“पहिले जमाना के शिक्षा मे चरित्र आ संस्कारक सर्वोपरि स्थान छल।”

105

— इला झा।         

“ युवा-युवती के वैवाहिक जीवन पर आधुनिक शिक्षाक दुष्प्रभाव”
पति – पत्नि एक दोसराक संग कोना सामंजस्यपूर्ण जिनगी बिताबथि ई शिक्षा कत्तहु नहि भेटैत छैक।मनोविज्ञान सँ एकर तार जुड़ल छैक। युवक-युवती आधुनिक उच्च शिक्षा ग्रहण करैत छथि। उच्च पद पर आसीन छथि। परन्तु विवाहक सभसँ प्रमुख गुण जे पुरूष मे कर्तव्यबोध आओर स्त्री मे समर्पणक भावना अछि से हुनका दुनु मे नहि देखाइ दैत अछि। एक दोसराक के मन सँ स्विकार केनाइ आ एक दोसर के गल्ती केँ माफ केनाइ तकर शिक्षा नहि छनि।
आधुनिक शिक्षा मे सोशल मिडियाक
दुष्प्रभाव बहुत बढ़ि गेल छैक। तरह- तरह ऐपक नवीनीकरण भ’ रहल छैक।
पति-पत्नीक एक दोसराक संग बातचीत नहि होइत छनि। बल्कि दोसरे के गप्प करैत छथि। जाहि सँ तनाव बढ़ि रहल छैक। दुनु एक छत के नीचा रहितहु एक दुसराक सुख-दुख सँ अनभिज्ञ रहैत छथि।
संयुक्त परिवार खत्म भ’ रहल छैक।एकल परिवार देखना जाइत छैक। माय- बाप स्नेह सँ दुनु व्यक्तिक अनबन के सुलह करैत रहथि। एकाकीपन नहि रहैत रहैक। बेसीतर
एकल परिवार मे पति- पत्नी मे सामंजस्य नहि रहैत छैक। झगड़ा सँ संतान प्रभावित होइत अछि।
संस्कार आ अनुशासनक अभाव अछि तकर दुष्परिणाम चारू तरफ व्याप्त अछि। युवा वर्ग के कोनो ध्येय वा लक्ष्य नहि छनि। बेसीतर विवाह शारीरिक सुख लेल करैत छथि। मन भरैत एक दोसराक त्याग करैत छथि। बचपन सँ यदि समुचित शिक्षा नहि भेटतैक त’ पैघ भेला पर कोना सर्वांगीण विकास हेतैक! पैघ भेला पर ऊपर – ऊपर ठीक लगैत छैक, परन्तु अंदर सँ कोनो सुधार नहि होइत छैक।
आधुनिक शिक्षा मे युवा वर्ग भौतिक सुखक पाछू अंधाधुंध भागि रहल छथि। पाश्चात्य सभ्यता के वशीभूत रहैत छथि। गाड़ी, घर आ अनेको ऐश्वर्यक साधन बहुत जल्दी चाही। एकरा पूरा कर’ लेल आपादमस्तक कर्ज मे डुबल रहैत छथि।आर्थिक अभाव सँ वैवाहिक जीवन मे लड़ाई – झगड़ाक सहजहि प्रवेश होइत छैक। दुनु नौकरीपेशा रहैत छथि तैयो असंतोष रहैत छनि। दुनु थाकल रहैत छथि, नौकर चाकर पर पूर्ण रुपेण निर्भर रहैत छथि। जे बना दैत छनि ओहि सँ पेट भरैत छथि। एकर अलावा आधुनिकता मे स्विग्गी, एमेजन आ बहुत तरह के होम डिलीवरी पर आश्रित छथि। आहार – विहारक युवा-युवती ध्यान नहि रखैत छथि। तकर स्वास्थ्य पर भयंकर दुष्प्रभाव होइत छैक।समुचित संतुलित भोजन ठीक समय पर नहि करैत छथि, ताहि सँ उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, पेटक बिमारी सँ बहुत कम उम्र मे ग्रसित होइत छथि। अस्वस्थ रहलासँ वैवाहिक जीवन मे उथल- पुथल अबैत छनि।
