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हिन्दी सँ मैथिली मे अनुदित लघुकथा संकलन ‘आमक दू कतरा’

12 भ्यूज

– पुस्तक समीक्षा – डॉ. अनमोल झा

श्रीमती मिन्नी मिश्रा द्वारा एहि पोथीक अनुवाद कयल गेल अछि । अनुवाद हिन्दीक ५७ गोट विभिन्न आ प्रसिद्ध लघुकथाकारक लघुकथा सभ अछि । मिन्नी मिश्रा स्वयं हिन्दीक प्रतिष्ठित लघुकथा लेखिका छथि । हिन्दीक संगे संग ई मैथिली लघुकथा क क्षेत्र मे सेहो अपन महत्वपूर्ण स्थान बना लेने छथि । हिनक कतेको मैथिली लघुकथा कें हम समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिका सभ मे प्रकाशित / संपादीत केने छी ।

प्रस्तुत पोथी मे ५६ विभिन्न लेखक संग मिन्नी जी क ४ गोट हिन्दीक लघुकथाक अनुवादक अतिरिक्त भावनाथ झा, कान्ता रॉयक भूमिका आ लेखिकाक अपन बात अछि ।

एहि सभ मे लघुकथा कें संगे-संग बीहनि कथाक चर्चा भेल अछि । एहि लेल हम अपन कतेको आलेख मे आ कतेको व्याख्यान मे स्पष्ट रूप मे कहने छी आ एखनो कहि रहल छी जे मैथिली लघुकथा एक स्वतंत्र आ मैथिली मे स्थापित विधाक रुप मे स्थापित अछि । एकरा आन कोनो नामक आवश्यकता नहि अछि । एकर पर्याप्त मात्रा मे लघुकथा संग्रह प्रकाशित भेल अछि आ भ’ रहल अछि, शोध सेहो भेल अछि । विश्वविद्यालय सँ एहि पर पीएचडी भेल अछि । विभिन्न पत्र-पत्रिका क लघुकथा विशेषांक प्रकाशित भ’ चुकल अछि, भ’ रहल अछि तखन ई सभ जे कियो कहैत छथि वा लिखैत छथि ई हुनकर स्वतंत्र विचार छनि, अपन व्यक्तिगत मान्यता छनि सर्वमान्य नहि । जे हो हमरा एखन एहि मे अनुवादित लघुकथा पर बात करबाक अछि ।

लघुकथाक अनुवाद नीक भेल अछि । बहुत लघुकथाक त एतेक नीक अनुवाद भेल अछि जे मैथिलीक मौलिक सन लगैत अछि । मुदा बहुत लघुकथा मे अनेक शब्द एहन अछि जकर मैथिली शब्द उपलब्ध अछि । यथा – तरफ, सजदा, और, सड़क, जुनून, बुदबुदाहट आदि ।

लेखिका अपन मोनक बात मे अनुवाद कार्य मे जे गोटे सहयोग केलकनि तकरा स्मरण करैत एकठाम लिखैत छथि –

दोसर नाम, ख्यातिप्राप्त साहित्यकार आदरणीय मनोज कर्ण क छन्हि । ई हिन्दी लघुकथा लिखबाक संग मैथिलीमे ‘बीहनि कथा’ लिखबाक लेल खूब प्रसिद्ध छनि । अनुवाद करबाक काल हमरा कखनो … किछु फुराइते नहि रहैत छले जे एहि टिपिकल हिन्दी शब्दक मैथिलीमे कोना लिखु, जाहिसँ एकर ज्योंक त्यों भाव बनल रहय ! तखन हम मनोजजीसँ पूछि लैत छलिएन्हि । ओ सहजतासँ बता दैत छलाह । ओ हमर फेसबुक मित्र छथि । मनोज कर्ण भाईक हृदयसँ आभार ।

