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संतुलित उपयोग कएला पर रील सँ लाभ उठौल जा सकैए

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ऐलेख विचार
प्रेषित: अंजू झा आर्या
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :-  रील_लाभदायक_या_हानिकारक

सोशल मिडिया पर रील बनाएब आजुक डिजिटल दुनिया मे एकटा क्रांति आनि देने अछि ।इहो कहि सकै’ छीयै जे लोकक जीवन वा मन-मस्तिष्क के बाढ़ि-पानि जेना बहौने जा रहल।जकर कोनो थोर-थाम नहिये के बराबरि देखबा मे आबि रहल।

सकारात्मक उर्जाक सदुपयोग करै’त जे रील बनि रहल अछि ओ अर्थ आ आत्म-अभिव्यक्तिक नीक श्रोत बनि रहल अछि।।,एहि लेल धैर्य ओ संतुष्टि है’ब आवश्यक। सही दिशा-निर्देशन मे बनल रील सार्थक आ उपयोगी होइ’ए।

बहुतो गोटे एहेन छथि जिनकर प्रतिभा-हुनर नुकाएल सन रहैन ओ रीलक माध्यम सँ उजागर भेल।प्रसिद्धिक संग-संग अर्थोपार्जनक आधार सेहो बनि गेल।आनो लोक सभ देखलक-चिन्हलक आ ओ गुण- हुनर के सीखलक।तहिना नृत्य-गायन हो वा कोनो स्वास्थ्य संबंधित रील ,डिजिटलक दुनिया मे क्रांति आनि देलक।अपन प्रतिभा के बाहर आनबाक इ मुख्य श्रोत बनल जा रहल अछि।

हं,कनी एम्हर-ओम्हर भेला सँ परिणाम हानिकारके भ’ जाइए। कनी काल इ मनोरंजक रील तत्काल त’ आकर्षित ओ नीक लगै’ए मुदा लगातार स्क्रीनक संपर्क मे रहला सँ अस्थिरे-अस्थिरे शारिरिक आ मानसिक रुपें लोथ बना दै’ए।

युवावर्ग खास क’ के किशोर वर्ग मे एकाग्रताक कमी,मानसिक तनावक संग नींद कमी सेहो देखबा मे अबै’ए।
चलै’त कार,मोटरसाइकिल, ट्रेन हो वा झील-समुदरक लहरि मे स्टंट करै’त रील बनेनाइ कतेको के जीवन भरिक दुख द’ दै’ए। आभासी दुनिया अभ्यस्त लोक सभ मे समाजिक, सांस्कृतिक ओ नैतिक मूल्यक ह्रास भेल जा रहल। समाज परिवार सँ कटैत ओकरा मे भावनात्मक संबंधक कमी देखबा मे अबै’ए।

कोनहु रील खराब नहि होइ’ए मुदा ओकर उपयोग कोना -केहेन रुप मे भ रहल, इ बुझब -गुनब महत्वपूर्ण अछि।पैघ होइ’त धिया-पुताक भाव-भंगिमा ओ गतिविधि पर अभिभावक के ध्यान देब आवश्यक अछि।
अंत मे एतबा जे रील बनाएब जतबा लाभदायक अछि ओतबे हानिकारक सेहो।एकर संतुलित उपयोग, आत्मनियंत्रण ओ जागरुकता सं आभासी जीवन आ वास्तविक जीवनक बीच संतुलन बनल रहि सकै’ए, संगहि आगूक भविष्य नीक भ’ सकै’ए। एकटा सीमा मे रहि रील बनाएब मनोरंजन आ आथिर्क विकासक उत्तम श्रोत भ’ सकै’ए।
जय मिथिला जय मैथिली।

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