दहेजक कुप्रथाक कारण कतेको बेटिक बलि चढ़ि चूकल अछि

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#दहेज
ई एकटा समाजिक एहन समस्या अछि जाहिकेँ कारण कतेको बेटी बलि चैढ़ गेली, कतेको बेटी मायक कोखियेमे मारल जाइत छथि। कतेको बेटीकेँ जन्म लैते माय-़बाप, सगा-संबंधी सभ आक्रोश करैत छथि। मुदा ई नञि सोचैत छथि जे बिनु बेटीकेँ बेटाकेँ वियाह कोना हेतैक।
दहेज कोनहुँ ने कोनहुँ रूपमे अदौंकाल सँ चलैत आबि रहल अछि। प्राचीन कालमे गैनक रूपया नञि देल जाइत छलैक त’ बेटीकेँ खोंइछामे खेत पथार देल जाइत छलैक। जमायकेँ गाय महिस देल जाइत छलैक। पसेरी धरामे सोना-चाँदी देल जाइत छलैक। तकर माय -बापक एकटा बेटीकेँ प्रति इहो रूझान रहैत छलैन जे आब त’ बेटी एहि घर सँ सदाके जा रहल अछि आ हुनका जे देबैन हाथ उठाक सैह लेती। एकटा मिथिलाक प्रचलित गीत:-

बाबाके संपतिया हो भैया,भतिजबा केर हे राज
हम दुर देशनी हो भैया, मोटरिया केर हे आश

तैं जखन बेटीकेँ दुरागमन होइत छलैक त’ हिंग सँ हरैद तक पेटारमे देल जाइत छलैक जे हमर बेटी ओत जाय खेती। नुवा, आभुषण ,तेल,साबुन,श्रृंगारक सभ सरेजाम सेहो देल जाइत छलैक जे जाइते बेटीकेँ ककरो लंग कुनू वस्तुकेँ लेल मुँह नञि फोल परतैन। तहियो बेटी बला सभ स्वेच्छा सँ दैत छलखिन।
८/१० वर्ष पहिने कतबो पढ़ल लिखल गुणगरि बेटी छैथ तैयो दहेज लोक समाजक संग बैस कए तोरैत छलैथ आ बेटी बला मजबूरन दैत छलखिन। ताहिपर नैहर सासुरक लोक टोलक लोक सेहो साँठ राज आबिक देखैत आ निंदा प्रशंसा करैत छलखिन। तैयो बेटीबला सभ करबालेल विवश रहैत छलखिन। मुदा आब देखाबा बहुत भगेल अछि। सरकार समाज सभ एहि पर कार्यरत अछि मुदा लोक की कहत आ आब चुपे बेटा बला बेटी बला बैसक वा फोने सँ सभ कए लैत छथि।
#दहेजकेँ बढ़ावा देबामे बेटी बलाकेँ सेहो बहुत पैघ भूमिका छैन। ज्यों कियो देखलक बिना दहेजक कथा त’ खुशी होमके बदले ओहिमे दसटा नुक्स निकालती:- कियैक ओहिना करतै, किछु त’ बात जरूर हेतै, लोक की कहत, वियाहक राइत बिनु गहना एकौरत्ती शोभा देतैक, आ नीक लत्ता कपड़ा ज्यों नञि रहतै त’ लोक की कहतै, वियाह की बेर-बेर होइत छैक ? ई त’ जीवनमे एकै बेर होइत छैक तैं नीके सँ करब । ततेकने आडम्बर देखाब लगैत छथिन जे आब घटकोकेँ बड्ड मोश्किल होइत छैन आ सभ घटकैती करहो नञि चाहैत छैथ। मनोरथकें नाम पर जा धरि दुनू पक्ष खूम खर्च नञि करता नीक सँ पीसा नञि जेता ताबत वियाह पूर्ण नञि होएत। सबसँ विनम्र आग्रह जे ई दहेज रूपी दानव तखने हटत जखन वियाहमे ताम-झाम कम करब ई पाखण्ड सँ बाहर निकलब आ लोक की कहत एहि सँ बाहर आबि अप्पन बच्चाक भविष्य पर धियान देब।

जय मिथिला जय मैथिली🙏

नीलम झा✍️
जनकपुरधाम