक याद आबि गेल। बात ओहि समयक अछि जखन हम बड़ छोट रही। साँझ में बाबूजी आबैथ त हम सब तैयार भ क बैसल रहैत छलहुँ जे मेला घुमअ जायब। ओही ठाम अन्तिम चारि दिन धूमधाम स पूजा होइत छलैक। दुर्गापूजा … भगवती केँ साँझ आइयो देखबैत छियनि मुदा ओ पहिलुका आनन्द कहाँ









