“भाइ-बहिनक स्नेह आर लगावक प्रतीक अछि ई पाबनि”

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— रिंकू झा       
भरदुतिया भाई _बहिन के स्नेह आर लगाव के प्रतीक स जूरल एक टा पाबैन छै।
ओना त मिथिला में सब दिन बारहों मास छतिशो दिन एक टा ना एक टा पाबैन होइते रहई छै, आर सब पाबैन स कीछ नई किछ तथ्य जूरल छै,जे परिवार के कल्याण , सामाजिक कल्याण , आरोग्यता, दीर्घ आयु आदि स सम्बन्धित रहई छै।
तहीना भरदुतिया भाई आर बहिन के स्नेह स जुरल एक टा एहन पाबैन छै जाहि में बहिन सब के द्वारा अपन भाई के दीर्घ आयु के कामना केल जाय छै यमराज स।
भरदुतिया कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में दुतिया तिथि के मनाएल जाय छै, जाहि में बहिन सब भोरे _भोरे सूति उठी के अपन _अपन अंगना के निपै छैथ आर ओहि ठान अंगना में अरीपन द पीढ़ी बईसा ओहि ठान एक टा मैंटक मटकोरी ध ओहि में पाँच टा पात पान, सुपारी, मखान,आर कुमहरक फूल ,चांदीके अथवा साधारण सिक्का राखी , अपन अपन भाई स नोत लै छैथ।
भाई के पिरही पर वैसा क पीठार के चानन लगा सिंदूर के ठोप लगाएल जाय छै, तखन हाथ में सिन्दूर _पीठार के ठोप तीन बेर लगेल जाय छै फेर मंत्र के उच्चारण करैत मटकोरी में जे समान रहई छै ओहि ल के पैन स हाथ धोएल जाय छै,
मंत्र _ इ होई छै ( यमुना नोतलेन यम के हम नोतई छी अपन भाई के जेना गंगा जमुना के धार बहए तहीना हमर भाई के औरदा बढ़ए ) तखन भाई सब सेहो अपन शक्ति के अनुसार बहिन सब के उपहार दई छथींन। बहिन सब भाई के तरह _तरह के पकवान बना क खाना खुआबई छथीन।
ई पाबैँन बहुत प्राचीन काल स चली एबी रहल छै, कहावत छै की सूर्य देव के पुत्र यम आर पुत्री यमुना सब स पहिले ई पाबैन मनेने छैथ, दुनु भाई बहिन में बहुत प्रेम छलैन, जखन यमुना सासूर चयल
गेलखिन त यम के बहिन के याद अबैन त एक दिन यम अपन बहिन स भेट करे लेल गेलखिन जे देखी यमुना बहुत प्रसन्न भेलखिन ओ विधिपूर्वक भाई के पूजा केलनि ओ कार्तिक शुक्ल पक्ष के दुतिया तिथि छल ,यम कहलखिन बहिन यमुना स जे हम अहा पर प्रसन्न छी अहा जे मांगब से मांगु हम पूरा करब , तखन यमुना अपन भाई स कहलखीन जे आई के दिन अहा ककरो
भाई के प्राण हरण नई करवई सब बहिन के सोहाग _भाग भरल रहई आर ओकर भाई अमर रहई, ई सुनी यम कहलखिन जकड़ जन्म भेलैं है ओकर मृत्यु अवश्य हेतै ते हम अमरत्व होब के वरदान नई द सकई छी, ह ई जरूर क सकई छी की आई के दिन जे बहिन सब श्रद्धा स ई भरदुतिया मनेती हुनका भाई दीर्घायु प्रदान करबैन, यमुना स्वीकार क लै छैथ तहिए स ई पाबैन श्रद्धा रूपी केल जाए छै आर ई मंत्र पढल जाय छै
कहल जाय छै की भगवान श्री कृष्ण सेहों अपन बहिन सुभद्रा स नोत लेने छैथ।
मिथिला के संस्कृति के अनुसार सब बहिन सब ई पाबैन बहुत चाव स मनोबई छैथ,आर भगवान स कामना करै छैथ की हुनकर भे हमेशा दीर्घायु रहैँ न।
याह थिक मिथीलाक भाई बहिन के स्नेहक पाबैन भरदुतिया,
भगवान सब भाई बहिन के प्रेम बनोने रहैथ आर संग हमरो दूंनू भाई के दीर्घ आयु दैथ ।
✍️ रिंकु झा