“मिथिलाक खान -पानमे फास्ट- फुडक प्रवेश आ एहिसँ बचबाक उपाय”।

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— नीलम झा       

मिथिलाक_खान_पान अपने होइत अछि बड्ड महान। कतहु ज्यों भोजनक चर्चा- परिचर्चा होइत अछि त’ सबसँ पहिने मिथिलाक भोजन अबैत अछि जाहिमे – मिथिलाक माछ, राहिरक दाइल, तीसी सजमैन, बड़ीक झोड़, बर, ओलक लटपट, खम्हारूक तरूवा , तीलकोर तरल, कुम्हरौरीक तीमन, भट्टा अदौरी, भटबर, अंकुरी धक सागक भूजल, तीलक चटनी, रंग-बिरंग अचार, अरिकोंचक चक्का, तिलौरी, दनौरी, बिरीया चरौरी, चिप्स… करकल घी आ ऊपर सँ खजबी दही आ पान सुपारी अबैत अछि। हम सभ भोजन बनबैत सेहो बहुत मोन आ स्नेह सँ छी। हम मिथिलानी भोजन बनेबा काल अपन घरक हर सदस्यके पसंदक खियाल सेहो रखैत छी। मुदा एतेक रंग-बिरंगक मिथिलाक व्यंजन होइतहु एहिमे फास्ड -फुडक प्रवेश भगेल से दुखक गप्प अछि।
फास्ट फूडक प्रवेश:- एकर मुख्य कारण इहो अछि जे एकटा कहबी छैक जे- जेहने देश, देने भेष। एकर तात्पर्य ई अछि जे सभ कियो अपन नीक जीवन जिवाक लेल गाम छोड़ि शहर पलायन भए गेल छी त’ शहरकेँ चमक- धमक, पहिरब- ओढ़ब, बाजब भूकब आ खान- पानक प्रभाव कखन धीरे- धीरे जीवन हिस्सा भए जाइत अछि हमसभ नञि बुझी पबैत छी। पुरूखकेँ, बच्चा सभकेँ आफिस, स्कूल, कॉलेज आ अपन- अपन काज पर जाए परैत छैन । ओहि क्रममे ज्यों घर सँ जलखै बनाक नञि लए जाइत छैथ त’ फेर फास्ट फूडके सहारा रहैत छैन। ओना त’ आब घरक गृहणी सभ सेहो काम काजी भगेल छथि,हुनका जाहिर छैक जे समयाभाव रहैत हेतैन। दिन- राइत सभहक लेल चौबिसे घंटाके होइत छैक। तखन कामकाजी महिलाके विवशता भ’ जाइत छैन फास्ट फूडके उपयोग केनाइ। आइ काल्हिक बच्चा सभकेँ त’ फास्ट फूड आ जंग फूड सँ स्नेहो अत्यधिक रहैत छैन। बुझू त’ ओ अनिवार्य बुझैत छथिन ई खेनाइ।
स्वास्थ्य के धियान नञि रखैत छथि स्वादक पाछा परल रहैत छथि। आब फन्सन सभमे सेहो फास्ट फूडके बहुत चलन भगेल अछि। जन्मदिनक अवसर पर या कुनू एहन सन छोटमोट उत्सवमे लोक फास्ट फूडकेँ पैकेट बनाक जतेक लोककेँ मोन भेल बजा लैत छथि, कारण शारीरिक आराम सेहो आ रमन-चमन सेहो भ’ जाइत छनि।

एहि सँ बचबाक उपाय:- एहि सँ बचबाक उपाय मुख्यतः स्त्रीकेँ हाथमे छैन। हुनकेँ संभव भ’ सकैत छनि जे एहिसँ अपन घरक सदस्यकेँ बचौती। जे बाहरी भोजन घरमे बनेबाक कोशिश करतीह। जेनाकि हम सभ मिथिलाक प्रसिद्ध जलखै : -मुरही कचरी, आलुचप, पकौड़ा, घूघनी, छोला, हथरोटिया पोछा पूआ, मालपूआ,दैलपूड़ी सभ सबदिना घरेमे बनबैत छी ,मुदा किछु कनेक झंझटिया हेबाक कारण बजार सँ मंगबैत छी। जेना कि :- ई सभ।मुदा हम त’ अपने घरमे जीलेबी, लालमोहन (गुलाब जामुन) समोसा, पानीपूड़ी, समौसा चाट, टिक्की चाट, पापड़ी चाट, भेल पूड़ी, लिट्टी चोखा सूखा, लिट्टी छानल, इटली सांमर इत्यादि सभ बनबैत छी। तकर एकटा इहो कारण अछि जे हम सिर्फ गृहणी छी, हमरा लग समय रहैत अछि मुदा कामकाजी महिलाकेँ सेहो अपन परिवारकेँ स्वास्थक धियान रखैत घरमे कहियो- कहियो छुट्टीके दिनमे बनेबाक चाही। तखने अहि सँ बचल जा सकैत अछि। शुरूसँ नेना सभकेँ फास्ट फूड दिश कम आकर्षित करबाक चाही। जेहने शुरू सँ आदति लगबै बच्चा सभ ओहि दिशामे भागत।
एहि सँ दूटा लाभ सेहो होएत एकटा अपन संस्कृतिक रक्षा आ अपन मिथिलाक प्रसिद्ध खान- पानक सेहो होएत । दोसर अपन स्वास्थक रक्षा सेहो अपने कए सकैत छी स्वादक पाछा नञि भागिक।