“कला सांस्कृतिक धरोहरक मूल रूप अछि।”

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— रिंकू झा       

अपन देश भारत स जुरल समस्त राज्य खास क मिथिला हस्त शिल्प यानी हाथक कला के लेल सर्वोच्च माणल जाय छै, एत दैनिक जीवन स जुरल छोट स छोट वस्तु कोमल रूप में हृदय स जुड़ी बनाओल जाय छै, जे हमरा अहा लेल सांस्कृतिक धरोहरक मूल रूप छै।
हस्तकला यानी हाथ स बनाओल गेल एक टा कला (वस्तु) q जे कारीगर द्वारा तैयार केल जाय छै, ओहि मे कारीगर के कठिन परिश्रम आर लगन देखल जाय छै,अहि वस्तु के तैयार करए में बहुत समय लागे छै,अहि कला के अपन एक टा धार्मिक आर सांस्कृतिक महत्व छै, जे ओहि क्षेत्र के जाति और जनजाति द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी चलल आबि रहल छै,भारत के समस्त राज्य अपन अपन विशिष्ट कला के लेल प्रसिद्ध छै।
जेना _ कश्मीर कढ़ाई बला शॉल,राजस्थान बांधनी वस्त्र , तमिलनाडु तांबा के मूर्ति , आंध्र सिल्क सारी , बनारस बनारसी साड़ी, तमिलनाडु कांझीभरम सिल्क, बंगाल तांत सारी, लखनऊ चिकन wark सारी,आसाम के वेत ,बिहार के टेराकोटा,आर खास के मिथिला के मधुबनी पेंटिंग आर सिक्की कला आदि ई सब कला के साथ मनुष्य के शारीरिक आर घरक सौंदर्यता बढ़ाबई छै।
हस्तकला बहुत सारा लोक के रोजगार छै जाहि स ओकर परिवार के रोजी रोटी चलई छै।
तकनीकी युग यानी मशीनीकरण समय में बहुत कम समय में बेशि स बेशी चीज के बनाएल जा सकई छै, आर बेसी सौंदर्यता के साथ प्रदर्शित केल जाए छै, कम समय में कम मेहनत के कारण बाजार में चीज के दाम कम भ जाय छै, आर लोक सब त सुविधा के खोजैत घुमई छैथ, कम समय मे बिना मेहनत के कम दाम में अगर चीज भेट जाय छै त लोक के की चाही छलावा के जिंदगी में आर की चाही हाथक बनल चीज के दाम बेसि होई छै से सब के पता छै देख में कम सुंदर भेला के बादो मजबूती असल में ओकरे अंदर होई छै जाहि में मेहनत लागल छै ।
अपना मिथिला मेंरोजगार के कोनो कमी नई अछी, एतए बहुत सारा कला एहन छै जाहि स लोक रोजगार कसकई छैथ जेना की मधुबनी पेंटिंग बना क लोक विदेश तक पहुंच बना रहल छैथ डिमांड छै बाजार में मधुबनी पेंटिंग के, बांस के बनल टोकरी पथिया ,मौनी,आदि सिक्की कला सब हम अहा बिसरल जा रहल छी , ई सब चीज अब पूजे पाठ में नजर अबैया,अहि तरहे बहुत एहन कला छै जे पहिले महिला लोकणी बनवई छलैथ जेना क्रोशिया, कपड़ा पर कढ़ाई आदि सब विलुप्त भ रहल अछी, मिथिला वासी सब चाहैथ त अहि कला सब के बढ़ावा द रोजगार के साथ _साथ अपन धरोहर के बचा सकैत छैथ।
कही सकई छी जे मिथिला में रोजगार के कोनो कमी नही छै बस लोक सब के सोच अते पैघ भ गेल छै की हम अहा दिखावा आर आसान जीवन जीवय के चकाचौंध में सब अपन _अपन सपना सच करे के होर में शहर के तरफ भागी, गांव घर छोरी अपना कला के बिसरी मशीनी युग मे मशीन जका दौरैत रहइ छी आर अपन पहचान अपन कला आदि सब गमा रहल छी ।
ओना आधुनिक युग मे तकनीकी शिक्षा के कीछ विशेषता से छै,जाहि स पहिले के अपेक्षा अहि क्षेत्र में कीछ बदलाव भेटत जेना पहिले कला स जूरल कोनो भी चीज खाय बला वस्तु स लय, पहिरय बला होई या फेर सजावट के समान सब केवल गांव के बाजार तक सीमित रहे छल ,मुदा आब एकर प्रचार_प्रसार भ रहल अछी। विदेश तक डिमांड छै, ऑनलाइन खरीदारी _बिक्री होई छै, घर में रहे बाली महिला सब जे कीछ नै क पाबए छलैथ सेहो सब बढ़ी _चढ़ी के अपन कला के उजागर क रहल छैथ,घर बैसल रोजगार क रहल छैथ ऑनलाइन प्रशिक्षण शिविर सब फ्री में कला ज्ञान सब सिखबई छैथ जाहि स कीयो भी अहि के लाभ प्राप्त क रोजगार के सकई छैथ,।
ओना कही सकई छी की अपने सब दोसर देश के देखी ओकर संस्कृति आर कला के अपनाव के होर में अपना कला के बिसरी रहल छी जे आबे बला समय में खतरा के घंटी अछी,अपना धरोहर के खुद नई संजोगव त दोसर किया अपनेता,अपना हस्तकला के बचाव आर धरोहर रूप में संजोगए के लेल अपना सब गोटे के यानी समस्त मिथिलावासी आर भारतवासी के जमीनी स्तर पर उतरी काज करै परत केवल नारा स की हेत ,अहि कला के द्वारा बेसी स बेसी लोक रोजगार पाबैथ,अपन जीविका चलाबैथ, हमरा अहा के आबे बला पीढ़ी अहि कला स जूरल रहैथ गांव छोरी पलायन नहीं करैथ , बेरोजगार नही रहैथ अहि लेल आधुनिक युग में तकनीकी आर हाथ के जादू दूनू के मिला आगा बढ़ी जाहि स समाज में तालमेल बनल रहे आर अपन मिथिला साथ _साथ समस्त भारत आर्थिक रूप स उन्नति करैथ तथा भारत के कला विश्व में सर्वाधिक अपन परचम फहरावऐ याह कामना करैत समापन करै छी ।
कनी पैघ भ गेलै क्षमा चाहव।
✍️ रिंकु झा, ग्रेटर नोएडा