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यौ मैथिल अपनहि संस्कृति आ रीति–रिवाजक मखौल जुनि उड़ाउ

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लेख विचार

प्रेषित : कीर्ति नारायण झा

श्रोत : लेखनीक धार”, वृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि, दहेज मुक्त मिथिला समूह।

विषय:—पाश्चात्य संस्कृति आ सभ्यता दिसि आकर्षित होईत एखन के युवा…… भविष्य में एकर परिणाम और दुष्परिणाम।

 

 

मैथिली में एकटा शब्द छैक परचट्ट अर्थात दोसर घरक भोजन, दोसर घरक रहन सहन संस्कार नीक लगनाइ मुदा अप्पन बाड़ी के पटुआ तीत।हम मिथिलावासी मे इ सभ सँ बेसी पाओल जाइत अछि। मैथिल के सभ सँ पैघ दुर्गुण जे जँ कियो मिथिलाक संस्कृति केर मजाक उड़ा रहल अछि तऽ ओहिठाम बैसि कऽ दू तीन टा चीज आओर जोड़ि कऽ ओहि संस्कार के आओर बेसी हीन करवाक प्रयास में लागि जएताह, जखन कि हुनका अपन संस्कृति अथवा संस्कार के रक्षाक लेल ठाढ होयवाक चाही। मिथिलाक इ दुर्भाग्य छैक जे मैथिल अपना में एक दोसर के आगू बढैत नहिं देखि सकैत अछि। तिरहुतिया के मत एक दोसर सँ नहिं मिलि सकैत अछि। पहिले के मैथिल स्वावलंबी होइत छलाह मुदा आब के परालम्बी। अपन संस्कार के खराब मानि कऽ छोड़वा में हमरा लोकनि सर्वप्रथम छी। हमरा अपन भाषा बजबा मे लाज, अपन वस्त्र पहिरवा मे पिछड़ल होयवाक अनुभूति होइत अछि। हमरा सभके धोती कुर्त्ता खराब लगैत अछि आ शेरवानी आ पैजामा नीक लगैत अछि। पश्चिमी सभ्यता के अपना कऽ हमरा लोकनि ने घर के रहैत छी ने घाट के। एहि सन्दर्भ मे हमर सभक धिया पूता सभ सँ आगू अछि, मुदा एहि मे शत प्रतिशत ओकर दोष माननाइ उचित नहिं कारण हमहुँ सभ कम दोषी नहिं छी। अपन भाषा, अपन संस्कृति के विषय में उचित जानकारी धिया पूता के देवा में हमरा लोकनि पाछू रहि जाइत छी जे स्पष्ट संकेत करैत अछि जे हम स्वयं अपन संस्कार आ संस्कृति सँ दूर रहैत छी। अपन भाषा आ संस्कार पर भाषण देवा में हम प्रखर रही मुदा अन्तर्मन सँ हम अपन भाषा एवं संस्कृति के अन्तर्मन सँ स्वीकार नहिं कयने छी। हमरा लोकनि अपन धिया पूता के अंग्रेजी शिक्षा देवाक पाछू एतेक बेसी खसि पड़ैत छी जे अपन भाषा संस्कृति के बिसरि जाइत छी। धोती कुर्त्ता पहिरनाइ पिछड़ल होयवाक प्रतीक नहिं होइत छैक, पर्दा अशिक्षा के द्योतक नहिं छियैइ, पर्दा सम्मान के प्रतीक होइत छैक। जाहि ठाम परदा आवश्यक छैक ओहि ठाम खुलापन नहिं होयवाक चाही। ओ खुलापन पाश्चात्य संस्कृति केर प्रतीक छियैइ जे कथमपि मिथिला संस्कृति के तुलना नहिं कऽ सकैत अछि। बहुत मुँह सँ सुनैत छी जे एकर कारण शिक्षा के विस्तार छियैइ मुदा इ पूर्णतया गलत छियैइ कारण शिक्षा कखनहु नहिं सीखवैत छैक जे सदैव उघरल रहू। शिक्षा संस्कार केर जननी होइत छैक।एकर दुष्प्रभाव आब अपन सभक समाज पर पड़नाइ आरम्भ भऽ गेल अछि जे अन्तर्जातीय बिवाह, सम्बन्ध विच्छेद के बढैत संख्या, पारिवारिक कलह, समाज सँ दूरी इत्यादि जे मिथिला संस्कृति के विपरीत छैक। एखनो समय अछि जे समस्त मैथिल के एहि विषय पर सोचय पड़त आ अपन संस्कृति के पुनर्जीवित कऽ कऽ एहि समस्या स मुक्ति पाओल जा सकैत अछि नहिं तऽ वर्तमान के भयावह स्थिति सुरसा जकाँ अपन मुँह पसारने जा रहल अछि जे समस्त मैथिल समाज के अपना में समा लेत…

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