Search

लाखों वीर बलिदानक बदौलत भेटल स्वाधीनता दिवस देशक एकता, अखंडता आ प्रगतिक रक्षा करबाक जिम्मेदारी बढ़बैत अछि

766 भ्यूज

लेख
प्रेषित : मंजूषा झा
विषय : स्वाधीनता दिवस :१५ अगस्त

भारत देश केर राष्ट्रीय पर्व

भारतवर्ष अनादिकाल सँ विद्या, संस्कृति आ सभ्यता केर पवित्र भूमि रहल अछि। एहि धरती पर सदा सत्य, अहिंसा आ आत्मबल केर शिक्षा फूली-फली अछि। मुदा करीब दू शतक धरि ई देश विदेशी शासक—अंग्रेज—क गुलामी सहैत रहल। शोषण, अन्याय आ अत्याचार केर कड़ुआ अनुभव भारतक जनमानस केँ पीड़ित कयल। मुदा देशक वीर पुत्र-पुत्री निरन्तर बलिदान आ संघर्ष सँ आखिरकार १५ अगस्त १९४७ केँ भारत स्वतंत्र भेल।

स्वाधीनता आंदोलनक पृष्ठभूमि
ईस्ट इंडिया कम्पनीक आगमन सँ आरंभ भेल भारतक गुलामीक कथा धीरे-धीरे ब्रिटिश शासनक रूप लऽ लेल। अपन धूर्त नीति आ साम्राज्यवादी दृष्टिकोण सँ अंग्रेज भारतक सम्पदा लूटलक, परिश्रमशील किसान आ कारीगर केँ दरिद्र बनौलक आ देश केँ अकाल, विपन्नता आ पिछड़ापनक दलदल मे ढकेललक।

एहि अन्यायपूर्ण स्थिति विरुद्ध समय-समय पर विद्रोह फूटैत रहल। १८५७ क पहिल स्वाधीनता संग्राम भारतक स्वतंत्रता यात्रा मे एकटा महत्वपूर्ण मील का पत्थर छल। रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, तात्या टोपे, बेगम हज़रत महल आदिक बलिदान सँ स्वतंत्रता केर अगिनि मशाल प्रज्ज्वलित भेल। यद्यपि ई संग्राम तत्काल सफल नहि भेल, मुदा स्वतंत्रता केर बीज जमि गेल।

स्वतंत्रता संग्रामक विभिन्न चरण
भारतक स्वतंत्रता आंदोलन अनेक चरणक संग गुजरल—

१८८५ सँ १९१९ तकक चरण: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसक स्थापना भेल आ दादाभाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले जेकाँ नेता संवैधानिक सुधारक माध्यम सँ स्वतंत्रता केर मांग करऽ लागल।

गांधी युग (१९१९-१९४२): महात्मा गांधी सत्याग्रह, असहयोग आ सविनय अवज्ञा आंदोलनक माध्यम सँ आम जनता केँ स्वतंत्रता संग्राम मे जोड़लनि। जलियांवाला बाग नरसंहार जनता केँ और प्रखर विद्रोहक लेल प्रेरित कयल।

क्रांतिकारी आंदोलन: भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्ला खान आदिक बलिदान सँ युवाशक्ति मे जोश जगल।

भारत छोड़ो आंदोलन (१९४२): गांधीजीक “अंग्रेज भारत छोड़ू” नारा स्वतंत्रता संघर्षक अंतिम पड़ाव साबित भेल।

१५ अगस्त १९४७ : स्वतंत्रता दिवस
कई दशकक अथक प्रयास, सत्याग्रह, जेल-यात्रा आ शहादतक फलस्वरूप १५ अगस्त १९४७ केँ भारत गुलामीक बेड़ी सँ मुक्त भेल। देशक पहिल प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू संसद भवन मे मध्यरात्रि केँ अपन ऐतिहासिक भाषण मे कहलनि—
“एकटा लंबा संघर्षक बाद हमरा सभ स्वाधीनता प्राप्त कएलहुँ। आब समय अछि जे हम अपन जनताक भाग्य स्वयं तय करब।”

