लेख विचार
प्रेषित: ममता झा मेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : सिनुर केर महत्व
सिन्दूर परंपरा, पहचान आ आधुनिको दृष्टि मे अपन विशिष्टता लेल महत्वपूर्ण स्थान अछि।
सम्पूर्ण भारत मे आ खास कय मिथिला मे सम्मान केर दृष्टि सँ सिन्दूर के देखल जाइत अछि।
“सिन्दूर” मिथिला मे सुहागक पवित्र प्रतीक मानल जाइत अछि। सिन्दूर लाल रंगें टा नई बल्कि नारी जीवनक गौरव, सम्मान आ वैवाहिक बंधनक अटूट विश्वास अछि।
मिथिलामे विवाह संस्कार अत्यंत पवित्र मानल जाइत अछि,एहि संस्कारक सबसं महत्वपूर्ण होइत अछि “सिन्दूरदान”। जीवन भरि संग निभाबै के वचन सेहो होइत अछि। ई सिन्दूर “सोहागवती” बनाबैत अछि।
सिन्दूरक धार्मिक महत्व सेहो बहुत अछि। हनुमान जी अप्पन सौंसे देह मे लाल सिन्दूर लगा लेलनि।हुनका भेलनि जे माता सीता सौंथ मे कनी लगेने छथि त रघुनाथक जीवन भरि के संगिनी बनी गेली। तऽ लक हम पूरे देह मे लगा लैत छी। ई एकटा भक्तिभाव के प्रतीक सेहो अछि।
लाल रंग शक्ति, प्रेम आ समर्पणक प्रतीक अछि। सिन्दूर देवी शक्तिक प्रतीक मानल जाइत अछि। मिथिलामे मान्यता अछि जे सिन्दूर स्त्री के वास्ते अनमोल वस्तु आ गहना थिक। जे एकर महत्व बुझैत अछि ओकरा परिवारमे सुख-शांति समृद्धि बनल रहैत अछि।
सामाजिक दृष्टि सँ देखल जाए तऽ सिन्दूर एक महिला के वैवाहिक स्थिति के स्पष्ट करैत अछि।
पारंपरिक मिथिला समाजमे सिन्दूर बिना विवाहित नारी के कल्पना कठिन अछि। इ मात्र श्रृंगारक सामग्री नहि, बल्कि सामाजिक गरिमा के प्रतीक संग चिरकाल तक दू परिवारक लाज अछि।
सिन्दूरक उपयोग केवल विवाह तक सीमित नहि अछि,विशेष रूप सँ पाबैन तिहार मे स्थान अछि।
जेना कोनो पाबैन मे मिथिला मे अरिपन पारल जाइत अछि त ओ बिना सिन्दूर के अपूर्ण अछि। कोनो रीति रिवाज,मूड़न,उपनैन, विवाह,छठिहार मे नोत-हकार पूर’ लेल गीत गाइन,समाजक लोग आ संबंधित सब अबैत छथि तँ हुनका तेल सिन्दूर देल जाइत अछि।
महिला सभ सिन्दूरक उपयोग करैत छथि आ एक-दोसराकेँ सिन्दूर दैत छथि, जाहि सँ आपसी स्नेह बढ़ैत अछि।
आधुनिक युगमे सिन्दूरक महत्व आ उपयोगमे किछु अंतर देखल जा रहल अछि। किछु महिला सिन्दूर लगेनाइ पसंद नै करैत छथि। ओ मानैत छथि जे सिन्दूर एकटा देखावा अछि।एकटा विवाहक चिन्ह अछि। एहि सोचक पाछु शिक्षाक बदलैत रुप आ आजादी संग व्यक्तिगत उदंडता अछि।
हालांकि , बहुत महिला गर्वक संग आइयो सिन्दूर लगबैत छथि आ अप्पन संस्कृति आ परंपरा सँ जोड़ि क मान बढ़बैत छथि। आधुनिक आ परंपरा मे सिन्दूर के महत्व पाबैन तिहार सँ लऽ क’ रीति -रिवाज, पूजा-पाठ सब मे विशेष महत्व अछि।
