लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- विद्यापति
मिथिला आ महाकवि विद्यापति एक दोसर के पूरक मानल जाइत छैथि। भक्त के दास के रूप भगवान द्वारा सेवा के भाव उगना आ विद्यापति द्वारा सदृश होइत अछि।
महाकवि विद्यापति शिव आ शक्ति क प्रबल भक्त छलाह। शक्ति के रूप में दुर्गा, काली, भैरवि, गंगा, पार्वती आदि केर वर्णन अपन रचना मे कयने छैथि यथा “जय जय भैरबी असुर भयाओनि पशुपति भामिनी माया, सुरसरि सेबि मोरा किछु नहि भेल, टूटल फाटल मरैया लागे सोहाओन हे आहे ताहि तऽर गौरी दाई ठाढ़ मनहि मन सोचथि हे इत्यादि आ महादेवक भक्ति के बारे में लिखनाइ अतिशयोक्ति बुझैत छी कारण मिथिलाक प्रत्येक घर में उगना आ विद्यापति केर चर्चा आम चर्चा थिकै। महाकवि विद्यापति जखन अत्यन्त बूढ भऽ गेलाह आ बीमार रहय लगलाह तऽ अपन पुत्र आ सर सम्बन्धी सभ के बजा कऽ अपन इच्छा ब्यक्त कयलनि जे मरवाक काल हम पतित पावनी गंगा के कचहैर में गंगाजल के स्पर्श करैत अपन प्राण केर त्याग करय चाहैत छी। सभ कहरिया बजा कऽ सिमरिया घाट विदा भेलाह। आगू आगू कहरिया आ पाछू पाछू महाकवि के सर सम्बन्धी सिमरिया विदा भेलाह। भरि राति चललाक उपरान्त जखन सूर्योदय भेलैक तखन विद्यापति पूछैत छथिन्ह जे यऔ कहरिया भाई।आब गंगा कतेक दूर छैथि? कियो जबाब देलकनि जे बस ठाकुर जी। पौने दू कोस। विद्यापति आत्मविश्वास सँ कहलखिन्ह जे पालकी रोकू। गंगा एहीठाम आओती। ओमहर सँ कियो कहलकै जे ई सम्भव नहि अछि ठाकुर जी। गंगा एहिठाम सँ पोने दू कोस दूर बहि रहल छैथि। ओ एतय कोना आबि सकैत छैथि? चलू ने। एक घंटा के अन्दर हमरा लोकनि सिमरिया घाट पहुँच जायब। नहिं- नहिं। पालकी रोकू। हमरा सभकें आओर आगू जयवाक जरूरत नहि अछि। गंगा एहीठाम आओती। जँ एकटा बेटा जीवन के अंतिम क्षण में अपन मायक दर्शन करवाक लेल जीर्ण शरीर सँ एतेक दूर धरि आयल छैथि तऽ की गंगा माँ अपन बेटा सँ भेंट करवाक लेल पोने दू कोस नहिं आबि सकैत छैथि? गंगा माँ आओती आ अवश्य आओती। एतवा कहि विद्यापति ध्यानमग्न भऽ जमीन पर बैसि जाइत छैथि आ पन्द्रहे बीस मिनट मे गंगाधार अपन प्रवल तरंग केर संग ओहिठाम उपस्थित होइत छैथि। उपस्थित लोक आश्चर्यचकित भऽ जाइत छैथि। महाकवि सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ जोड़ि गंगा के प्रणाम करैत छैथि आ ओहि जल मे प्रवेश करैत काल धरि एहि गीतक रचना करैत छैथि आ गंगा के शरण मे समाहित भऽ जाएत छथि।
“बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे…..
