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जीवनमे सुविधा जुटैबाक संग अपनापन विशेष खगता

307 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: पीतांबरी देवी
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- संयुक्त परिवार आ असगरक जीवन।

राधा केर विवाह तऽ ठिके ठाक घरमे भेल छलनि। ससुर कमाइत रहथिन ,दस बिघा जमिनो छनि । घरो दुआरि जे एकटा भलमानुस के रहैत छैक से खपरा बला सैह छलनि ।सासु ससुर दियर ननदि भरल पूरल परिवार छलै। लेकिन एकटा रहनि जे पति नै कमाइत रहथिन ताहि से ई बूझवा मे राधा के आबि गेलनि जे हम कतौ दील्ली कलकत्ता नै जा पैब । अहिए परिवार संग रहय परत। आर ओ सासु संगे घर गृहस्थी के काज मे लागि गेलथि।जेना जेना सासु कहथिन ओ करय लगली। परिवार मे रमि गेली।पति नहि कमेथिन तेकर कोनो बेसि गम नहि होनि । सासु ससुर सबटा भार उठौने  छलखिन।सब काज भय जानि ते पति संग घुमिओ फिरी आबथि। सिनेमा देख आबथि , नैहर सासुर के सर सम्बन्धिक ओतए बूलि आबथि। आर फेर घर मे आबि कऽ  खूब काज करथि । समय बितल गेल बाल बच्चा भेलनि ओहो सब स्कूल जाय लगलनि परिवार पैघ रहलाक कारण घरमे हरदम अभाव रहैत छलैक।एकटा कमेनहार आर दस टा खेनहार ।सब के पढ़ाई लिखाई स्कूल कालेज के फिस भरनाई । राधा के पति कमाई खटाई के ते बाते नहि आरो दोस महिम के बजा बजा के घरक  खर्च बढ़ा देथिन। आब राधा कें चिन्ता हुअ लगलनि जे सासु ससुर केर भरोसे कोना जिनगी कटती । ससुर सेवा निवृत भय गेलखिन।तखनि ओ पढ़य लगली आर मैट्रिक के परिक्षा देलनि आर पास कय भेली । हौसला बढलनि तखनि ओ टीचर ट्रेनिंग कालेजमे नाम सेहो लिखा लेलनि आर दू साल घर के सबटा काज करैत  पढ़ैयो जाथि । संग- संग बाल बच्चा सब सेहो स्कूल पढ़य जानि आर राधा सेहो पढ़य जाथि। घर के काज मे एको रति कमी नहि रखथिन। कारण सासु के असगर सभटा करैए परतनि से हरदम ध्यान रहैत छलनि राधा के।कालेज से अबैत देरि कपडा़ बदलथि आर भानस घर मे पैसि जाथि सबके चाह जलखै देबय लागथि । कारण सब स्कूल कालेज सँ  आएल रहैत छलैक बेरू पहर धरि।

समय बितल आऽ राधा ट्रेनिंग पास केलनि । बिच मे दियर ननदि के विवाह सेहो भय गेलनि। लेकिन सेहो आगु पढ़िते रहलि। आर एक दिन राधा के शिक्षकक नौकरी भऽ गेलनि । ओ खुशी-खुशी नौकरी करैए लगली। परन्तु बिधाता संगहि एकटा दुःख सेहो दए देलखिन। सासु मां जे राधाके हरदम संग देलखिन ओ स्वर्गवासी भय गेलखिन। राधा के दुःख तऽ बड्ड भेलनि लेकिन बिध के बिधान मानि के सैहि लेलनि। आब बड़का बेटा सेहो कमाय लगलनि । बेटी के विवाह भय गेलनि । परिवार मे दियर सब अलग भय गेलखिन । ससुर सेहो परलोक चलि गेलखिन। छोटका बेटा कें सेहो नौकरी  लागि गेलनि। आब राधा असगर दूनू प्राणि सुख सँ रहैत छथि । अन्ततः नौकरी से सेवानिवृत्त भऽ गेली। कखनो असगर बैसने सोचैत छथि जे कतए सँ कतए आबि गेलौं अछि । कि समय छल अभावो मे राति दिन एक संग सब परिवार भरल रहैत छल। ननदि भागिन- भैगनि एक ने एक पाहुन परक सब हरदम रहैत छल। परन्तु ओहो आब परलोक सिधारि गेलाह।  आब घर तऽ ओ एकदम असगर रहैत छथि। आब ने पाहुन ने ननदि नै भागिन -भैगनि आने कियो सर- कुटूंम्ब अबैत छथिन बेसी। आब सब अपन -अपन नौकरी चाकरी देश प्रदेश मे जा -जा के बैसि गेल छै। ककरो समय कहां छै। जे सब दिन दू किलो आटा के रोटी बनबैत छली से अखनि राधा आधा बाटी आटा के रोटी बनबैत छथि ओहु मे रोटी बचि जाईत छनि । आर दू किलो के आटा जहिया बनाबथि तहिया कतेको दिन रोटि घटिए जानि ते सासु पूतहु रात्रि मे चूडा़ खा कऽ रहि जाइत छली। लेकिन ओ आनंद ओ दिन आब हुनका एकटा सिनेमा के रील जेकाँ सपना सन लागि रहल छनि। आबक समय मे असगरक जीवन काटब कठिन भऽ जाइत छैक।

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