भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सँ साहित्य धरिक यात्राक यायावर ‘पं. छेदी झा द्विजवर’

विशिष्ट व्यक्तित्व परिचयः पं. छेदी झा ‘द्विजवर’

– प्रवीण नारायण चौधरी

हम सब विद्यालय या महाविद्यालयक कोनो कक्षा मे अपन इतिहास नहि पढि सकलहुँ अछि। एहि कारण जे आत्मशक्ति यथार्थतः हमरा सब मे रहबाक चाही तेकर अकाल स्वाभाविके रूप सँ अछि। ई कहबा मे कोनो संकोच नहि जे अपनहि विभूति केँ हम सब अवहेलना करैत छी, कारण शिक्षा प्रणाली मे जाहि बातक प्रेरणा पहिले भेटक चाही तेकर बदला दोसरे सभक प्रेरणा पढबैत-सिखबैत हमरा सभक मोन केँ अपनहि बात सँ दूर कय दोसराक भक्त बना देल गेल अछि। ‘दोसरा’ सँ हमर तात्पर्य मिथिलाक सभ्यता सँ इतर जे महापुरुष लोकनि भेलाह तिनकर पौरुष ओ पुरुषार्थक उदाहरण त हम सब पढि पबैत छी, धरि मिथिलाक अपन वीर महापुरुष लोकनि जे भेलाह तिनका ऊपर लेखन कार्य ओ इतिहासकार अरुचि या उदासीनता आ शिक्षा तंत्र मे गैर-आवश्यकताक चलतबे आइ ई बेहाली हमरा सभक अछि। तथापि, धन्यवाद करी डा. लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्वत समान मैथिलीपुत्र सभ पर जे कम सँ कम अपन लोकसंस्कृति पर कोश उपलब्ध कराकय किछु हद तक एहि कमजोरी केँ दूर करबाक प्रयत्न कयलनि। लेकिन डा. श्रीवास्तव व अन्य मिथिला इतिहासकार केर कृत्ति केँ हमरा लोकनि कतेक पढैत छी ई स्वतः जानय योग्य विषय छैक। आइ जे हमरा लोकनि मिथिलाक हेराइत पहिचान केँ बचेबाक बात करैत छी, मिथिलावाद केर पोषण करबाक बात कहैत छी, ताहि मे ई सर्वप्रथम बुझल जाय जे यावत् अपन निजत्वक बोध हम सब नहि कय सकब, ताबत् हमरा लोकनिक उपयोगिता सिर्फ दोसरहि लेल रहत। यानि, हमरा सभक मानसिकता मे गुलामी करब – चाकरी करब – यैह टा नियत आ नियति दुनू बनत। समय-समयपर गोटेक व्यक्तित्वक योगदान हमरा बहुत प्रभावित करयवला बुझाइत अछि। एहि क्रम मे एक महान् व्यक्तित्व पंडित छेदी झा ‘द्विजवर’ केर बारे डा. श्रीवास्तवक कोश सँ जे जनतब भेटल अछि से एतय राखि रहल छी।

छेदी झा ‘द्विजवर’

पंडित छेदी झा केर जन्म १८९२ ई. मे बनगाँव (सहरसा) मे भेल छलन्हि। हुनक विद्वताक कारण हुनका द्विजवर केर सम्मानजनक उपाधि सँ दरभंगा महारा सम्मानित कएने छलाह। पं. झा अपन मातृभाषा मैथिली सहित बंगला, अंग्रेजी, उर्दू तथा हिन्दी भाषाक सेहो विद्वान् छलाह। साहित्य-सर्जना आ मिथिलाक गौरव वृद्धि मे ओ आजीवन संलग्न रहलाह।

भारतीय स्वतंत्रताक ई अजेय योद्धा केँ एक बेर मधेपुरा मे अंग्रेज अधिकारी द्वारा कोर्ट परिसर मे डंटा-बेड़ी मे गछाड़िकय तप्त दुपहरियाक रौद मे छोड़ि देल गेल छल। तखनहुँ ओ नरम नहि पड़लाह। अपन बान्हल पैर केँ फड़का-फड़का ओ गबैत रहला – ‘जुत्ताक ठोकर सँ लंदन हिलेबौ, रे गोरा सरकार हम तोरा भगेबौ’। एहि नैष्ठिक देशभक्त केर घर मे अंग्रेज द्वारा आगि लगा देल गेल, संपत्ति सब जप्त कय लेल गेल। ओ आजीवन गामक बाहर एकटा पोखरिक किनार पर झोपड़ी मे समय बितौलनि।

