“युवा-युवतीक वैवाहिक जीवनपर आधुनिक शिक्षा के दुष्प्रभाव।”

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— अखिलेश कुमार मिश्र।     

“आधुनिक शिक्षा” कहक तात्पर्य जाहि शिक्षा पद्धति द्वारा वर्तमान में बच्चा सभ स्कूल कॉलेज सँ शिक्षा प्राप्त कs रहल छैथि। इ शिक्षा पद्धति बिल्कुल भौतिकवादी शिक्षा पद्धति अछि जाहि में केवल भौतिक सुख साधन अर्जन करै के तरीका सिखाओल/बताओल जाइत अछि। इ शिक्षा पद्धति अक्षरक ज्ञान, गणित, साहित्य, भूगोल, इतिहास, विज्ञान, कंप्यूटर आ अन्य कें शिक्षा दैत अछि। जाहि में नैतिककता के बोध, सामाजिक आ पारिवारिक दायित्व, राष्ट्रीयता या अहि सभ तरहक अन्य बात बस परिवार आ समाज के भोरोसे छोड़ि देल गेल छै। जेखन शिक्षा प्रणाली में बस भौतिकता मात्र सिखाओल जैत तs ओहि शिक्षा प्रणाली सँ शिक्षित होमय बाला शिक्षार्थी सभ तेहने बनता।
अहि दोषपूर्ण शिक्षाप्रणालीक असर समाजक प्रत्येक क्षेत्र में पड़ि रहल अछि जाहि कारण सँ समाज में अतेक वैमनस्यता आबि चुकल अछि। सभ निहित स्वार्थ कें सर्वोपरि बुझs लागल अछि आ परोपकारक भावना खत्म भेल जा रहल अछि। एहि तरहक भावना सँ युवक-युवतिक वैवाहिक जीवन अछूता नहि रहि रहल अछि। जेखन निजी (व्यक्तिगत) स्वार्थ पारिवारिक स्वार्थ सँ उपर भs जैत तs परिवार में कलह भेनाइ स्वाभाविक अछि। दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति कें चलते सभ में अहंकार बेसी आबि जाइत छै आ सभक तुलना मात्र धन सँ होमय लागै छै।
एहि शिक्षा पद्धति के चलते सभ बेसी सँ बेसी धनोपार्जन करै लेल सभ हथकंडा अपनाबैत छैथि जाहि में नैतिकताक स्थान विलीन भs जाइत अछि। दाम्पत्य जीवन में सेहो पाइ कमाई कें होड़ लागि जाइत छै। सभ बेसी सँ बेसी सुख सुविधा प्राप्त करs चाहैत अछि। पाइ कमाई के चक्कर में पति कतौ तs पत्नी कतौ। दुनू एक दोसरक पूरक नै बुइझ प्रतिद्वंद्वी बनि जाइत छैथि। दुनू नैतिककताक बोधक अभाव के चलते कतेको अनैतिक बात/सम्बन्ध सभ जाने-अनजाने कs लैत छैथि। जाहि सँ दाम्पत्य जीवन छिन्न भिन्न भs जाइत अछि। दुनु अपन अपन कर्तव्य ठीक सँ नहिं निभा पाबैत छैथि जाहि सँ अतेक सामाजिक विकार बढि रहल अछि। अहंकारक चलते अपना आप कें कियो केकरो सँ कम नै बुझैत अछि जे पति-पत्नीक बीच आर दूरी बढ़ा दैत अछि।
समाधान: एहि दोषपूर्ण शिक्षापद्धतिक प्रभाव सँ बचै के लेल तs सभ सँ पहिल काज जे शिक्षापद्धति में ही बदलाव होबाक चाही। छोटे क्लास सँ नैतिक-चारित्रिक शिक्षा पर जोर देबाक चाही। सभ बच्चा कें कर्मठ बनाबै के लेल सैद्धान्तिक शिक्षा सँ बेसी व्यवहारिक शिक्षा/ज्ञान देबाक चाही। स्कूल कॉलेज के अर्थ मात्र क्लास में नीक मार्क्स आनि परीक्षा पास केनाइ नै होबाक चाही। बच्चा सभक माता-पिता कें बच्चा के स्कूल कॉलेज में एडमिशन करा कs निश्चिन्त नहि होबाक चाही। हुनका सभ कें हरदम बच्चा सभ कें अपन परिवार, समाज, राष्ट्र सभ कें उन्नति आ अपन जबाबदेही के बारे सचेत करैत रहक चाही। सभ काज सरकार या सरकारी तंत्र कें भरोसे नै छोड़बाक चाही। बच्चा सभ कें आगामी भविष्य में विवाहोपरांत अपन पति/पत्नी के दायित्व कें बारे में समय समय पर विस्तार सँ बतेबाक चाही सङ्गे ओकरा निभा कs सेहो देखेबाक चाही।
🙏🙏🙏इति🙏🙏🙏