ई दिन भारतक लेल नवयुगक प्रभात बनल।

स्वाधीनता दिवसक महत्व
१. गुलामी सँ मुक्ति: ई दिन स्मरण करबैत अछि जे स्वतंत्रता सहज नहि भेटल, बल्कि लाखों वीर बलिदानक बदौलत भेटल।
२. राष्ट्रीय एकता: हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सब समुदाय आ भाषा-प्रदेशक लोक मिलि क’ स्वतंत्रता संग्राम मे भाग लेलनि।
३. लोकतंत्रक स्थापना: स्वतंत्र भारत लोकतांत्रिक पथ अपनौलक, जे जन-जनक सहभागिता सुनिश्चित करैत अछि।
४. नवभारतक निर्माण: शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि आ औद्योगिक विकासक दिशा मे नवा अवसर खुलल।

स्वाधीनता दिवसक आयोजन
स्वतंत्रता दिवस आज पूरे देश मे उत्साह आ श्रद्धा सँ मनाओल जाइत अछि।

लालकिला पर ध्वजारोहण: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहरबैत छथि आ देश केँ संबोधित करैत छथि।

विद्यालय-विद्यालय उत्सव: परेड, भाषण, कविता, नाटक, देशभक्ति गीत आ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होइत अछि।

शहीद सभक श्रद्धांजलि: ई दिन स्वाधीनता सेनानीक बलिदान केँ स्मरण कयल जाइत अछि।

राष्ट्रगान आ तिरंगा: “जन गण मन” केर स्वर आ तिरंगाक फहराहट देशभक्ति सँ भरि दैत अछि।

आधुनिक परिप्रेक्ष्य मे स्वाधीनता दिवस
स्वतंत्रता दिवस केवल अतीतक गौरवगाथा नहि, बल्कि वर्तमान आ भविष्यक दायित्वक स्मरणो अछि।

सामाजिक समानता: आज सेहो समाज मे विषमता आ भेदभाव विद्यमान अछि। ओकर उन्मूलन जरूरी अछि।

आर्थिक आत्मनिर्भरता: स्वतंत्रता केर सार्थकता तखन हएत, जखन हर नागरिक आत्मनिर्भर बनत।

वैज्ञानिक प्रगति: डिजिटल भारत, अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी विकास देशक शक्ति केँ विश्व स्तर पर स्थापित करैत अछि।

राष्ट्रीय सुरक्षा आ एकता: सीमा पर बाहरी चुनौती आ आंतरिक विघटनकारी तत्व सँ निपटबाक लेल सजगता आवश्यक अछि।

युवा पीढ़ीक दायित्व
भारतक भविष्य ओकर युवाशक्ति पर निर्भर अछि। स्वतंत्रता सेनानीक आदर्श सँ प्रेरणा ल’ क’ युवा समाज सेवा, शिक्षा, विज्ञान आ नैतिक मूल्यक बल पर देश केँ विश्वगुरु बनएबाक दिशा मे योगदान द’ सकैत छथि।

निष्कर्ष
१५ अगस्त भारतवर्षक गौरवपूर्ण तिथि अछि। ई दिन हमर बलिदानी इतिहास, राष्ट्रीय एकता आ भविष्यक संकल्पक प्रतीक अछि। स्वाधीनता केवल भूतकालक उपलब्धि नहि, बल्कि ई दिन हमरा सब केँ याद करबैत अछि जे आजो देशक एकता, अखंडता आ प्रगतिक रक्षा करबाक जिम्मेदारी हम सभक अछि।

स्वाधीनता दिवस अपन अतीतक स्मरण, वर्तमानक कर्तव्य आ भविष्यक दिशा-संकेत अछि।

Related Articles