“व्यवहारिक अनुभव ज्ञानक प्रमुख श्रोत “

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— आभा झा।   

किताबी ज्ञानक संग बच्चाकेँ दिय व्यवहारिक ज्ञान। बच्चाक भविष्यक लेल सिर्फ किताबी ज्ञान टा आवश्यक नहिं अछि अपितु व्यवहारिक ज्ञान सेहो ओतबे जरूरी अछि। जीवनमे आगू बढ़यकेँ लेल किछु एहेन बात सिखेनाइ सेहो जरूरी अछि जे देखयमे भले ही छोट लागय मुदा वास्तवमे जीवन भरि काज अबैत अछि। अक्सर, अभिभावकक पूरा ध्यान बच्चाक पठन-पाठन यानी पढ़ाई एवं परीक्षामे अव्वल आबय पर केंद्रित रहैत छैन्ह। यैह वजह अछि कि, बच्चा पढ़ाईमे तऽ नीक अंक लऽ अबैत अछि, मुदा व्यवहारिक ज्ञानमे पाछू रहि जाइत अछि। व्यवहारिक ज्ञानक मतलब ” परिस्थितिकेँ लोकेँ सही तरीका सँ और सूझबूझ सँ डील करयकेँ कला”।
पहिने बच्चा संयुक्त परिवारमे रहैत छल। बाबा-बाबी, कका-काकीकेँ संग कखन व्यवहारिक ज्ञान सीख लैत छल पता नै चलैत छल। आइ काल्हि बेसीतर बच्चा एकल परिवारमे माँ-बाबूजीक संग रहैत अछि। आस-पड़ोस सँ बेसी मतलब नहिं रखैत अछि।
महानगरमे बेसीतर बच्चाक माय-बाप दुनू नौकरी पर चलि जाइत छथिन। बच्चा दिन भरि असगरे या मेडकेँ सहारे रहैत अछि। आइ काल्हि स्कूलमे सेहो बेसीतर पेपरे चलैत रहैत अछि। कखनो यूनिट टेस्ट, कखनो वीकली टेस्ट, एहि कारण बच्चा कतौ संबंधिकक घर नहिं जा पबैत अछि। पढ़ाईकेँ एतेक प्रेशर रहैत छैक कि फैमिली फंक्शनमे सेहो कखनो काल ही जेनाइ संभव होइत अछि। पहिलुका समयमे बच्चा सब फैमिली फंक्शनमे जाइत रहैत छल आ किछु व्यवहारिक ज्ञान अपने आप सीख जाइत छल। आइ काल्हिकेँ बच्चामे किताबी ज्ञान तऽ बड्ड होइत अछि मुदा व्यवहारिक ज्ञान कमे देखय लेल भेटैत अछि। ताहि दुवारे हमर सभक जिम्मेदारी बनैत अछि कि समय-समय पर बच्चाकेँ व्यवहारिक ज्ञान देल जाय कियैकि जीवनमे किताबी ज्ञानक संग-संग व्यवहारिक ज्ञान सेहो बहुत काज अबैत अछि।
बच्चाकेँ सिखबियौ कि पैघक संग केहेन व्यवहार करबाक चाही। घर पर आयल पाहुनकेँ गोर लगनाइ सिखबियौ। बच्चाकेँ विनम्र बनबियौ। बच्चा कोनो परिस्थितिमे रहै दोसर सँ हमेशा विनम्रता सँ ही गप्प करय, कियैकि कहलो गेल अछि, ” ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए, औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय”। बच्चाकेँ हमेशा खुश रहनाइ सिखबियौ,हँसनाइ सिखबियौ कियैकि हँसैत चेहरा सबकेँ आकर्षित करैत अछि और बच्चाक आत्मविश्वास बढ़बैत अछि। बच्चाकेँ शरूए सँ पाइक महत्व बुझबियौ। ओकरामे बचतकेँ आदत लगबियौ। बच्चाकेँ सभक संग मिलि-जुलि कऽ रहनाइ सिखबियौ आ गरीबक मदद करबा लेल प्रेरित करियौ। बच्चाकेँ अपन काज स्वयं करयकेँ आदत लगबियौ। ओकरा थोड़ बहुत भनसा घरक काज सेहो सिखबियौ जे आगू चलि कऽ हुनके काज एतेन। बच्चाकेँ व्यायाम, रूचिक अनुसार कोनो शारीरिक एक्टिविटी जेना डांस, तैराकी, संगीत इत्यादि जरूर सिखबियौन। अपन बच्चाक संग क्वालिटी टाइम बितबियौ। हुनका अपन संस्कृति, पाबनि-तिहारक बारेमे विस्तृत जानकारी दियौन। हुनका संग पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक स्थल पर जाउ आ हुनका ओकर महत्वक बारेमे बतबियौन। हुनका प्रकृतिक सानिध्यमे रहनाइ सिखबियौन। गाछ लगबै लेल प्रेरित करियौन आ संग-संग गाछ-बिरिछ, फूल-पत्ती, अन्न-अनाजक नाम सँ सेहो अवगत करबियौन। ई सब हुनकर व्यवहारिक ज्ञानमे वृद्धि करतेन।
बच्चाकेँ आत्म अनुशासन सिखेबाक चाही। समय पर सुतनाइ आ उठनाइ, खान-पान पर नियंत्रण, समयक सही उपयोग, एहि सभक महत्व हुनका बतबियौन। बच्चाकेँ स्पष्ट वार्तालाप केनाइ आ निर्भीक, निडर भेनाइ सिखबियौन। बच्चाकेँ दोसरक सम्मान केनाइ आ अपन क्रोध पर नियंत्रण राखक महत्व बुझेबाक चाही। जहाँ तक संभव हुए बच्चाकेँ पारिवारिक मतभेद सँ दूर राखि।ओकर सामने पारिवारिक झगड़ा आ आपसी मतभेद जेहेन कतेक वाक्यांश आबि जेबाक खतरा रहैत छैक जाहि सँ बच्चा पर दुष्प्रभाव पड़क संभावना रहैत छैक।
ज्ञान वृक्ष अछि तऽ अनुभव ओकर छांह। प्रश्न उठैत अछि कि वृक्षक महत्व बेसी छैक या छाहरिक। दुनूकेँ अपन -अपन महत्व छैक। परीक्षामे सफलताक प्राप्तिक लेल ज्ञानक आवश्यकता पड़ैत छैक, मुदा जीवनमे कतेको एहेन इम्तिहान लोककेँ देबय पड़ैत छैक जतऽ किताबी ज्ञान काज नहिं अबैत अछि आ अनुभव सफलताक द्वार पार करा दैत अछि। ज्ञान हमरा योग्य बनबैत अछि मुदा हमर योग्यतामे निखार अनुभवक कसौटी पर तपि कऽ ही अबैत अछि। किताब सँ प्राप्त ज्ञान या सैद्धांतिक ज्ञानक आधुनिक दुनियामे बहुत कम प्रासंगिकता रहि गेल अछि।आजुक आधुनिक समयमे,किताबी ज्ञानक तुलनामे व्यवहारिक ज्ञानक कहीं अधिक मूल्य अछि।
जय मिथिला, जय मैथिली।

आभा झा
गाजियाबाद