Search

अपन पारंपरिक सभ्यता पर गर्वित छी

269 भ्यूज

लेख विचार

प्रेषित : प्रफुल्ल चंद्र झा

श्रोत : लेखनीक धार”, वृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि, दहेज मुक्त मिथिला समूह।

विषय:—पाश्चात्य संस्कृति आ सभ्यता दिसि आकर्षित होईत एखन के युवा…… भविष्य में एकर परिणाम और दुष्परिणाम।

लेखनीक धार प्रतियोगिता अंतर्गत विषयांकित प्रसंग वस्तुतः अपन विलक्षण सभ्यता, संस्कृति आ परम्परा पर कुठाराघात कय रहल अछि। जँ अखनो एहि दिसा मे सुधार दिसि ठोस प्रयास सब मिलि केँ नहिं करब त ओ दिन दूर नहिं जे अपन सब पारम्परिक सभ्यता, संस्कृति, लोकाचार पूर्णतः विकृत भ जायत।

कहबा मे संकोच नहिं जे अपन परम्परा मे विकृति अनबा मे हम अभिभावक बेसी दोषी छी। कारण युवा वर्ग मे ओ परिपक्वता केँ उम्मीद नहिं क सकैत छी जे हम अभिभावक मे अछि। युवा मोन केँ कोनो सभ्यता दिसि भटकनाई बड स्वाभाविक छैक परन्तु अपन परम्परा के प्रतिकूल आचरण के ज्ञान एवं प्रेरणादायक विचार दिस अनबाक उचित प्रयास मात्र अभिभावक लोकनिक कार्य छन्हि। परन्तु देखल जा रहल अछि जे एहि दिसा मे अपन पुत्र पुत्री मोह वा एहेन संस्कृति सँ हुनक आकर्षण के प्रभाव सँ हुनक पूर्ण समर्थन एहि तरहक संस्कृति के भेटि रहल छै आ युवा वर्ग आह्लादित होईत रहलाह अछि। क्रमशः देखा देखी चहुँ दिस पसरि रहल अछि।

हर क्षेत्र वा विशेष सम्प्रदाय के अपन अपन पारम्परिक संस्कृति होईत छैक आ ओकर विलक्षणता अपनहि संस्कृति मे निहित रहैत छैक तेँ उचित छैक जे अपन पारम्परिक सभ्यता सँ कखनहुँ खिलबाड़ नहिं करी कारण हमरा लोकनि परम्परावादी छी आ अपन पारम्परिक सभ्यता पर गर्व करै छी।रहल एकर परिणाम आ दुष्परिणाम पर प्रभाव के त निश्चित रूपें एकर प्रभाव सर्वसाधारण पर भयंकर परि रहल अछि आ जँ एहि दिसा मे सब  कियो अपन सहभागिता नहिं देबै त आबय बाला पिढी अत्यंत प्रभावित होयत। अहि लेल सभ समाज जिम्मेवार छी तें सभ मिलिए कै अहि दोष के दूर करबाक प्रयास कएल जाईक चाही।

 

 

Related Articles