लेख विचार
प्रेषित: पीतांबरी देवी
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार , वृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : सिनुर केर महत्व
सिंन्दूर एकटा जीवनक बहुत पैघ बंधन अछि।जीवन मे अहिबात सन बस्तु कोनो नहि अछि। महिला के दू गोत्र, दू मूल ,दू जान, दू परिवार,के आपस मे मिला दैत अछि।सिंन्दूर एकटा बहुत कसगर गांठ छी पति पत्नी के जोड़ै बला संगम अछि। महिला के तँ एक चूटकी सिंन्दूर सौंथ मे परि जाइत छनि तऽ जीवने बदलि जाइत छनि।अपन जन्म से जे मूल , गोत्र, नाम, गाम, घर ,आंगन,छलनि ओ सिन्दूर सौंथ मे परिते देरी नया मूल,गोत्र,नाम,गाम,घर, आंगन,सबटा बदलि जाइत छनि।नया परिवेश मे प्रवेश करैत छथि। एके दिन मे नेना से व्यस्क भय जाइत छथि।नया परिवेश मे अपना के ढ़ालवाक सदत प्रयास रहैत छनि ।आर धिरे धिरे ओहि परिवेश मे अपना के एतेक घुला मिला लैत छथि जे अपन बालपन के बिसरि जाइत छथि। महिला के सिंन्दूर एकटा सिंगार टा नहि छयै हुनकर एकटा जीवन छियनि । सिन्दूर एकटा प्रमाण पत्र छियै वंश बढ़ेवाक लेल बिना विवाह के वाल-बच्चा जाईज नहि मानल जाइत अछि । विवाह भेल अपना सब के मिथिला मे तँ सिंन्दूर दान भेल ।ओकर बाद पति पत्नी के बाल-बच्चा भेलनि ते जायज भेल। पत्नी के सिन्दूर जीवनक आधार छियै।फाटलो नूआ रहौ वा केहनो गरीबी रहौ एक चूटकी सौंथ मे सिंन्दूर माथ मे टीकुली रहैत छैक ते एकटा बहुत पैघ स्वाबलंबन बनल रहैत छैक।ओकरा सबठाम मान सम्मान भेटैत छैक ।पति केहनो सराबी- जूआरी रहैत छथिन घर परिवार पर ध्यान नहि दैत छथिन तैयो माथ मे सिंन्दूर रहला पर शक्ति बनल रहैत छैक । पति के ताकत बनल रहैत छैक। समाज मे एकटा अलग प्रतिष्ठा रहैत छैक। सिन्दूर जीवनक आधार छियै। जतेक शुभ काज अपना सब के मिथिला मे होइत अछि सब मे तेल सिन्दूर अहिबाती के लगाओल जाइत छनि। सिंन्दूर दान पति के हाथ से तीन बेर वा अहिबाती केर हाथे पांच बेर होइत छनि। विआह दिन, चतुर्थी दिन, बरिसाईत दिन, मधुश्रावणी दिन पति सिन्दूर दान करैत छथि ,कियो कियो अहिबाती मरैत छथि ते पाचम सिन्दूर दान होइत अछि ।अखनि के समय मे ते बहुतो अहिबाती सब के तकलो सँ सिन्दूर माथ मे नहि भेटत । लेकिन हमरा सब के समय मे कहल जाइत छलैक जे भरि माथ सिंन्दूर लगेबाक चाही। विवाह दान मे अपना सब के भुसना सिन्दूर सँ सिन्दूर दान होइत अछि । लेकिन अनदिना मे ललका सिंन्दूर वा कियो कियो पीपा सिंन्दूर लगबैत छथि। काज परोजन मे अपना सब ओत धासा सिंन्दूर करय के प्रथा छैक।जहि दिन माथ से सिन्दूर हटि जाइत छैक महिला कतबो पाई बाली किएक ने रहैत छथि ओ अनाथ भय जाइत छथि ।हुनका सब अलग दृष्टिकोण से देखैत छनि।ओ दया के पात्र बनि जाइत छथि।
