“जाहि दिन राम जनम लेल, धरती आनन्द भेल हे..”

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— कीर्ति नारायण झा।   

“धन्य – धन्य नगर अयोध्या, धन्य राजा दशरथ हे। आहे धन्य कौशल्या के भाग्य, राम जी जनम लेल हे।”जाहि दिन राम जनम लेल, धरती आनन्द भेल हे। ललना रे बाजय बधैया अयोध्या में, गावय सखी सोहर हे”
सोहर बच्चाक जन्म केर शुभ अवसर पर बधाई गीत के रूप में मिथिलाक घर घर में गाओल जाइत अछि। सोहर मुख्य रूप सँ भगवान राम आ भगवान कृष्णक जन्म के केन्द्र विंदु मानि कऽ बनाओल गेल अछि आ मिथिलावासी के लेल विष्णु स्वरूप जमाय भगवान राम के जन्म के उत्साह के विषय में जतेक लिखी ओ कम होयत।.” चैत महीना बड्ड पावन, बड़ी मनभावन हे, माय हे राम जी के भेल जनमवा महल उठे सोहर रे, धन्य धन्य अवध नगरिया के, धन्य राजा दशरथ हे, माइ हे कौशल्या के भेल ललनमा, ललनमा बहुत सुंदर हे……. सर्वविदित अछि जे मिथिला में जमाय के महत्व बहुत बेसी होइत छैक, मिथिला वासी जमाय के भगवान स्वरूप मानैत छैथि तें धिया सिया के सिन्दूर के महत्व मिथिला वासी के लेल सर्वोपरि मानल जाइत अछि। धिया के अमर सुहाग के लेल जमायक जन्म के सुखद अनुभूति मिथिला बासी सँ बेसी आन ककरा भऽ सकैत अछि। रामनवमी के पवित्र पावनि समस्त मिथिला में अत्यंत श्रद्धा आ हर्षोल्लास केर संग मनाओल जाइत अछि आ एहि शुभ अवसर पर मिथिलानी राम जन्म के सोहर अत्यन्त तन्मयताक संग गबैत छैथि ओना कृष्णाष्टमी के दिन भगवान कृष्णक जन्म दिन के सोहर सेहो मिथिला में श्रद्धापूर्वक गाओल जाइत अछि मुदा मिथिलावासी के अपन धिया के छवि सदिखन आंखिक समक्ष झलकय लगैत छैन्ह तें राम जन्म के सोहर मिथिला में बेसी प्रसिद्ध अछि। राम जन्म के सोहर में मिथिला में राम के जन्मक उल्लास केर संग संग धिया के सासु कौशल्या के धन्य होयवाक संग संग “दसरथ गोर आ कौशल्या गोर छैथि ललना कियए भेलाह कारी रे? मिथिलानी सभ चहटगर गारि देवा में सेहो पाछू नहिं रहैत छैथि ओना इ सभ विधि आ ब्यवहार थिकै आ भगवान राम के सासुर होयवाक कारणे समधि आ समधिन के गारि देवाक अधिकार सेहो मिथिलावासी के स्वतः प्राप्ति छैन्ह मुदा भगवान राम के जन्म के उल्लास मिथिला में अयोध्या सँ एको रत्ती कम नहिं होइत छैक। अन्तर्मन सँ मिथिलावासी अपन धिया सिया के अत्यन्त भागवंत मानैत छैथि जे सीता के कारण भगवान राम के कौशल्या के गर्भ सँ जन्म होइत छैन्ह।” जखनहि राम जनम लेल ईश्वर दहिन भेल हे ललना रे….. पहिले मंगनियां सिया जी मांगलन सेहो, विधना पूरा कयलखिन हे, ललना रे मांगि लेलखिन अयोध्या ऐसन राज जनकपुर नैहर हे…… एहि सोहर में धिया सिया द्वारा भगवान सँ मंगलाक बादे भगवान राम के अयोध्या में जन्म लेवअ पड़ैत छैन्ह।सिया के शक्ति के विषय में जतेक विवेचना करी ओ कम होयत। सिया एमहर मिथिला में अवतरित होइत छैथि आ ओम्हर परब्रम्ह परमात्मा भगवान राम अयोध्या में जन्म लैत छैथि आ विधना के विधि के अनुसार सीता आ भगवान राम केर बिवाह होइत छैन्ह तें धन्य भाग्य कौशल्या के, धन्य भाग्य राजा दसरथ के, धन्य भाग्य अयोध्या के संगहि धन्य भाग्य मिथिला के सेहो जाहि कारणे भगवान राम के एहि पृथ्वी पर जन्म भेलन्हि आ मिथिलाक जमाय वनवाक सौभाग्य प्राप्त भेलन्हि, मिथिलाक धिया सिया सन समस्त गुण केर खान अर्धांगिनी भेटलन्हि। संगहि मिथिलाक अहोभाग्य सेहो जे स्वयं भगवान विष्णु भगवान राम के रूप में सर्वगुणसंपन्न जमाय भेटलखिन्ह………..