तकर बादो एतेक रास बात जे एहि संग्रह मे नहि हेबाक चाही से सभ भेल अछि । तें कहल जाइत छैक परामर्श ओकरा संग ली जे ओकर ज्ञाता होइथ । हमरा नहि बुझल अछि जे ओ हिन्दी सँ या मैथिली सँ एम.ए., नेट, पी-एच. डी. केने छथि । वा ई नहि होइत छैक यैह सभ केला पर लोग विद्वान होइत अछि, जानकार होइत अछि एकर अलावा स्व अध्याय सँ सेहो विद्वान भ’ जाइत अछि से कोन दृष्टि सँ मिन्नी जी के ई सलाहकार भेटलनि आ हुनक जे सहजता सँ बतेलहा अन्य भाषाक शब्द जे मैथिली मे नीक जकां उपलब्ध अछि जे शब्द सभ नहि द ओ देल गेल निश्चित रूप सँ मैथिली लघुकथा संग्रहक अनुवाद लेल नीक नहि थिक । ओहि तरहक अनेक शब्द अछि जाहि मे सँ किछुये मात्र हम उदाहरण स्वरूप उपर देल अछि ।

किछु आओर बात करी त प्रूफ के आओर एक आध बेर देखबाक आवश्यकता छल । अनेक ठामक शब्द ने हिन्दी क रहल आ नहि मैथिलीक । दूध लघुकथा मे दूधक तौलाक बात करैत छथि, पता नहि ई वाक्य लेखिका छीयनि की परामर्शदाताक ? हम सब दहीक लेल तौला, कस्तारा, मटकुरी सभ सुनने छी देखने छी मुदा दूधक तौला होइत पहिले पहिल बुझल‌ ।

कोठालीक दरवाजा, हमार हक, शब्द सभ पर ध्यान देबाक आवश्यकता छल ।
एकटा हिन्दीक लघुकथा अछि राजकुमार घोटड़क जे अनुक्रम ३९ पर अछि आ पृष्ठ संख्या ७८ पर ‘ पोस्टकार्ड’ शीर्षक सँ अछि । एकर लेखक हमरा जनैत राजकुमार घोटड़ नहि रामकुमार घोटड़ छथि । तैं प्रूफ देखबाक आवश्यकताक बात कहल । एहि तरहे एकटा लेखकक रचना क भविष्य में दोसर नामक लेखखक रचना हेबाक बात पुष्टि करैत अछि । जे नहि हेबाक चाही ।

एहि पोस्टकार्ड शीर्षक लघुकथा पर चर्चा करै सँ पहिले हम चाहब जे प्राय: बीस बरख पूर्व हमर लिखल मैथिली लघुकथा ‘ टेक्नोलॉजी ‘ अछि तकरा एकबेर देखल जा सकैछ –

मैथिली लघुकथा – टेक्नोलॉजी

डॉ. अनमोल झा

– पाइ कथी सॅं पठेलियैन बाबूकऽ ।

– कथि सऽ पठेबैन । आब पहिलुका जमाना नै रहलै जे बीमा करु, ड्राफ बनाउ, रजिस्ट्री करु वा ककरो हथौटिये पठाउ । आब तऽ नवका-नवका टेक्नोलॉजी एलैहे । कोर बैकिंग मे एतय बाबूक’ एकाउंट में जमा कऽ देलियै, ओतय संगे संग हुनका खाता मे पाई जमा भऽ गेलैन ।

– यैह! यैह ने मूर्खपना भेल । पाइ आब जहिया पठेबै गाम अहाँ, से मनीआडरे द्वारा !

– किए, से किए, ओहि मे तऽ बड़ समय लगै छै पहुंचैमे, आ कमीसनो पाँच रुपये सैकड़ ।

– से जे लगै। जखन डाक बाबू पाइ देमय जेतनि बाबूक, आ एक – दू गोटाक गबाही राखि पाइ देतनि तऽ गामक लोक तऽ बुझतै जे बेटा – पुतोहु पाइ पठेलकैहे । बुढ़बा के छोड़ि नै देने छै ओहिना ……हँ…..!!

आब एहि पोथी मे अनुवाद भेल लघुकथा पोस्टकार्ड के देखूं

राजकुमार घोटड़
राजस्थान
मो. 9414086800

पोस्टकार्ड

” बेर – बेर चिट्ठी लिखबाक बदला बाबूजीक अहाँ एकटा मोबाइल दिया दितियनि ।”

