विचार
– प्रवीण नारायण चौधरी
प्रवीणक जन्मदिन पर……
अपने समस्त शुभेच्छु सज्जनवृन्द ओ मातृस्वरूपा दीदी-बहिन, मित्र, परिचित, स्वजन, परिजन आदिक शुभकामना सन्देश वास्तव मे ‘आशीर्वाद’ रूप मे प्राप्त भेल । हम हृदय सँ सब गोटे केँ पुनः प्रणाम (यथोचित अभिवादन) करैत कृतज्ञता ज्ञापित करैत छी । ईश्वर केर कृपा सँ एतेक रास शुभेच्छु हमरा भेटल छी, हमरा लेल यैह मूल सम्बल थिक ।काल्हि हमर कोशिश रहल जे एक-एक व्यक्ति जे सन्देश पठा रहल छथि, हुनका सँ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करी, हुनका मोन पाड़ी, हुनका लेल सेहो प्रार्थना करी आर पुरुषार्थ आर्जनक सर्वसुलभ माध्यम – सीधा संवाद मार्फत विशेष आशीर्वाद प्राप्त करी ।
ओ जे कथा छलैक – ज्योतिष कहि देलखिन जे फल्लाँ दिन धरि और्दा अछि, त लेलहा बुझलक जे आब आइ अन्तिमे दिन छी त चली सब केँ प्रणाम कय ली – से कयलक आ ओकर और्दा अक्खा बढ़ि गेलैक । बिल्कुल तहिना – हम जतेक गोटे केँ प्रणाम करी, त लेलहा वला कथा मोन पड़य आ बुझी जे चलू, हिनको आशीर्वाद भेटि गेल, सब नीके करता परमात्मा ।
दिन बड नीक सँ बीतल । काल्हि ‘वर्षकृत्य’ सँ ‘जन्मदिनकृत्यम्’ केर संस्कृत टीका सहितक विधान पढ़बो कयलहुँ आ सम्पादित लेख मूल संस्कृतहि मे पोस्ट कयलहुँ । ताहि सँ ई भेल जे विधिवत् कर्मकांडीय कृत्य त नहि कय सकलहुँ, मुदा मानसिक रूप सँ ओहि समस्त देवता लोकनि केँ सुमिरन कयलहुँ । विधानतः जन्मदिन पर ‘केक’ काटयवला क्रिश्चियन पद्धतिक बदला अपन मूल कृत्यम् (विशेष उपासना) पर ध्यान गेल, ध्यान आरो लोकक आबय से स्वाध्यायक ओहि लेख केँ अपने सब सँ साझा कयलहुँ । मैथिली जिन्दाबाद वेब पत्रिका पर सेहो प्रकाशित भेल । जीवनक उपलब्धि भेल बुझू ।
हम सोचैत रही – ५४ वर्ष बितला पर ई दृष्टि हमरा प्राप्त भेल । जँ हमर समाज मे अपन मौलिक अनुष्ठानक कृति परम्परागत ढंग सँ जिबैत रहैत तँ आइ जे क्रिश्चियन शैली बेस प्रचलित भेल अछि, से किन्नहुं नहि होइतय । हमरा किछु विशेष बात सब बुझय मे आयल – जे विन्दुवार अपने सब सँ साझा करैत छीः
१. कर्मकांड प्रति उदासीनता बढ़नाय एकदम भयावह अछि, लोक अपन चीज छोड़ि विदेशिया शैली (परधर्म जेकरा भयावह कहल गेल छैक से) अपना रहल अछि ।
२. कर्मकांडीय पद्धति मनुष्य जीवनक प्राथमिक पाठशाला जेकाँ होइछ । शुद्धीकरण लेल एहि सँ नीक आन कोनो उपाय नहि छैक । बच्चे सँ यदि अहाँ कर्मकांडीय शैली केँ अनुकरण नहि करब, तँ बहकबाक सम्भावना तय अछि ।
३. मिथिलाक पौरोहित्य (पांडित्य) आ जीवनपद्धति मे बेस स्खलन आबि गेल अछि । शायद हम सब अन्तिम पीढ़ी छी जे पद्धति केँ मोन पाड़ैत एकरा पुनर्जीवन देबाक लेल आतुर छी । पता नहि, हमरा सभक ऐगला पीढ़ी एहि दिशा मे कतेक डेग उठायत, महत्वो बुझत कि नहि, किछु नहि कहल जा सकैछ ।
४. आइ-काल्हि जे-जतेक पुरहित सब पूजा-पाठ कराबय अबैत छथि, ओ स्वयं अज्ञान आ विधि-विधानक महत्व सँ अनजान रहैत छथि । न पाठ करबाक लुइर, न वाचनक वैयाकरणिक ओ छन्द-निरुक्तक जानकारी (अध्ययन), आ न सही ढंग सँ पद्धतिक संकलन-संरक्षण – कहू जँ आचार्ये अलुइर त फेर साधक-उपासकक कि हाल होयत ?
