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दहेज मुक्त माने कन्या पक्ष पर कोनो प्रकारक आर्थिक दबाव नै होइ

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  1. लेख विचार
    प्रेषित:  आभा झा
    श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
    लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
    विषय :- नब पीढ़ी मे विवाहक प्रतिए उदासीनता वा देरी
    किएक
  2. लेखनीकेँ धार – दहेज मुक्त समाज: हमर दृष्टिकोण

    दहेज मुक्त समाज कहबाक अर्थ अछि ओ समाज जतय विवाहक समय कोनो प्रकारक लेन-देन, उपहार, धन-संपत्ति, वाहन, गहना आ अन्य सामग्रीक आदान-प्रदान नै होइत अछि। अर्थात्, विवाह मात्र दू गोट लोकक आओर हुनक परिवारक बीच आत्मिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक बंधन होइछ, जाहिमे पैसाक लेन-देनक कोनो स्थान नै होए। दहेज मुक्त समाज हमर दृष्टिमें ओ समाज थिक, जतय कन्याकेँ वर देनाय अभिशाप नै, बल्कि गर्वक विषय होइ।

    दहेज: एक सामाजिक अभिशाप

    हमर समाजमें दहेज एकटा गम्भीर सामाजिक बुराई थिक। विवाहक समय वर पक्ष द्वारा कन्या पक्ष सऽ नकद पैसा, गाड़ी, जमीन, गहना आदिक माँग कएल जाइत अछि। एहि बुराइ सऽ कन्या पक्ष आर्थिक रूप सऽ दबाव में आबि जाइत अछि। बहुत रास परिवार बेटीक विवाह करबाक डर सऽ बेटीक जन्मे सऽ घृणा करैत अछि। दहेजक दबावमें आबि कऽ कतेको बेटी शिक्षा सऽ वंचित रहि जाइत अछि, समय पर विवाह नै भऽ पबैत अछि, आ कतेक बेर मानसिक यातना सऽ गुजरि आत्महत्या करै़केँ लेल मजबूर भऽ जाइत अछि।

    दहेज मुक्त केर वास्तविक परिभाषा

    हमर नजरिमें दहेज मुक्त समाज ओ होइत अछि जतय:

    विवाहक मूल आधार प्रेम, समझदारी आ समानता होइ।
    कन्या पक्ष पर कोनो प्रकारक आर्थिक दबाव नै होइ।
    विवाहक खर्च दूनू पक्ष मिलि कऽ सामर्थ्य अनुसार करैत होइ।
    वर पक्ष कन्या पक्षक प्रतिष्ठा आ भावनाक आदर करैत होइ।
    कन्याकेँ वस्तु नै, मानव रूपमें देखल जाइ।
    समाजमें एहेन सोच विकसित होइ जे विवाह एकटा जीवन संग्रामक शुरुआत होइछ, लेन-देनक सौदा नै।
    दहेज मुक्त समाज बनाबै लेल की जरूरी अछि?

    शिक्षा: लड़का आ लड़की दुनूकेँ समान शिक्षा देबाक जरूरत अछि। शिक्षित समाज दहेजकेँ एक अभिशाप बुझि सकैत अछि।

    सजगता अभियान: गाम-गाम, स्कूल-स्कूल, आ सार्वजनिक मंच पर दहेज विरोधी अभियान चलाओल जाए, जाहि सऽ लोकक मानसिकता बदलि सकए।

    कानूनक कड़ाई सऽ पालन: भारत सरकार द्वारा बनाओल दहेज निषेध अधिनियम 1961 के सख्ती सऽ पालन हुए, आ दोषीक विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होए।

    आत्मसम्मान: वर पक्षक लोक अपन आत्मसम्मानकेँ जागृत करैत दहेज लेबै सऽ इनकार करए, आ कन्या पक्ष अपन बेटी पर गर्व करए।

    सामाजिक बहिष्कार: जे कियो दहेज माँग करैत अछि, समाज ओहि परिवारक बहिष्कार करए, जेना कोनो अपराधीकेँ कएल जाइत अछि।

    दहेज मुक्त विवाहक उदाहरण

    आजुक समयमें बहुत रास जागरूक युवक-युवती आ परिवार स्वयं दहेज मुक्त विवाह कऽ उदाहरण प्रस्तुत कऽ रहल अछि। किछु गाममें सामूहिक विवाहक आयोजन होइत अछि जतय सब विवाह बिना दहेजक होइछ। एहि प्रकारक प्रेरणादायक प्रयास सऽ समाजमें एकटा नव संदेश जाइत अछि।

    दहेज मुक्त समाज एकटा आदर्श समाज थिक। एहेन समाजमें महिलाकेँ समान अधिकार, सम्मान आ स्वतंत्रता भेटैत अछि। विवाहक नाम पर लेन-देन बंद हेबाक चाही, तखनहि बेटीक जन्म एकटा उत्सव होयत। हमर सभक प्रयास हेबाक चाही कि अपन-अपन समाज सऽ दहेज रूपी बुराईकेँ समाप्त करी। जखन समाजक हर व्यक्ति सोचब कि “हम दहेज नै लेब, नै देब”, तखन समाज सऽ ई बुराइ अपने समाप्त भऽ जायत।

    दहेज मुक्त समाज मात्र एकटा सोच नै, एकटा क्रांति थिक—जाहि सऽ महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता आ मानवताकेँ बल भेटैत अछि।

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