” अहाँ बुझते नहि छी …” पति हुनका बुझाबए लगलथि,

” पोस्टकार्ड गेलासँ गामक डाकिया आ’ आस-पड़ोस सभ लोक बुझि जाइत अछि जे बेटा, पुतहु अखनि धरि बूढ़ाक नहिं बिसरलथिहे । शहर मे रहितो ओ, चिट्ठी – पतरीसँ सभटा कुशल-क्षेम लैत रहैत छथि ।
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आब अहाँ सभ हमर लघुकथा ई नीचाक लघुकथा पढ़ि क अन्दाज लगा सकैत छी जे एक भाषाक लघुकथाक अनुवाद दोसर भाषा मे भेला सँ ओहि सँ प्रभावित भ’ लोक अपन भाषा मे मौलिक रचना करैत अछि तकर ई प्रत्यक्ष उदाहरण अछि जे हमर एहि मैथिली लघुकथा क जे अनुवाद बहुत पहिले हिन्दी मे भेल छल आ ई डॉ. राम कुमार के हम पठेने छीयनि ताहि सँ प्रभावित भ ओ हिन्दी मे हमरे जकाँ लघुकथा लिखलन्हि से उपर देखल ।

ओ राजकुमार घोटड़ नहि, डॉ. रामकुमार घोटड़ छथि, हुनका हम १९९२ ई. मे जखन हम रा.ना. सुधाकर जीहमरा एक कथा गोष्ठी मे भेटलाह आ ओ कहलनि जे अहाँ कहानी लेखन महाविद्यालय, अम्बाला छावनी मे नाम लिखाउ आ हम जखन ओतय नाम लिखाओल त ओतय सँ हमरा उपहार स्वरुप डॉ. रामकुमार घोटड़ जीक हिन्दी लघुकथा संग्रह ओत सँ पठाओल गेल छल । ओ लघुकथा संग्रह हमरा लग एखनो अछि । से हम हुनका हम जनैत छीयनि ओ एम.बी.बी.एम. डाक्टर स्त्री रोग विशेषज्ञ छथि । हिन्दी लघुकथा मे पर्याप्त लघुकथा संग्रह प्रकाशित छनि, कतेको भारतीय भाषा मे ओहि संग्रहक अनुवाद सेहो भेल अछि । एखन ओ अवकाश प्राप्त छथि । हिनका संग हमरा अपन पीएचडी शोधक समय खूब बातचीत भेल अछि । कोलकाता मे पोरका साल भेट सेहो अछि । जखन ओ अपन लघुकथा गलत नाम सँ छपल देखता त ई लेखक क बाद मे जाहि भाषा मे अनुवाद कार्य भेल अछि तकर बदनामी होयत ।

एहि सभ पर अनुवाद करै काल, प्रूफ देखै काल आदि विशेष रूप सँ ध्यान रखबाक अनुवाद मे होइत अछि ।

मैथिली लघुकथाक अपन मौलिक संग्रह बहुत अछि । अनुवाद सँ आयल संग्रह बहुत कमी की नहिये अछि । छीटफूट अन्य भाषाक लघुकथाक अनुवाद कतहुं कतहुं मैथिली मे देखल जाइछ । मुदा पुस्तक रूप मे अनुवादित लघुकथा संग्रह ई हमरा जनैत पहिले छी । ई श्रेय मिन्नी मिश्रा लेलनि ताहि लेल बहुत बहुत बधाइ एवं शुभकामना दैत छीयनि ।

एहि मे दुधारू गाय दीपक गिरकर, एक छिट्टा तरकारी पवन जैन, पेंशन पूर्णिमा शर्मा, रुकल पंखा बलराम अग्रवाल, द्रोणाचार्य जिबैत छथि रतनकुमार सांभरिया, पोस्टकार्ड डाॅ. रामकुमार घोटड़़, कोना कहु? संतोष सुपेकर, पाठ सुकेश साहनी, दुखीत सुभाष नीरव, (खेतक पीड़ा, आमक दू कतरा मिन्नी मिश्रा) लघुकथा सभ नीक लघुकथा सभ अछि आ नीक अनुवाद सेहो भेल अछि ।

मैथिली लघुकथा साहित्य अनुवादक मिन्नी मिश्रा सँ अपेक्षा रखैत अछि जे फेर आरो अन्य भाषाक लघुकथाक, उपर कहल गेल बात सभकें ध्यान मे रखैत जल्दी सँ अनुवाद करथि आ मैथिली लघुकथा मे अनुवाद विधाक भरथि । धन्यवाद ।

डॉ. अनमोल झा
कोलकाता
दिनांक : 06.09.2026

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