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स्वतंत्रता दिवस पर अपन इतिहास सँ प्रेरणा लैत, अपन वर्तमान केँ सशक्त बनबैत आऽ भविष्य केँ उज्ज्वल करबाक संकल्प लिअ

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लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- “स्वाधीनता दिवस” भारतीय गौरव आऽ मिथिलाक योगदान

आऊ आई स्वाधीनता दिवसक गौरव गाथा सुनाबै छी,
आई बलिदानी रँग सजल सपुतक प्रतिविम्ब सजबै छी।

स्वाधीनता दिवस भारतवर्षक लेल मात्र एकटा राष्ट्रीय पर्व नहि, बल्कि गौरव, बलिदान आऽ आत्मसम्मानक प्रतीक अछि। १५ अगस्त १९४७ के दिन भारत विदेशी शासनक बेड़ी तोड़ि अपन स्वतन्त्र अस्तित्व स्थापित केलक। ई दिन प्रत्येक भारतीयक हृदय मे गर्वक ज्वाला प्रज्वलित करैत अछि, जकरा संग बलिदानी वीर-वीरांगनाक स्मृति, जन-जनक त्याग आऽ अखण्ड राष्ट्रभावना जागृत होइत अछि।
भारतीयक गरिमा संग स्वाधीनता दिवस
स्वतंत्रता केवल राजनीतिक मुक्ति नहि, बल्कि आत्मसम्मानक पुनः स्थापना अछि। स्वराज्यक संग भारतीयक सांस्कृतिक, सामाजिक आऽ बौद्धिक पहचान पुनः फुलल-फलल। ई दिन हमरा सभ केँ याद दिअबैत अछि जे स्वतन्त्रता संग उत्तरदायित्व सेहो आबैत अछि समानता, भाईचारा, न्याय आऽ स्वावलम्बनक दिशा में आगू बढ़बाक। राष्ट्रक गरिमा केवल झंडा फहराबय सँ नहि, बल्कि ओकर रंग आऽ आदर्श केँ जीवन में उतारय सँ सुरक्षित रहैत अछि।
मिथिलांचल स्वतंत्रता संग्रामक इतिहास मे विशेष स्थान रखैत अछि। एहि भूमिक सुपुत्र-सुपुत्री अपन कलम, कर्म आऽ खून सँ स्वतंत्रताक ज्योति प्रज्वलित केलनि। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद देशक प्रथम राष्ट्रपति, जनिकर सादा जीवन आऽ उच्च विचार देश लेल आदर्श बनल, ललित नारायण मिश्र स्वतंत्रता सेनानी आऽ विकास पुरुष, बाबू सीताराम झा, यदुनंदन शर्मा, कमला मिश्र मधुकर आदिक योगदान अमिट अछि।
मिथिला के विद्या, तर्कशक्ति आऽ लोकसंस्कृति सदिखन स्वाधीनता आंदोलनक प्रेरणा स्रोत रहल। गांधीजी सेहो चंपारण सत्याग्रहक समय मिथिला सँ प्रेरित भेल, जतय खेतिहरक पीड़ा, सामाजिक एकजुटता आऽ त्यागक भावना अपन पूर्ण प्रभाव देखेलक।
आई स्वाधीनता दिवस मिथिला लेल आत्मचिन्तनक दिन सेहो अछि। स्वतंत्रता संग्रामक मूल मूल्य स्वावलम्बन, शिक्षा, नैतिकता के पुनः अपनैब आवश्यक अछि। मिथिला अपन बौद्धिक धरोहर, लोककला, भाषा आऽ कृषि-आधारित जीवनशैली केँ पुनर्जीवित क सकैत अछि, ताहि मे राष्ट्रक गरिमा संग क्षेत्रक प्रतिष्ठा सेहो बढ़त।
स्वाधीनता दिवस हमरा याद करबैत अछि जे राष्ट्रक शक्ति ओकर सीमामे नहि, बल्कि ओकर नागरिकक चरित्र आऽ कर्मठता मे बसल अछि। जौं मिथिला अपन सांस्कृतिक समृद्धि आऽ सामाजिक एकता सँ योगदान देत, त ई ने केवल क्षेत्र, बल्कि सम्पूर्ण भारतक गरिमा बढ़ाउत।
स्वाधीनता दिवस भारतीय आत्मगौरवक अमर गीत अछि। ई दिन अपन शहीद वीर-वीरांगनाक प्रति कृतज्ञता व्यक्त करबाक, अपन जिम्मेदारी स्मरण करबाक आऽ नव संकल्प लए भविष्य गढ़बाक अवसर अछि। मिथिला आऽ भारत दुनु एक-दोसरक पूरक जेना गंगा आऽ कोसीक संगम, ओना संस्कृति आऽ स्वतंत्रता एक-दोसरक संग जीवन्त रहत। स्वतंत्रता दिवस पर अपन इतिहास सँ प्रेरणा लैत, अपन वर्तमान केँ सशक्त बनबैत आऽ भविष्य केँ उज्ज्वल करबाक संकल्प लिअ ओही मे भारतीयक सुच्चा गरिमा निहित अछि।

आई गंगा-कोसीक संगम जेकाँ संस्कृति संग स्वराज,
मिथिला संग भारत कय रहल नव युगक शुभ आगाज।

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