“बच्चाक पहिल शिक्षण संस्थान ओकर घर होइत अछि।”

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— आभा झा।     

बच्चाक पहिल शिक्षण संस्थान ओकर घर होइत अछि। बच्चा काँच मइट होइत अछि आ माता-पिता कुम्हारक जेकां सहारा दऽ कऽ सही आकारमे बच्चाकेँ ढालैत छथि। माता-पिता पर निर्भर करैत अछि कि बच्चाकेँ कोन रूपमे ढाली। माता-पिता बच्चाक जेहेन पालन-पोषण करथिन, जेहेन संस्कार देथिन बच्चाक भविष्य ओहने बनत। प्रत्येक माता-पिताक ई सपना होइत अछि कि बच्चा नीक व योग्य बनए। बच्चाक उचित विकासक लेल आवश्यक अछि कि माता-पिता बच्चाकेँ नेनपन सँ ही विशेष सावधानी राखैथ। जाहि सँ अहाँक बच्चा अहाँक अपेक्षाक अनुरूप बनए। बच्चाक सब सँ पहिल गुरू माता-पिता होइत छथिन। हिनके आदत आ व्यवहारक अनुकरण बच्चा करैत अछि। ताहि दुवारे माता-पिताकेँ चाही कि बच्चाक सामने अशोभनीय व्यवहार नै करैथ। ने कखनो हुनकर तुलना आन बच्चा सभ सँ करी। बच्चाक रूचिक अनुसार हुनकर दैनिक कार्यक्रम बनाबी अपन रूचि हुनका पर नहिं थोपी। हुनकर मार्गदर्शन करयमे मदद करय लेल अपन बच्चाकेँ विभिन्न रस्ताक पता लगबैकेँ लेल ज्ञान आ संसाधन प्रदान करयकेँ आवश्यकता अछि। हुनकर रूचि आ जुनूनक बारेमे बातचीत करी आ फेर संभावित रोजगार या करियर पथकेँ खोजक लेल प्रोत्साहित करी। पैघ-पैघ होर्डिंग्स, विज्ञापन आ करियर गुरू नब-नब संभावनाक काल्पनिक सागरमे आजुक युवा पीढ़ीक सपनाकेँ एहेन जगतमे लऽ जाइत अछि, जतय हुनकर सभटा महत्वकांक्षा आ सपना पूरा होइत देखाइत छैन्ह। कतेक बेर एहेन देखल गेल अछि कि दू समान योग्यता आ क्षमता राखय वाला व्यक्ति मे एक बेसी सफलता पाबैत अछि आ दोसर कम। दू व्यक्ति एक ही विषयमे समान रूचि राखैत अछि, मुदा एक कम अंक पबैत अछि आ दोसर बेसी। आदित्य एक साॅफ्टवेयर इंजीनियर अछि। ओकर वयस पच्चीस वर्ष अछि, मुदा आब ओ अपन नौकरी छोड़ि कऽ घर आबि गेल अछि आ वापस नौकरी पर नहिं जाय चाहैत अछि।परामर्श सँ पता चलल कि ओ संगीतज्ञ बनए चाहैत छल, मुदा हुनकर पिता अपने इंजीनियर छलखिन, तैं अपन बच्चोकेँ इंजीनियर बनबैकेँ सपना देखने छलखिन। ओ बच्चा अपन पिताक विरोध नहिं कऽ सकल। आब ओ डिप्रेशनमे अछि आ अपन भविष्यक लेल चिंतित अछि। कियैकि हुनका अपन इच्छाक मुताबिक नौकरी नहिं छैन्ह। कतेक बेर माता-पिता अपन बच्चाकेँ अपन इच्छाक अनुसार ओकर करियर तय करैत छथिन जे बिल्कुल गलत अछि। अपन बच्चाक ताकत आ कमजोरीकेँ बारेमे सीखैत हुनकर कौशल, क्षमता आ रूचिकेँ ताकयमे हुनकर मदद करी। अपन बच्चाकेँ सामाजिक रूप सँ स्वीकार्य या बहुत बेसी सैलरी वाला नौकरीक दिस धकेलक बदला हुनकर अपन रूचि या रूझानक हिसाब सँ करियर चुनबाक लेल प्रोत्साहित करबाक चाही। रोजगार, करियरमे उन्नति आदि सँ संबंधित नीक निर्णय लेबयमे हुनकर मार्गदर्शन करी। अपन बच्चाकेँ निरंतर समर्थन आ संसाधन प्रदान करी आ जे ओ तय कयने छथि ओकरा हासिल करयकेँ लेल प्रोत्साहित करैत रहबाक चाही। एकर अतिरिक्त माता-पिताकेँ बेसी संवादात्मक आ चिंतनशील हेबाक आवश्यकता अछि। दबंग होइकेँ बजाय अपन बच्चाकेँ प्रोत्साहित करी। हुनका स्वयं निर्णय लेबयकेँ योग्य बनाबी। ” बच्चाकेँ सगर गाछ पोन ठेल्ला ” नहिं बनाबी। अहाँक बच्चाक भविष्य अहाँक हाथमे अछि , आ ई एक पैघ काज अछि। माता-पिता संग हुनकर दोस्त सेहो बनू।घरमे माता-पिता बच्चाकेँ जीवनक चुनौतीक अहसास दियबैत छथि आ हुनका आत्मनिर्भर बनयकेँ लेल सहयोग करैत छथि। बच्चाकेँ अपन अंदर मौजूद सुंदरता आ जुझारूपनकेँ देखबियौ।
आमतौर पर देखयमे यैह अबैत अछि कि जे बच्चा अपन रूचिक विषय पढ़ैत अछि आ अपन रूचिक अनुसार करियर चुनैत अछि, वैह भविष्यमे आगू बढ़ैत अछि आ जिंदगी सँ प्रसन्न सेहो रहैत अछि।
जय मिथिला, जय मैथिली।

आभा झा
गाजियाबाद