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कुलदेवताक पूजा केर व्यवस्था करए के चाही जौं सपरिवार परदेश होई

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लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : दैनिक पूजा सओं वंचित देवी/देवता ! ऐकर कि दुष्परिणाम वा उपाय ।

हमरा जहां धरि स्मरण अछि जे हमर बाबूजी हमर माँ के एक बात पर बड्ड खिसियाइत छलखिन्ह जे हमर माँ एक बजे दिन सँ पहिले मुँह में किछु नहिं लैत छलीह। ओहि जमाना में चाहक प्रचलन सेहो नहिं छलैक। हमर माँ भोरे सँ जन हरवाह के लेल पन्द्रह बीस टा मड़ुआ के रोटी पकबैत छलीह, भगवान के अरघी, पंच पात्र चिकनी माटि सँ माँजैत छलीह, पूजा के लेल दलान पर गुलाब के गाछ सँ फूल तोड़ि कऽ अनैत छलीह आ बारह, साढे बारह बजे स्नान कऽ कऽ गोसाओन घर में नित्य प्रति भगवती के आधा घंटा पूजा करैत छलीह। कतेको बेर डाक्टर कहलकन्हि जे भोर में दतमैन कऽ कऽ एक गिलास नेबो के सरबत बना कऽ पीबि लिअ मुदा ओ कथी लेल मानतीह। ओ निराजल भगवती के पूजा करैत छलीह। एकर अतिरिक्त एकादशी, चतुर्दशी, शनि रवि, सोमवारी आ मिथिलाक सभ पाबनि ओ खूब भव्य रूप सँ करैत छलीह। आब हुनक मृत्यु के पश्चात सभटा पुतोहु शहर में रहैत छथिन्ह आ ओ सभ घराड़ी के भगवान भगवती के छोड़ि शहर में पूजा के फारमेलिटी करैत छैथि। हमरा ओहिठाम संयोग नीक अछि जे गाम मे एकटा भातीज आ पुतोहु रहैत छैथि तें गोसाओन घर में भगवती के पूजा नित्य दिन भऽ जाइत अछि मुदा बहुत गोटे के ओहिठाम गोसाओन घर में ताला लटकल रहैत छैन्ह। फेर जखन कोनो काज तिहार होइत छैक तऽ गोसाओन घर साफ कयल जाइत छैक। हम सभ अपन मायक मुँह सँ सुनियैन जे ओ कहथिन जे छोटका लोकक भगवती के रूप में सेहो नहिं जन्म ली कारण पूजा मात्र ओ सप्ताह के बेरागन दिन करैत छैक, मुदा वर्तमान परिस्थिति ओहो सँ भयावह भऽ गेलैक अछि जे महीना महीना भगवती के पूजा नहिं होइत छैन्ह।पाई दऽ कऽ पूजा केहेन होइत छैक ओ हमरा लोकनि खूब नीक जकाँ बुझैत छी कारण जतय पाई आगू बढि जाइत छैक ओहिठाम सँ आत्मीयता दूर भागि जाइत छैक आ पूजा आत्मा सँ कयल जाइत छैक। एकर परिणामस्वरूप हम सपरिवार शहरो में अशांत रहैत छी। हम अपन संस्कार सँ, आध्यात्म सँ दिनानुदिन दूर भेल जा रहल छी। पूजा सँ जे असली शांति भेटैत छैक ओहि सँ वंचित रहि जाइत छी। इ अत्यन्त सोचनीय विषय अछि जे अपन घरक भगवती के पूजा नित्य प्रति होयवाक चाही जाहि सँ समस्त परिवार सभठाम दन दन करैत रहैत छैक अन्यथा मन में कचोट रहैत अछि जे भगवती के पूजा नित्य नहिं भऽ पयलाक कारणे मोन में तरह तरह के बात घुमैत रहैत छैक। भगवती के पूजा नित्य दिन श्रद्धा पूर्वक होअय एकर समुचित ब्यवस्था होयवाक चाही ।

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