लेख विचार
प्रेषित: प्रिया झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- ” बढ़ैत शिक्षाकेँ संग घटैत नैतिक व्यवहार—-आबय वाला समयमे एकर दुष्प्रभाव!! दुनूमे सामंजस्य बना कऽ रखबाक लेल कि उपाय!”
आइ कालि के आधुनिक समय मे नैतिक व्यवहार के
अपेक्षा रखनाय मुश्किल अछि ।समय बहुत तेजी सँ बदलि गेल परिवेश बदलि गेल आब ज्ञान के मतलब मात्र डिग्री तक सीमित भऽ गेल अछि ।पहिने जकाँ मौलिक व्यवहारिकता नैय भेटत । पारंपरिक सब अवधारणा आब समाप्त भऽ गेल ।पैघक सम्मान, बात विचार, संस्कार कम नवयुवा मे भेटत जे सोचनीय भऽ गेल । पढ़ाई लेल बाहर गेला कारणे घर मे सिखल बुझल संस्कार सेहो बिसरी जाइत छैक । नैतिक शिक्षा के किताब मे सेहो पढ़ने रहैय छैथ बच्चा सभ । सब मिशनरी स्कुल मे नैय पढ़ने रहैय छैथ जे नैतिकता बिसैर जेथिन परंच दोस्तक संगति के कारणे ओ गौण भऽ जाइत छैन । परिस्थितिवश हाइफाइ मे वा पाश्चात्य प्रभाव पड़लाह से नैतिक व्यवहार धुमिल भऽ रहल अछि । पढ़ाई कखनो गलत चीज नैय सिखबैत अछि मुदा घर मे भेटल संस्कार आ व्यवहार सेहो उपेक्षित नैय होइ ओहि लेल प्रयास करैय पङत ।
आबय बला समय* मे अगर हम सब सुधारैय के प्रयास नैय केलौ तऽ नैतिकता खतम भऽ जाएत ।
दुष्प्रभाव** समय संग नैतिक व्यवहार के नैय बचेलउं तऽ संबंध पर असर पड़तैय कोई ककरो गप्प नैय सुनतैय अपन मनमानी चलतै जे सभके पतन दिस लके जेतैय ।
मनुख समाजिक प्राणी अछि जखन नैतिकता खतम तखन गुंजाईश कत;से हेतैय आपस मे वैमनस्यता बढ़ि जाएत ।पूजा पाठ ,धर्म सँ विरक्ति रहैत अछि बेसी बच्चा के कम बयस के (टिनएजर)ओ सभ ककरो गप्प नैय पसंद करैय छैक ।अपन सुतय के समय से लक उठैय के समय तक निर्धारित रहैय छैन । मोबाइल से सटि के पूरा दिन राति बितैय छैन हुनकर पूरा दुनिया मोबाइल मे समाहित रहैय छैन कि कहल जाई तऽ औघोगिकरण सबटा पहिलुक नैतिकता आ वैचारिक भाव खतम कऽ देलक।पारिवारिक दायित्व से भगैय छैथ बच्चा सभ ।
माय बाप सं बेसी मोबाइल आ दोस्त के जरूरत रहैय छैन आइ के बच्चा सभके ।
दुनु मे सामंजस्य बनाक के रखबाक लेल उपाय _______
अपन संबंधि संबंध लेल समय निकाली बच्चा सभके अहि मे बजाउ चिन्हाउ एक दोसर के महत्व बुझाउ ।ई बुझेबाक छैक कि व्यवहार नैतिक हेबाक चाही अनैतिक नैय तऽ उच्च शिक्षाक कि महत्व रहि जाएत । पूजा पाठ के सेहो महत्व बुझाउ आ परस्पर स्नेह सं पारिवारिक ,सामाजिक दायित्व के बुझेला सं परिदृश्य बदलत ।
उच्च शिक्षा आ नैतिक व्यवहार दुनु के समान रूप मे स्वीकार करैय लेल बच्चा सभ मे चेतना जगेबाक चाही
बाकी एके बेर सब चीज स्वीकार्य नैय हैत समय लागत हताश नैय हेबाक अछि ।
