दहेज प्रथाक प्रश्रय सम्पन्न वर्ग द्वारा – देखादेखी सब वर्ग भेल रोगग्रस्त

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

दहेज प्रथाक बढावा देनिहार के?

सच्चाई ई छैक जे दहेज प्रथा मिथिला मे उच्च-सम्भ्रान्त कहेनिहार आडंबरी लोकक किरदानी सँ आइ पूरे समाज मे कोढि-कुष्ठी जेकाँ पसैर गेल अछि। अगबे नगदी व्यवस्था आ कि गाड़ी-घोड़ा, साँठ-सूँठ आ कि गहना-गुड़िया, टीवी, सूट, साड़ी, सन्दूक, पलंग, फ्रीज या फल्लाँ-चिल्लाँक मांगहि टा दहेज नहि – आवश्यकता सँ बहुत अधिक भेड़िया धँसान बरियाती, ओकादि सँ फाजिल भारी-भरकम पंडाल आ साज-सज्जा, जयमाल आदि जोड़ुआ विध वास्ते खास इलेक्ट्रानिक संयंत्र सभ, बैण्ड बाजा, भाड़ावला गाड़ीक लाइन बरियाती आनय लेल, रसगुल्ला-पैन्तुआक अलावे १०-२० गो खस्सी कटबाक मांग, क्विन्टल-क्विन्टल माछ आ भोज‍‍-भातक नवका आडंबरी फैशन मे विवाह पूर्वहि सरियाती सब केँ सबजाना नोत आदि अनेक खर्चीला व्यवस्था सँ आइ मिथिला समाज त्राहि-त्राहि कय रहल अछि। फल्लाँक विवाह मे एना भेलैक, आब हमर बेटा-बेटीक विवाह मे एना नहि हेतैक त केहेन लगतैक…. कतेक रंगक बात। ई बीमारी यथार्थतः पाइ-कौड़ी सँ सम्पन्न लोक आगू भऽ कय करैत अछि आर देखादेखी एहि आडंबर मे आन-आन लोक सब फँसैत चलि जाएछ – आर ई परंपराक रूप पकड़ि लैत छैक। एक अत्यन्त साधारण विवाह मे बड मामूली खर्चा हेतैक त ५ लाख टका भारू – १० लाख टका मोरू! आर ई सब पैसा चलि जेतैक लंफ-लंफा मे बनियाँक दोकान मे। न त एहि सँ कोनो लड़का केँ लाभ हेतैक, नहिये कोनो लड़की केँ! नोक्सान – प्रत्यक्ष नोक्सान! तखन लाभ मे लाभ एतबा जे कनी समय लेल फूटानी झाड़य मे – ई देखाबटी आडंबरी व्यवहार सहयोगी सिद्ध हेतैक। बाकी ए वेरी बिग जीरो!

आदर्श सिद्धान्त – दहेज मुक्त मिथिला – एहि सब तरहक आडंबरक विरोध करैत अछि। वैवाहिक संबंध त दुइ आत्मा केर मिलन हेतु एकटा वैदिक विध – सामाजिक परिकल्पना केँ साकार करैत हृष्ट-पुष्ट आ उपयोगी सन्तान उत्पत्ति केर अधिकार प्राप्त करब होएत छैक। ई आडंबर केर सार्थक प्रभावक बदला नकारात्मक प्रभाव जरुर पड़तैक। आडंबर मे कनिको कमजोरी अभरला स दुइ आत्माक मिलन मे २५ तरहक झंझटि अभरबे टा करतैक। विवाहोपरान्त अन्तर्कलह बढब स्वाभाविक होएत छैक एहेन देखाबाक संसार मे। प्राकृतिक सिनेह आ मजबूत गठबंधन त एकदम्मे नहि बनि सकैत छैक। तखन एहि झूठ आ मिथ्याचारी दंभी व्यवहार केँ अपनेबाक कार्य यदि हम सब आर्थिक रूप सँ सबल आ सक्षम लोक करैत छी त अपना सँ कमजोर आ निम्नवर्ग लेल समस्याक पहाड़ ठाढ करबाक पापाचार कतहु न कतहु जरुर केलहुँ एहि पर मनन करब।

स्थिति मे बदलाव लेल किछु नीक लोक जरुर समाजक आडंबरी – दंभी रीतक सोझाँ ठेहुनियां रोपिकय अपन आदर्श केँ कोहुना निर्वाह कय रहल अछि…. एहेन किछेक लोक भेटैत छथि जे मिथिला समाज मे एहि कूप्रथाक विरोध शुरुए सँ केलनि। एक दिशि लोक द्वारा दहेजक साँठ देखेबाक दंभी परम्परा – मुदा दोसर दिशि आदर्श निर्वाह कयनिहार सेहो टन्ना-दुक्खा…. तथापि किछु त एहेन शक्ति छैक जे एकरा निरन्तर जियौने अछि…. के अछि ओ….? ओ छथि हमरा-अहाँ समाजक एहेन आदर्श चरित्र प्रस्तुत कयनिहार सादा व्यक्तित्व जिनका संसारक देखाबा सँ कोनो लेना-देना नहि छैक। ओ जे विवाह जेहेन पवित्र सम्बन्ध केँ अत्यन्त सादगीपूर्ण ढंग सँ पूरा कय दुइ आत्मा केँ एक शरीर बनि मानवक एहि दुनिया केर हित लेल नव पीढीक आगमन चाहैत अछि। ओ जेकरा समाजक फालतू उल्हन-उपराग आ आडंबरी व्यवहार लेल तरह-तरह केर उपहास सब सँ कोनो फर्क नहि पड़ैत छैक। हलाँकि अपन मिथिला समाज मे आइ आडंबरी व्यवहार कयनिहारक प्रदर्शनकारी चरित्र कनी देर लेल बड सोहनगर लगैत छैक, मुदा दीर्घकाल मे ओहि लोभी-लालचीक असलियत सारा संसार उपहास करैत स्पष्ट होएत छैक। अतः जरुरत छैक जे एहेन आदर्शवान् महापुरुष सब जे दहेज प्रथाक त्याग करैत छथि, जे सादा-सादी विवाह जेहेन सम्बन्ध केँ प्रोत्साहित करैत छथि – ओ यथार्थतः यशगान करय योग्य छथि।

मिथिलाक दुइ उच्च श्रेणीक समाज – श्रोत्रिय ब्राह्मण तथा कर्ण कायस्थ समुदाय मे आइ धरि दहेज प्रथाक कमोवेश प्रतिकार स्पष्ट अछि। कहबाक जरुरत नहि, एहि समुदाय केर नव पीढी मे कुशाग्रता, विद्या, बौद्धिक बल आ पौरुष कोनो आन समाज सँ बहुत बेसी रहैत छैक। अतः माँगरूपी दहेजक प्रतिकार करबाक लेल युवा सँ लैत सब उम्रक महिला-पुरुष द्वारा एहि कूप्रथाक विरुद्ध घृणा उपजब, समाज मे बदनामी होयबाक स्थिति बनब बहुत आवश्यक अछि। आब त बिहार सरकार सेहो एकरा वास्ते राज्य प्रायोजित कार्यक्रमक तहत विरोध कार्यक्रम सब करा रहल अछि। तथापि जँ लोभी-पापी कियो समाज केँ प्रदूषित करैत अछि त अन्य दहेज मुक्त व्यक्ति, संस्था या समाज द्वारा ओकरा ऊपर सख्त सँ सख्त कार्रबाई करब वांछित अछि।