एलौपेथिक दवाइ के सेवन बढ़ल छैक। अत्यधिक सेवन शरीर लेल घातक होइत छैक। हमेशा बैसक’ काज केनाइ आ पैदल नहि चलनाइ ताहि सँ शरीरक स्थूलता बढ़ैत छैक। संतान विहिन दंपतिक झगड़ा संग अलगाव देखना जाइत अछि।
एखनुका शिक्षा मे युवा – युवतीक प्राथमिकता नौकरीपेशा भेनाइ छनि। जे नौकरी नहि करैत छथि, अपन घर परिवारक देखभाल करैत छथि। आसपास नौकरीपेशा के देखि तनाव ग्रस्त रहैत छथि। असंतोषक भावना सँ दंपति मे लड़ाई होइत छनि।
एकल परिवार एखन सगरे व्याप्त अछि। ओहो मे संतुलन कहाँ रहि गेल छैक। इंसान एकदम असगर रह’ चाहैत अछि। माय-बाब, भाय- बहिन, अरिजन-परिजन सँ कटिक’ रहैत अछि। मिलीजुली आनंद, स्नेह आ दुखक घड़ी मे एक दोसर लेल ठाढ़ भेनाइ अहि सब अमूल्य घड़ी सँ कटिक’ रहैत छथि। छूट्टी मे माल, बाजार मे खरीदारी, सिनेमा देखि अपन परिवार संग कृत्रिम आनन्द लैत छथि। पत्नी मन माना समान डिलीवरी करबबैत छनि ताहु सँ दाम्पत्य जीवन मे टकराव अबैत छनि। आब भावनात्मक संबंध गौण भेल जा रहल अछि। एखुनका शिक्षा मे व्यवहारिक ज्ञानक अभाव देखैत छी। संकीर्णता बहुत बढ़ि गेल छैक। संबंध के लाभ- हानि मे तौलल जाइत छैक।
युवक-युवती मे नशा जड़ि जमा चुकल छनि। नशीला पदार्थ, सिगरेट, शराब आ मादक पदार्थक सेवन के फैशन बुझैत छथि। मातल रहनाइ हाई सोसाइटीक लक्षण भ’ गेल छैक।संस्कारक पतन तेजी सँ भ’ रहल छैक।नीक बेजाय के ज्ञान नहि रहैत छैक। दुनु के नशा के आदत वैवाहिक जीवन लेल विनाशकारी रहल अछि।
पहिले जमाना के शिक्षा मे चरित्र आ संस्कारक सर्वोपरि स्थान छल। तलाक कम सुनबा मे अबैत छल।आब व्यभिचार बढ़ल जा रहल छैक। पति-पत्नी एक दोसराक संग धोखा करैत छथि। ताहि लेल डेटिंग साइट जिम्मेवार अछि। अहि सँ वैवाहिक जीवन मे मनमुटाव बढ़ैत अछि, तनावक निमंत्रण दैत छथि। अंग्रेजी शिक्षा पद्धति मे भगवान भगवतीक स्थान नहि छन्हि। पूजा पाठक उचित जानकारी नहि छैक आ रूचि सेहो नहि छैक।शिक्षा मे पाश्चात्य शैली के विशेष प्रभाव देखना जा रहल अछि। पूजा-पाठ सँ ईश्वरक भय रहैत छैक। लोक घृणित कुकृत्य सँ बचैत अछि।
एखनुका समाज मे परंपरागत हस्तकला, गीत-गायन, चित्रकला, कढ़ाई, बुनाई इत्यादि हमर सभक संस्कृतिक ह्लास भ’ रहल अछि।आधुनिकीकरण के समावेश बढ़ि रहल छैक।
एखनुका आधुनिक शिक्षा पद्धति मे बुराई संग अच्छाई सेहो देखल जाईत छैक।आब हमर सभक समाज पर ई पूर्ण निर्भर करैत अछि जे हम की ग्रहण करी आ की छोड़ि दी।
इला झा
बैंगलुरू