हिनक प्रकाशित कृत्ति सब अछि – ‘मिथिला भाषा – कुंठार’ (१९१०-११ ई.), ‘नरसिंह ‍- पद्यावली; ‘कोइली दूती’ (१९२३ ई.), ‘द्विजवरशतक’ (१९५५ ई.), एकर अलावे हिनक अप्रकाशित कृत्ति सेहो अछि –

‘ऊर्मिला’ (उपन्यास); ‘स्वानुभूति’ (पद्य); ‘साहित्य शतदल’ (पद्य); ‘मैथिली गीतकुसुम’ (पद्य); ‘ननदि-विनोद’ (पद्य); ‘अमर-संगीत’, तथा ‘मैथिली व्याकरण’। ‘सीतायन’ महाकाव्य सेहो अप्रकाशित छन्हि।

श्री द्विजवर मिथिलाक सांस्कृतिक चेतनाक प्राणसम छलाह। ‘दि हिस्ट्री अफ सहरसा डिस्ट्रिक्ट’ हुनक प्रकाशित गौरव ग्रन्थ अछि, जे जनपदीय सांस्कृतिक गवेषणाक श्रेष्ठ कृत्ति मानल जाएत अछि।

द्विजवरजी साहित्यसेवी हेबाक कारण सामाजिक निष्ठा एवं राजनीति मे स्तरीय चेतना विकसित देखय चाहैत छलाह। काँग्रेसक कुनीति सँ हुनका एहेन विरक्ति भेलनि जे ओ अपन प्राथमिक सदस्यता तक सँ त्यागपत्र दय ‘भारतीय जनसंघ’ पार्टीक सदस्यता लय लेलनि आर १९६४ ई. मे भेल सहरसा संसदीय उपचुनाव मे पार्टीक उम्मीदवार सेहो भेलाह।

बनगाँव निवासी संस्कृतक प्रकांड विद्वान् तथा स्वतंत्रता सेनानी पं. बलदेव मिश्र हिनक घनिष्ट मित्र छलाह। बिहार केर प्रथम काँग्रेस सरकार द्वारा द्विजवरजीक विपन्न दशा देखिकय क्षतिपूर्तिक रूप मे कतेको हजार टकाक चेक पठायल गेल, मुदा स्वाभिमानी ‘द्विजवर’ ओ ई कहिकय लय सँ अस्वीकार कय देलनि जे ‘देशभक्ति केर कोनो दाम होएत छैक कि?’ १९९० केर दशक हुनक देहावसान भऽ गेलनि।

निष्कर्षः

ई गाथा डा. लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव द्वारा लिखल बिहार लोक संस्कृति कोश (मिथिला खंड) मे पढिकय एतेक नीक लागल जे सोचलहुँ एहेन महान व्यक्तित्वक परिचय मैथिली जिन्दाबाद मार्फत सेहो उपलब्ध कराबी आ संगहि एकटा प्रेरणा हमरा-अहाँ केँ ई भेटक चाही जे विगत कइएक दशक सँ अपन मिथिला समाज केर महान व्यक्तित्व लोकनिक परिचय संकलन, हुनका लोकनिक समाज, राज्य आ राष्ट्र प्रति योगदान – इत्यादिक कोनो महत्वपूर्ण कार्य नहि कयल जा रहल अछि। उल्टा समाज केँ ई समसामयिक राजनीति विखंडित कय मिथिलाक मूल मौलिकता सँ दूर करैत गेल अछि। एहि दिशा मे सेहो हमरा सभक उचित ध्यान जाय आर अपना-अपना तरहें व्यक्तित्व सभक परिचय पर लेखादिक संकलन करैत प्रकाशन केँ निरन्तरता दी। एहि लेख सँ ई प्रेरणा सब केँ भेटय।

हरिः हरः!!