५. जन्मदिनकृत्यम् मे गौर कय केँ देखल जे अपन जन्मदिन पर आत्मीयता सँ कोन-कोन देवी-देवताक आराधना कयल जाइछ आ तेकर पाछाँ कि-केहेन उद्देश्य रहैत छैक । भेटल ई जे पंचदेव, विष्णु, गणेश, सूर्य, नवग्रह, गौर्यादिषोडशमातृ, कुलदेवता, गुरु, अग्नि, विप्र, मातृ (माय), पितृ (पिता), शिव, शंभू, प्रीति, सन्नत, भद्रा, अनसूया, क्षमा, इन्द्र, यम, निर्ऋत, वरुण, वायु, धनद्, ईशान, अनन्त, ब्रह्मण, षष्ठिदेवी, प्रद्युम्न, जन्म-नक्षत्र, जन्म-राशि, जन्म-तिथि, जन्म-वासर, जन्म-पक्ष, जन्म-लग्न, जन्म-संवत्सर, जन्म-ऋतु, जन्म-युग, जन्म-मास, जन्म-मुहूर्त, जन्म-योग, जन्म-अयन, जन्म-करण, जन्म-समय, जन्म-अनुसूया आदिक बाद अष्टचिरंजीव लोकनि – यथा अश्वत्थामा, बलराम, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम, मार्कण्डेय, कुशादिकमादाय, जीवितमत्स्यमादाय तथा ब्राह्मण ।
६. गौर करू, मनुष्य रूप मे जीवन भेटब दुर्लभ मानल गेल अछि तथा उपरोक्त जतेक देवी-देवता, माता-पिता, गुरु, तेज, पंचतत्त्व आदिक संग हविष्य आ हवन करबाक विधान जन्मदिनकृत्य मे वर्णित अछि, ई सबटा जीवनसंवर्द्धन हेतु अभीष्ट शक्ति-सामर्थ्य, सुख-शान्ति लेल परमानिवार्य अछि ।
७. परञ्च, पांडित्यक यथार्थभाव सँ दूराव बढ़बाक-बढ़ेबाक कारण लोक एकर महत्व सँ अनभिज्ञ भ’ विदेशिया शैली मे आकंठ डूबि रहल अछि । एहि मे हम दोसर केँ दोषी नहि कहि रहल छी, स्वयं सेहो सहजताक चक्कर मे अपन मूल कर्मकांड सँ दूर भ’ अपने सँ अपन आत्मशक्ति केँ कमजोर कय रहल छी ।
ई गोटेक बात काल्हि सँ दिमाग मे उचैर रहल अछि । हम अपन ध्यान केँ आर केन्द्रित कय रहल छी । ५४ वर्षक आयु मे बहुत किछु पैछले रोटी खेबा जेकाँ खौकार बनितो कोशिश मे छी जे अपन मौलिक धर्म पर एहिना इजोत पसारैत रही । बाकी जीवन सेहो एहि तरहक स्वाध्याय व लेखन-प्रकाशन मे बिति जाय । बेसी किछु नहि चाही आब !
हरिः एव हरः!!
